Kids Garden School के संचालक शिवकुमार गौतम के खिलाफ FIR का आदेश निरस्त, पढिए पूरा मामला

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शिवपुरी।
न्यायालय सत्र न्यायाधीश शिवपुरी (पीठासीन अधिकारी श्री राजेन्द्र प्रसाद सोनी) ने एक महत्वपूर्ण कानूनी निर्णय सुनाते हुए किड्स गार्डन स्कूल के संचालक शिवकुमार गौतम के खिलाफ FIR दर्ज करने के अधीनस्थ CJM कोर्ट के आदेश को खारिज कर दिया है । कोर्ट ने स्पष्ट किया कि सिविल प्रकृति के भूमि विवाद को छिपाकर और बिना उचित प्रारंभिक जांच के सीधे आपराधिक मामला दर्ज करने का निर्देश देना न्यायिक दृष्टिकोण से त्रुटिपूर्ण है ।

क्या है पूरा मामला
मामला शिवपुरी के ग्राम बछौरा स्थित सर्वे क्रमांक 609/2 की भूमि से जुड़ा है । 85 वर्षीय वृद्ध कृषक रामजीलाल वर्मा ने CJM कोर्ट में भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 175(3) के तहत एक आवेदन लगाया था । उनका आरोप था कि शिवकुमार गौतम ने उनकी जमीन के संबंध में हेमंत कुमार गुप्ता के साथ मिलकर एक पूरी तरह से कूटरचित और फर्जी अनुबंध पत्र (दिनांक 05.02.2024) तैयार किया, ताकि उन्हें उनकी संपत्ति से बेदखल किया जा सके । इसी आवेदन पर सुनवाई करते हुए CJM कोर्ट ने 7 मई 2026 को कोतवाली थाना प्रभारी को शिवकुमार गौतम के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 318(4) और 336(3) के तहत मामला दर्ज करने का आदेश दिया था ।

सत्र न्यायालय में खुली छिपे तथ्यों की पोल
इस आदेश के खिलाफ स्कूल संचालक शिवकुमार गौतम ने वरिष्ठ अधिवक्ता एस.एस. गोयल के माध्यम से सत्र न्यायालय में आपराधिक पुनरीक्षण याचिका (क्रमानक 71/2026) दायर की । कोर्ट के समक्ष यह तथ्य सामने आया कि,मूल अनुबंध को छिपाया गयाध् जमीन मालिक रामजीलाल वर्मा ने स्वयं जून 2023 में इस जमीन का सौदा ₹1,53,00,000 में शिवकुमार गौतम से किया था और बयाने की राशि भी ली थी ।


सिविल कोर्ट में मामला लंबित, तय समय में रजिस्ट्री न कराने पर शिवकुमार गौतम पहले ही रामजीलाल के खिलाफ सिविल कोर्ट में 'संविदा के विनिर्दिष्ट अनुपालन' (Specific Performance of Contract) का मुकदमा दायर कर चुके हैं । रामजीलाल ने सिविल कोर्ट में जवाबदावा पेश कर पैसे लेने की बात भी स्वीकार की थी, लेकिन CJM कोर्ट से यह बात छिपाई।

कोई जालसाजी नहीं, बाद में शिवकुमार ने जो हेमंत गुप्ता के साथ अनुबंध किया, उसमें कहीं भी खुद को मालिक नहीं बताया था और न ही रामजीलाल के फर्जी हस्ताक्षर किए थे । विवाद उठने पर वह अनुबंध भी आपसी सहमति से निरस्त हो चुका था।

नए कानून (BNSS) की अनदेखी पड़ी भारी
सत्र न्यायाधीश राजेन्द्र प्रसाद सोनी ने अपने आदेश में रेखांकित किया कि नई भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 175(3) [जो पुरानी CrPC की धारा 156(3) की जगह आई है] में मजिस्ट्रेटों के लिए कड़े सुरक्षात्मक नियम बनाए गए हैं । इसके तहत,मजिस्ट्रेट को FIR का आदेश देने से पहले संबंधित पुलिस अधिकारी का पक्ष जानने का अवसर देना अनिवार्य है, ताकि झूठे आरोपों को शुरू में ही छांटा जा सकें इस मामले में CJM कोर्ट ने न तो फिजिकल थाने से और न ही कोतवाली थाने से कोई जांच प्रतिवेदन या रिपोर्ट मंगवाई।

अदालत ने पाया कि जमीन आज भी राजस्व रिकॉर्ड में मूल स्वामी रामजीलाल के नाम पर ही दर्ज है और उन्हें कोई आर्थिक क्षति नहीं हुई है । यदि कोई शिकायत हो सकती थी तो वह हेमंत गुप्ता को हो सकती थी, जिन्होंने कोई शिकायत नहीं की ।

लिंक को जोड़ते हुए माननीय न्यायालय ने माना कि CJM कोर्ट द्वारा बिना प्रारंभिक जांच और पुलिस की दलीलें सुने पारित किया गया आदेश शुद्धता, वैधता और औचित्य की दृष्टि से टिकने योग्य नहीं है । अतः अदालत ने पुनरीक्षण याचिका स्वीकार करते हुए 7 मई 2026 के विवादित आदेश को अपास्त (निरस्त) कर दिया हैं।

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