शिवपुरी। माधव राष्ट्रीय उधान से माधव टाइगर रिजर्व तक का सफर पूरा हो चुका है। टाइगर रिजर्व का बजट भी बढ़ गया,टाइगरों की संख्या मे इजाफा भी हुआ है,लेकिन आंकड़े शिवपुरी के पर्यटन बढाने वाली उम्मीदों पर डरावने आंकड़े सामने आए है कारण स्पष्ट है कि पिछले वर्ष की तुलना में इस वर्ष MTR में देशी पर्यटक 33.50% कम पर्यटक पहुंचे है,स्पष्ट कारण तो नजर नहीं आ रहा है लेकिन यह बात तो तय है कि शिवपुरी के माधव टाईगर रिजर्व प्रबंधन पर्यटकों को आकर्षित करने के लिए कोई विशेष रणनीति नहीं बनाई है,वही विदेशी पर्यटकों के प्रतिशत में इजाफा हुआ हैं।
मंगलवार, 1 जुलाई से हर वर्ष की तरह इस बार भी मानसून के चलते माधव टाइगर रिजर्व को तीन महीने के लिए पर्यटकों के लिए बंद कर दिया गया है। वन्य जीवों के प्रजनन और संरक्षण को ध्यान में रखते हुए रिजर्व अब 30 सितंबर तक बंद रहेगा। इसके साथ ही बीते पर्यटन सत्र के आंकड़े भी सामने आए हैं, जो पर्यटन प्रबंधन की चुनौतियों को उजागर कर रहे हैं।
वन विभाग के आंकड़ों के अनुसार 2024-25 के पर्यटन सत्र में 14,467 पर्यटक माधव टाइगर रिजर्व पहुंचे थे, जिनमें 14 विदेशी पर्यटक शामिल थे। वहीं अक्टूबर 2025 से जून 2026 तक चले मौजूदा सत्र में केवल 9,620 पर्यटकों ने भ्रमण किया। इनमें 47 विदेशी पर्यटक शामिल रहे। यानी विदेशी पर्यटकों की संख्या तीन गुना से अधिक बढ़ी, लेकिन देशी पर्यटकों की संख्या में भारी गिरावट आने से कुल पर्यटन प्रभावित रहा।
बाघ बढ़े, फिर भी नहीं बढ़ा पर्यटन
बीते एक वर्ष में माधव टाइगर रिजर्व में बाघों की संख्या में इजाफा हुआ है। सामान्य तौर पर किसी भी टाइगर रिजर्व में बाघों की संख्या बढ़ने पर पर्यटकों की संख्या भी बढ़ती है, लेकिन माधव में इसके उलट तस्वीर सामने आई। पर्यटन विशेषज्ञों का मानना है कि रिजर्व के प्रचार-प्रसार, बेहतर पैकेज, ऑनलाइन प्रमोशन और पर्यटन गतिविधियों को लेकर कोई ठोस रणनीति नहीं अपनाई गई, जिसका असर सीधे पर्यटकों की संख्या पर पड़ा।
90 प्रतिशत पर्यटकों की पहली पसंद बना सेलिंग क्लब क्षेत्र
इस पूरे सीजन में लगभग 90 प्रतिशत पर्यटकों ने सेलिंग क्लब गेट से दक्षिण रेंज का भ्रमण किया। यहां स्थित चांदपाठा झील, जॉर्ज कैसल, ऐतिहासिक सेलिंग क्लब, प्राकृतिक सौंदर्य और जल स्रोतों के आसपास आसानी से दिखाई देने वाले टाइगर, तेंदुआ, हाथी, चीतल सहित अन्य वन्य जीव पर्यटकों के आकर्षण का केंद्र रहे। यही कारण रहा कि अधिकांश पर्यटकों ने इसी मार्ग को चुना।
भरकुली गेट से महज 10 प्रतिशत पर्यटक पहुंचे
इसके विपरीत शहर से करीब 20 किलोमीटर दूर स्थित भरकुली गेट की पूर्वी रेंज में केवल 10 प्रतिशत पर्यटक ही पहुंचे। यहां बलारपुर मंदिर प्रमुख आकर्षण है, लेकिन सेलिंग क्लब क्षेत्र जैसी वन्यजीव गतिविधियां और पर्यटन सुविधाएं उपलब्ध नहीं हैं। अधिक दूरी, अतिरिक्त ईंधन खर्च और सीमित आकर्षण भी पर्यटकों की कम संख्या की बड़ी वजह बने।
अगले सीजन से उम्मीदें
वन विभाग का कहना है कि आने वाले पर्यटन सत्र में पूर्वी रेंज में सुविधाओं का विस्तार, बेहतर पर्यटन प्रबंधन और नए आकर्षण विकसित किए जाने से पर्यटकों की संख्या बढ़ने की उम्मीद है। हालांकि इस सीजन के आंकड़े साफ संकेत दे रहे हैं कि केवल बाघों की संख्या बढ़ना ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि पर्यटकों को आकर्षित करने के लिए प्रभावी प्रचार, बेहतर सुविधाएं और संतुलित पर्यटन रणनीति भी उतनी ही जरूरी है।

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