शिवपुरी, कैलादेवी कोल्ड स्टोरेज और व्यापारी पर होगी FIR, मामला अवैध खाद का

vikas
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शिवपुरी।
कोलारस के मानीपुरा स्थित कैलादेवी कोल्ड स्टोरेज में पकड़े गए डीएपी खाद के ट्रक मामले में जांच टीम की रिपोर्ट ने कई चौंकाने वाले खुलासे किए हैं। कलेक्टर अर्पित वर्मा द्वारा गठित आठ सदस्यीय जांच दल ने पाया है कि खाद की पूरी खेप अवैध रूप से मंगवाई गई थी और उसका भंडारण तथा वितरण नियमों के विपरीत किया जा रहा था। जांच रिपोर्ट सामने आने के बाद अब इस मामले में व्यापारी बलवीर यादव और कैलादेवी कोल्ड स्टोरेज संचालक की मुश्किलें बढ़ना तय माना जा रहा है। सूत्रों के अनुसार दोनों के नाम एफआईआर में जोड़े जाने की संभावना प्रबल हो गई है।

लाइसेंस नहीं, फिर भी मंगवा ली खाद की खेप
जांच में सामने आया है कि डीएपी खाद की खेप टोंगरा रोड स्थित मैसर्स किसान हलघर खाद भंडार के संचालक बलवीर यादव द्वारा मंगवाई गई थी। सबसे गंभीर तथ्य यह सामने आया कि बलवीर यादव के पास इस खाद के भंडारण और विक्रय का कोई वैध लाइसेंस नहीं था। इसके बावजूद उसने बड़ी मात्रा में डीएपी खाद मंगवाकर बिक्री की तैयारी कर ली।

जांच दल ने इसे उर्वरक नियंत्रण आदेश (Fertilizer Control Order) का स्पष्ट उल्लंघन माना है। नियमों के अनुसार बिना लाइसेंस कोई भी व्यक्ति या संस्था खाद का व्यापार नहीं कर सकती, लेकिन यहां खुलेआम नियमों को नजरअंदाज किया गया।

जहां पहुंचना था खाद भंडार, वहां नहीं पहुंचा ट्रक
रिपोर्ट के अनुसार खाद की खेप को किसान हलघर खाद भंडार पहुंचना था, लेकिन ट्रक को सीधे कैलादेवी कोल्ड स्टोरेज में उतार दिया गया। यहीं से किसानों को खाद वितरित किए जाने की तैयारी चल रही थी। जांच टीम ने माना कि यह पूरी प्रक्रिया योजनाबद्ध तरीके से संचालित की जा रही थी।

कोल्ड स्टोरेज संचालक की भूमिका भी संदेह के घेरे में
जांच रिपोर्ट में कोल्ड स्टोरेज संचालक की भूमिका को भी संदिग्ध माना गया है। अधिकारियों का मानना है कि किसी भी निजी परिसर में इतनी बड़ी मात्रा में खाद का भंडारण संचालक की जानकारी के बिना संभव नहीं है। रिपोर्ट में स्पष्ट रूप से उल्लेख किया गया है कि संचालक की जानकारी और संभावित मिलीभगत की जांच आवश्यक है। यही वजह है कि अब व्यापारी के साथ-साथ कोल्ड स्टोरेज संचालक का नाम भी एफआईआर में शामिल किए जाने की चर्चा तेज हो गई है।

जांच रिपोर्ट कलेक्टर को सौंपी जाएगी
कोलारस एसडीएम अनूप श्रीवास्तव ने बताया कि जांच दल को जिन बिंदुओं पर जांच करनी थी, वह पूरी कर ली गई है। जांच प्रतिवेदन कलेक्टर को भेजा जा रहा है। हालांकि उन्होंने रिपोर्ट के निष्कर्ष सार्वजनिक करने से इनकार करते हुए कहा कि इसकी जानकारी कलेक्टर स्तर से ही दी जाएगी। अब सबकी निगाहें कलेक्टर के फैसले और संभावित एफआईआर पर टिकी हैं। यदि जांच रिपोर्ट के आधार पर कार्रवाई होती है तो यह मामला जिले में अवैध खाद कारोबार के खिलाफ बड़ी कार्रवाई साबित हो सकता है।


























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