शिवपुरी में 1.64 करोड़ की GS की रिश्वत वाली फाइल का शोर तेज, वही खाता जिंदा है या डरा रही है

vikas
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एक्सरे 
ललित मुदगल,शिवपुरी शहर मे इन दिनो 1.64 करोड़ की जीएस फाइल का शोर तेज हो चुका है। सोशल पर अब तक कुर्सी बचाने की अब तक की कीमत की 4 दिन पूर्व एक पोस्ट वायरल हुई थी। इस पोस्ट के बाद यह 1.64 करोड़ की जीएस फाइल की चर्चा तेज हो गई,अब कुत्तों के लड़ने के बाद नेम प्लेट टूटने वाली रिर्पोटिंग में इस फाइल के कुछ पन्ने खुलकर सामने आए है। हालांकि किसी भी पोस्ट की सत्यता पर हम मुहर नही  लगाते है राजनीति  संभावनाओं पर चलती है और माना यह भी जाती है की राजनीति में कुछ भी संभव है। 

हम इस विषय में पड़ना नहीं चाहते कि कुर्सी बचाने के लिए कितनी रिश्वत किसके नाम पर किसने ली है, लेकिन यह बात सत्य है कि पिछले डेढ़ साल से नगर सरकार की कुर्सी उखाड़ने के लिए संस्था के चुने हुए प्रतिनिधि लगातार संघर्ष कर रहे है,नगर सरकार की इस कुर्सी के खींचतान के कारण यह बात 100 प्रतिशत सत्य है कि शहर 25 साल पहले पहुंच चुका है। नगर सरकार के 600 से अधिक विकास वाले वर्क आर्डर वाले आदेश ठेकेदारो के घर पडे पडे धूल खा रहे है। 

ठेकेदारो का मानना है कि काम करने के बाद पेमेंट कैसे होगा,पेमेंट के लिए चरण दबाना,गुलामी करना और दर पर कुत्ता बनकर खड़े होना पड़ेगा,कमीशन तो देना होगा और पार्टनरी मांग ली तो ठेकेदार के बर्तन भाडे भी बिक जाएंगे इस कारण नगर सरकार के 600 वर्क आर्डर ठेकेदारो ने अपने स्तर पर प्रभावहीन कर दिए है। इस कारण शहर का विकास का थम गया हैं। 

अब विषय है कि कुर्सी उखाड़ने के लिए संस्था के चुना हुए प्रतिनिधि अपनी जिद पर अड़े है,बगीचा सरकार की कसम खाकर  जिद पर अड़े है कि अब साथ खडे नही हो सकते,अब सबके मन मे सवाल यह उठता है कि कौन बचा रहा नगर सरकार की कुर्सी को । इस सवाल पर चलने से पहले यह भी समझना होगा कि एक गली से उंगली पकडकर नगर सरकार का सिरमौर बनाने के लिए एक व्यक्ति का राजनीतिक जीवन का गेम आवर हो गया।

अब मूल सवाल पर चलते है कि कौन बचा रहा है इनको
क्यों इतने विरोध के बाद नगर सरकार की कुर्सी अंगद के पाव जैसे जम गई है,शहर निवट रहा है,विकास नहीं हो रहे है इस कुर्सी पर एक राजनीतिक बडे जीवन की बलि लग चुकी है और नगर सरकार की संस्था में प्रथम बार चुन कर पहुंचे वार्ड वाले नेताओ का वार्ड तो बर्बाद हो ही रहा है साथ में उनके राजनीतिक जीवन भी बर्बाद हो रहा है। इतना सब कुछ होने के बाद स्वर्ग सी शिवपुरी के निपटाने के बाद भी कौन बचा रहा है किसलिए  बचा रहा है सवाल सबके मन में है और बड़ा भी है,कुर्सी को बल देने से किसका फायदा हो रहा है हम विकास का श्रेय तो लेते है लेकिन विनाश का श्रेय क्यो नही लेते है। 

GS फाइल की चर्चा  दिल्ली दरबार की मीटिंग के बाद
अब बात करते है जीएस की 1.64 करोड़ की रिश्वत वाली फाइल की,यह फाइल चर्चा में आई दिल्ली दरबार मे मीटिंग के बाद,अब सवाल उठता है कि इस मीटिंग के बाद ही इस जीएस फाइल की चर्चा क्यों शुरू हुई,इस मीटिंग के बाद लगता था कि फैसला होने वाला है लेकिन तीनो लोको के स्वामी ( शिवपुरी,गुना,अशोकनगर ) ने सिर्फ अपने बजट के 22 करोड़ रुपए की चर्चा की,पार्षदों में हवा भरी गई अब ही मेरे हाथ है आप को काम नहीं करोगे क्या,नगर सरकार की कुर्सी हटाने की बात स्वामी ( शिवपुरी,गुना,अशोकनगर ) के जोश भरी चर्चा में दब गई इतना कह दिया गया सब कुछ अच्छा होगा। 

यह तय माना जा रहा है कि शिवपुरी की नगर सरकार को निपटाने के लिए भोपाल की गलियों से शिवपुरी के कलेक्ट्रेट के गलियारों में चर्चा तेज है,राजनीतिक महत्वाकांक्षा को अमलीजामा पहनाने के लिए प्रशासनिक कलम को हथियार बनाया जा रहा है,इस बात में कितनी सत्यता यह तो राम जाने,लेकिन आग लगी है तो धुंआ तो होगा,लेकिन अब निपटाने का श्रेय  भोपाल वालों को पूरा का पूरा नहीं मिल जाए,इसलिए संस्था के चुने हुए प्रतिनिधियों को फोन नहीं  उठाने वाले अध्यक्ष जी ने वार्ड वाले नेताओं को फोन लगा दिए और आनन फानन मे शिवपुरी मे एक बैठक कर डाली,बैठक का एजेंडा तय था पहले से पूर्वानुमानित था कि वार्ड वाले नेताजी  जी नगर सरकार के मुखिया के साथ काम नहीं करेंगे तत्काल दिल्ली मे बेठे मे तीनो लोको के स्वामी जी ( शिवपुरी,गुना,अशोकनगर ) को मैसेज कनवे किया गया और 20 घंटे बाद दिल्ली के दरबार में बैठक का एजेंडा तय हो गया। 

यहां श्रेय लेने के लिए बुलाई गई मीटिंग 
राजनीतिक पंडितो का कहना है कि जब जानते है कि विनाश का श्रेय कोई नहीं लेता लेकिन विकास का श्रेय  सब लेते है। यह पंडितो के कथन सही होते दिख रहा है,अगर यह बात सत्य के भोपाल मे मन बन चुका है कि शिवपुरी की नगर सरकार की कुर्सी का तख्तापलट करना है तो क्रेडिट भोपाल के खाते मे चला जाएगा,इसलिए तत्काल दिल्ली के दरबार वाली स्क्रिप्ट लिखी गई,अगर नगर सरकार का तख्तापलट होता है तो श्रेय दिल्ली के दरबार को के खाते में  चला जाएगा लेकिन

यहां माइड गेम खेला गया 
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि दिल्ली दरबार की मीटिंग वाले दिन नगर सरकार मुखिया के घर टेंशन चल रही थी,दिल्ली दरबार के फैसले का इंतजार था,इतने में ही 1.64 करोड़ की कुर्सी बचाने वाली पोस्ट का प्रकाशन सोशल पर हो गया और कहा जाने लगा कि पूरी की पूरी एक लिस्ट है कि यह 1.64 रुपया नगर सरकार की कुर्सी बचाने के नाम पर कौन कौन ने किसके नाम पर लिए गए है। इसमे तीनो लोको के स्वामी ( शिवपुरी,गुना,अशोकनगर ) के विजिटिंग कार्ड,मंत्री सत्री सब है। नगर सरकार के पाव उखड़ते ही यह रजिस्टर सार्वजनिक हो जाएगा और शिवपुरी में राजनीतिक संकट खड़ा हो जाऐगा। 

कौन बचा रहा था,क्या अब निबटाया जाएगा या बचाया जाएगा 
यह बात सर्वविदित है कि नगर सरकार की कुर्सी को कौन बचा रहा था,अब जीएस फाइल के रिश्वत के 1.64 करोड का मामले के शोर ने सिद्ध कर दिया कि क्यों बचाया जा रहा था,रिश्वत की दम पर दिल्ली दरबार मे दिल्ली दरबार के विजिटिंग कार्ड गलत जानकारी दे रहे थे इसलिए अभी तक नगर सरकार की कुर्सी बची रही थी। जनता यह भी जानती है जो प्रदेश सरकार का पलट सकता है वह शिवपुरी की नगर सरकार की कुर्सी को सोचने मात्र से पलट सकता है,स्वाभाविक था दिल्ली दरबार के जो विजिटिंग कार्ड शिवपुरी में है वह गलत जानकारी दिल्ली दरबार मे भेज रहे थे। 

अब फाइल खुलने का डर भी सता रहा होगा,अब सवाल यह भी उठ रहा है कि जीएस फाइल खुल गई और 1.64 करोड़ रुपए की रिश्वत वाले नाम ओपन हो गए तो यह आग शिवपुरी,भोपाल और दिल्ली के दरबार में भी लगेगी,क्यों की यह सब जानते है कि तीनो लोको के स्वामी ( शिवपुरी,गुना,अशोकनगर ) अपने दम पर चुनाव जीतते है इनके विजिटिंग कार्ड तो जनता में फेल है नुकसान ही करा देते हैं। 

रिश्वत वाली फाइल है कि सिर्फ डर फैला रहे है
कुछ लोगों का कहना है कि सिर्फ डर फैलाया जा रहा है ऐसी कोई फाइल नहीं है,दिल्ली के दरबार और उनके विजिटिंग कार्ड के बीच की लिंक को तोडा जा रहा है,अविश्वास फैलाया जा रहा है,जिससे नगर सरकार की कुर्सी बची रहे,अब गिराने का मन चुके लोग अब बचाने में जुट जाए इस बात को भी नकारा नहीं जा सकता है। जीएस की फाइल खुलने पर कांग्रेस को मुद्दा मिल जाएगा,सरकार और संगठन की बदनामी होगी,फाइल के शोर से भोपाल मे चल रही निपटने की फाइल की चाल को धीमी कर सकते है चार साल कैसे भी कट गए एक साल और कट जाऐगा। 
लेकिन सबसे बड़ा नुकसान होगा 
नगर सरकार के इस आपसी खींचतान का सबसे बड़ा नुकसान  तो तय है कि आने वाले चुनाव में सरकार और संगठन को अवश्य होगा। जनता चाहती है कि विकास हो,और विकास की जिम्मेदारी शहर मे नगर सरकार ही होती है,जनता राजनीति नहीं करती है वह विकास चाहती है,टैक्स देती तो सुविधाएं चाहती है,सुविधाए के नाम पर सडको पर गड्ढे,नालियां चोक,सडको पर अंधेरा और पानी के लिए भटकना पड रहा हैं।

राजनीतिक मुखिया के नाम पर देश का टॉप चेहरा हमारे पास है,बड़े नेताओं की मप्र में गिनती करे तो 5 बड़े नेताओं की नाम की लिस्ट मे हमारा मुखिया है लेकिन हमारा शहर मध्य प्रदेश के विकासशील शहरो की बात करे तो पीछे की लिस्ट से 5वें नंबर पर आ जाए तो बड़ी बात है मुखिया जी को यह बात समझनी होगी,जनता केवल विकास और विकास चाहती है,आपके चेहरे को देखकर वोट दिया जाता है आपके विजिटिंग कार्ड वाले नेताओ को जनता नही चाहती हैं। 

अब अगर 1.64  करोड रूपए की रिश्वत,तो जेल जाना तय 
अगर यह बात सत्य है कि ​नगर सरकार की मुखिया ने 1.64 करोड रूपए का बटौना सिर्फ कुर्सी बचाने के लिए किया है। अगर कुर्सी गई और कोई जीएस फाइल खुली और 1.64 करोड रूपए रिश्वत की बात की,तो तय माना जाऐ कि जेल यात्रा पक्की है,सवाल उठेगा कि जब कुर्सी बचाने के लिए 1.64 करोड खर्च हो गए तो इन चार साल मे कितना माल लूटा होगा।

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