शिवपरी तहसीलदार ने कलेक्टर अर्पित वर्मा को गुमराह करने की कोशिश,फस गए सिद्धार्थ भूषण शर्मा

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Shivpuri Collector Arpit Verma and Shivpuri Tehsildar Siddharth Bhushan Sharma

एक्सरे ललित मुदगल @  शिवपुरी। कलेक्ट्रेट में आयोजित जनसुनवाई में सीआरपीएफ (CRPF) के एक जवान की पीड़ा ने प्रशासन के भीतर चल रहे विरोधाभासों और संभावित भ्रष्टाचार की पोल खोल दी है। मामला ग्राम नोहरीकलां के सर्वे नंबर 853/1 से जुड़ा है, जहाँ एक ही जमीन पर नियम' अलग-अलग लोगों के लिए अलग-अलग तरीके से लागू होते दिख रहे हैं,कुल मिलाकर इस मामले में तहसीलदार सिद्धार्थ शर्मा ने कलेक्टर शिवपुरी अर्पित वर्मा को गुमहराह करने की कोशिश की है।

क्या है पूरा विवाद?
ग्वालियर निवासी सीआरपीएफ जवान राजकुमार शर्मा ने जनसुनवाई में शिकायत दर्ज कराई कि उनके द्वारा खरीदे गए प्लॉट का नामांतरण तहसील कार्यालय द्वारा यह कहकर रोक दिया गया है कि उक्त भूमि (सर्वे नंबर 853/1) पर एसडीएम शिवपुरी के आदेशानुसार अवैध कॉलोनी होने के कारण रोक लगी है। जवान का आरोप है कि उसी सर्वे नंबर पर अन्य लोगों के नामांतरण किए गए हैं, लेकिन उन्हें नियमों का हवाला देकर टरकाया जा रहा है।

प्रशासनिक 'खंडन' और दस्तावेजों की हकीकत
मामला तूल पकड़ते देख कलेक्टर अर्पित वर्मा के निर्देश पर जनसंपर्क कार्यालय (PRO) ने एक प्रेस नोट जारी कर दावा किया कि 11 जनवरी 2023 को एसडीएम ने इस जमीन पर किसी भी प्रकार के क्रय-विक्रय और नामांतरण पर रोक लगा दी थी। प्रशासन ने तर्क दिया कि राजकुमार शर्मा का प्लॉट अवैध कॉलोनी में होने के कारण नामांतरण योग्य नहीं है।

Shivpuri SDM order

क्या थे एसडीएम शिवपुरी के आदेश,पढिए

यह बात सत्य है कि इस नोहरीकलां स्थित भूमि सर्वे नंबर 853/1 पर एसडीएम शिवपुरी ने अपने आदेश क्रमांक 90 /अ /7420/22-2023/ 2799 दिनांक 11-1-2023 के अनुसार अनावेदक नोहरीकलां में स्थित भूमि सर्वे न. 853/1 रकवा 0.72हे. पर किये जा रहे अवैध कॉलोनी का निर्माण किये जाने से कॉलोनाईजर का रजिस्ट्रीकरण, निर्वधन एवं मध्य प्रदेश पंचायती राज एवं ग्राम स्वराज अधिनियम की धारा 61 एवं उसके अधीन बनाये गये नियम मध्य प्रदेश ग्राम पंचायत (कालोनाईजर्स का रजिस्ट्रीकरण निबैन्धन तथा शर्ते नियम 1999) की धारा के अंतर्गत भू-खण्ड का अंतरण किये जाने या अवैध तरीके से कॉलोनी बनाने के तथ्यों को दृष्टिगत रखते हुये उक्त भूमि को भू-खण्डों के रूप में विक्रय/नामान्तरण किये जाने पर तत्काल प्रभाव से आगामी आदेश तक रोक लगाई जाती है।

तहसीलदार सिद्धार्थ भूषण शर्मा के नामातंरण के आदेश

लेकिन रोक के बाद हुए यह नामातरंण


शांति कुशवाहा: एसडीएम की रोक के 6 महीने बाद, 9 जून 2023 को तहसीलदार सिद्धार्थ भूषण शर्मा ने इनके 1250 वर्गफुट के प्लॉट का नामांतरण स्वीकार किया।

राजेश अग्रवाल: रोक के 7 महीने बाद, 18 सितंबर 2023 को तहसीलदार के आदेश से इनके 2000 वर्गफुट के प्लॉट का नामांतरण भी कर दिया गया।

100 मीटर की दूरी और 6 महीने का वक्त
जब इस विसंगति पर तहसीलदार सिद्धार्थ भूषण शर्मा से सवाल किया गया, तो उनका जवाब चौंकाने वाला था। उन्होंने तर्क दिया कि एसडीएम कार्यालय से तहसील कार्यालय तक आदेश पहुँचने और उसे अमल में लाने में काफी समय लग गया। गौर करने वाली बात यह है कि शिवपुरी में एसडीएम और तहसीलदार के कार्यालयों के बीच की दूरी महज 100 मीटर है। ऐसे में एक सरकारी आदेश को 'अमल' में आने में आधा साल लग जाना, प्रशासनिक सुस्ती या जानबूझकर की गई अनदेखी की ओर इशारा करता है।

कलेक्टर को गुमराह करने की कोशिश
रिपोर्ट से संकेत मिलते हैं कि तहसीलदार और उनकी टीम ने कलेक्टर को वस्तुस्थिति से अवगत कराने के बजाय अधूरा सच बताया, जिसके आधार पर पीआरओ ने खंडन जारी किया। अब गेंद कलेक्टर अर्पित वर्मा के पाले में है कि वे भ्रष्टाचार के इन आरोपों और सरकारी आदेशों की अवहेलना करने वाले अधिकारियों पर क्या कार्रवाई करते हैं। 

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