शिवपुरी। शिवपुरी शहर के जिला कलेक्ट्रेट कार्यालय पर बीते मंगलवार को सतनवाड़ा कला के रहने वाले कुछ ग्रामीण शिकायत लेकर पहुंचे, ग्रामीण पिछले 20 वर्षों से पानी की बूंद-बूंद के लिए तरस रहे हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि गाँव का सरपंच इतना भ्रष्ट और लापरवाह है कि चुनाव जीतने के बाद वह गाँव में काम करवाता नजर नहीं आया। अगर कभी आता भी है, तो ग्रामीणों के डर और शिकायतों से बचने के लिए अपने सिर पर हेलमेट लगाकर आता है ताकि कोई उसे पहचान न सके।
मड़ीखेड़ा लाइन पास, फिर भी 4 किलोमीटर का सफर
सतनवाड़ा कला अस्पताल के पास स्थित आदिवासी कॉलोनी के निवासियों का कहना है कि उनके ठीक पास से मड़ीखेड़ा डैम की मुख्य पानी की पाइपलाइन गुजर रही है। इसके बावजूद पूरी बस्ती पानी के लिए मौहताज है।
गाँव की कल्ली बाथम ने बताया कि बस्ती के आसपास के लोगों को पानी मिल रहा है, लेकिन हमारी कॉलोनी के साथ सालों से भेदभाव किया जा रहा है। हमें पानी लाने के लिए रोजाना 3 से 4 किलोमीटर दूर पैदल जाना पड़ता है। सरपंच और सेक्रेटरी से कई बार गुहार लगाई, लेकिन कोई सुनने वाला नहीं है।
पानी के फेर में छूट रही मजदूरी, बुजुर्ग भी बेहाल
इस जल संकट का सबसे बुरा असर ग्रामीणों की आजीविका पर पड़ रहा है। यहाँ के अधिकांश लोग मजदूर हैं। दूर से पानी ढोने के चक्कर में वे समय पर मजदूरी करने नहीं जा पाते, जिससे उनके सामने भूखे मरने की नौबत आ गई है। इंसानों के साथ-साथ मवेशियों के लिए भी पीने के पानी का कोई इंतजाम नहीं है।
गाँव की एक बुजुर्ग महिला रामश्री बाथम ने अपना दर्द बयां करते हुए कहा कि मेरे कोई बेटा-बेटी नहीं हैं। पति को आँखों से दिखाई नहीं देता। इस बुढ़ापे और लाचारी में भी मुझे मीलों दूर से सिर पर पानी ढोकर लाना पड़ता है। शासन-प्रशासन हमारी सुध नहीं ले रहा है।
उग्र आंदोलन की दी चेतावनी
ग्रामीणों का आक्रोश अब चरम पर है। सतनवाड़ा कला के पीड़ितों का साफ कहना है कि यदि प्रशासन ने इस बार भी उनकी सुनवाई नहीं की और आदिवासी बस्ती को मड़ीखेड़ा लाइन से पानी नहीं दिलाया, तो वे चक्काजाम और एक बड़ा उग्र आंदोलन करने के लिए विवश होंगे।

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