शिवपुरी। किसी भी जिले के विकास की रफ्तार को गति देने में बैंकिंग सेवाओं की महत्वपूर्ण भूमिका होती है, लेकिन भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) की हालिया समीक्षा ने शिवपुरी की बैंकिंग व्यवस्था को लेकर चिंताजनक तस्वीर पेश की है। आरबीआई के वित्तीय समावेशन सूचकांक (एफआई-इंडेक्स) में शिवपुरी को उन जिलों की श्रेणी में रखा गया है जहां बैंकिंग सेवाओं की पहुंच और उनका उपयोग बेहद कम है। प्रदेश के सबसे निचले 10 प्रतिशत जिलों में शामिल होने के बाद अब प्रशासन और बैंकिंग संस्थानों के सामने स्थिति सुधारने की बड़ी चुनौती खड़ी हो गई है।
आरबीआई द्वारा जारी वित्तीय समावेशन सूचकांक बैंकिंग सेवाओं तक लोगों की पहुंच, इन सेवाओं के उपयोग और उनकी गुणवत्ता के आधार पर तैयार किया जाता है। इसी मूल्यांकन में पाया गया कि शिवपुरी सहित प्रदेश के आठ जिले-श्योपुर, मऊगंज, डिंडोरी, सीधी, अलीराजपुर, उमरिया और भिंड-बैंकिंग सुविधाओं के मामले में काफी पीछे हैं। विशेष रूप से ग्रामीण और दूरस्थ क्षेत्रों में बैंक शाखाओं तथा बैंकिंग प्रतिनिधियों की उपलब्धता सीमित होने के कारण बड़ी आबादी अब भी औपचारिक बैंकिंग व्यवस्था से पूरी तरह नहीं जुड़ सकी है।
जानकारी के अनुसार आरबीआई ने करीब नौ माह पहले ही इन जिलों को कमजोर बैंकिंग पहुंच वाले क्षेत्रों के रूप में चिह्नित कर दिया था। इसके बाद लगातार समीक्षा की जा रही है। हाल ही में आयोजित जिला स्तरीय सलाहकार समिति की बैठक में भी इस मुद्दे को प्रमुखता से उठाया गया और बैंकों को अपनी कार्यप्रणाली में सुधार लाने के निर्देश दिए गए।
अब सुधार की दिशा में बनेगा रोडमैप
आरबीआई और जिला प्रशासन द्वारा बैंकिंग सेवाओं को मजबूत बनाने के लिए कई कदम प्रस्तावित किए गए हैं। सबसे पहले ऐसे गांवों और क्षेत्रों की पहचान की जाएगी जहां बैंकिंग सुविधाएं उपलब्ध नहीं हैं। वहां नई बैंक शाखाएं या बैंकिंग कॉरेस्पोंडेंट (बीसी) केंद्र खोले जाएंगे ताकि लोगों को बैंक तक पहुंचने के लिए लंबी दूरी तय न करनी पड़े।
इसके साथ ही लीड डिस्ट्रिक्ट मैनेजर (एलडीएम) को निर्देश दिए गए हैं कि प्रत्येक जिला स्तरीय बैठक में इस विषय को प्रमुख एजेंडा बनाया जाए और बैंकों के प्रदर्शन की नियमित समीक्षा की जाए। बैंक खातों के उपयोग, डिजिटल लेन-देन, सरकारी योजनाओं के लाभ वितरण और वित्तीय साक्षरता जैसे बिंदुओं पर विशेष निगरानी रखी जाएगी।
गांव-गांव चलेंगे जागरूकता अभियान
बैंकिंग सेवाओं की उपलब्धता के साथ-साथ लोगों को उनके उपयोग के प्रति जागरूक बनाना भी चुनौती है। इसी को देखते हुए ग्रामीण क्षेत्रों में वित्तीय साक्षरता शिविर आयोजित किए जाएंगे। इन शिविरों में लोगों को बैंक खाते, डिजिटल भुगतान, बीमा, पेंशन योजनाएं और सरकारी वित्तीय योजनाओं की जानकारी दी जाएगी।
शिवपुरी के लीड डिस्ट्रिक्ट मैनेजर आर.एस. वर्मा ने बताया कि बैंकिंग सेवाओं में सुधार के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि शिवपुरी और पिछोर क्षेत्र में कार्यरत सामाजिक संस्थाओं और एनजीओ के सहयोग से जागरूकता अभियान चलाए जा रहे हैं तथा आने वाले समय में इस अभियान को और तेज किया जाएगा।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि जिले में बैंकिंग सुविधाओं का विस्तार और वित्तीय जागरूकता दोनों साथ-साथ बढ़ाई गईं तो शिवपुरी न केवल आरबीआई की इस सूची से बाहर निकल सकेगा, बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी नई मजबूती मिलेगी। फिलहाल आरबीआई की रिपोर्ट ने यह स्पष्ट संकेत दे दिया है कि जिले में वित्तीय समावेशन को लेकर अभी लंबा सफर तय करना बाकी है।

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