शिवपुरी की अवैध कॉलोनियों को बड़ी राहत, प्लॉट रजिस्ट्री पर लगी रोक हटाने के निर्देश

vikas
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शिवपुरी।
शहर और आसपास के क्षेत्रों में वर्षों से विकसित हो रही सैकड़ों अवैध कॉलोनियों को लेकर अब शासन ने बड़ा फैसला लिया है। वाणिज्यिक कर विभाग के प्रमुख सचिव अमित राठौर ने स्पष्ट कर दिया है कि केवल किसी कॉलोनी के अवैध होने के आधार पर वहां स्थित प्लॉटों की रजिस्ट्री और दस्तावेज पंजीयन पर रोक नहीं लगाई जा सकती। उन्होंने प्रदेश के सभी संभागायुक्तों और जिला कलेक्टरों को निर्देश जारी कर ऐसे प्रतिबंधों को तत्काल समाप्त करने को कहा है।

26 मई 2026 को जारी इस आदेश के बाद शिवपुरी सहित प्रदेश के उन जिलों में असर देखने को मिलेगा, जहां स्थानीय प्रशासन ने अवैध कॉलोनियों में प्लॉटों की खरीद-बिक्री और पंजीयन पर रोक लगा रखी थी। शिवपुरी में भी पूर्व में तत्कालीन कलेक्टर और संबंधित एसडीएम द्वारा अवैध कॉलोनियों के खिलाफ कार्रवाई करते हुए रजिस्ट्री पर प्रतिबंध लगाए गए थे। इसके लिए जिला पंजीयन कार्यालय और सब-रजिस्ट्रार कार्यालयों को भी निर्देश जारी किए गए थे।

राजस्व पर पड़ रहा था सीधा असर
अवैध कॉलोनियों में प्लॉटों की खरीद-बिक्री और पुनर्विक्रय लगातार होता रहता है। प्रत्येक रजिस्ट्री पर शासन को स्टांप शुल्क और पंजीयन शुल्क के रूप में राजस्व प्राप्त होता है। लंबे समय से लगी रोक के कारण सरकार के राजस्व संग्रह पर भी असर पड़ रहा था। इसी स्थिति की समीक्षा के बाद शासन ने स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी किए हैं।

बिना वैध आदेश लगाए प्रतिबंध नहीं होंगे मान्य
प्रमुख सचिव अमित राठौर ने अपने आदेश में कहा है कि दस्तावेजों के पंजीयन पर कोई भी विधि-विरुद्ध प्रतिबंध नहीं लगाया जाए। यदि किसी जिले में सामान्य पत्राचार, प्रशासनिक निर्देश या बिना सक्षम प्राधिकारी की अनुमति के रजिस्ट्री पर रोक लगाई गई है तो वह कानूनन मान्य नहीं होगी और उसे निष्प्रभावी माना जाएगा।

आदेश में यह भी कहा गया है कि केवल सक्षम प्राधिकारी के न्यायिक या अर्द्ध-न्यायिक आदेश के आधार पर ही किसी संपत्ति के हस्तांतरण या पंजीयन पर रोक लगाई जा सकती है। अन्यथा ऐसे प्रतिबंधों का कोई कानूनी महत्व नहीं होगा।

रजिस्ट्री स्वामित्व का प्रमाण नहीं
वाणिज्यिक कर विभाग ने अपने आदेश में यह भी स्पष्ट किया है कि किसी दस्तावेज का पंजीयन संपत्ति के स्वामित्व का अंतिम प्रमाण नहीं होता। रजिस्ट्री केवल लेन-देन का सार्वजनिक रिकॉर्ड और साक्ष्य होती है। इसलिए केवल अवैध कॉलोनी का आधार बनाकर दस्तावेज पंजीयन रोकना कानून की भावना के अनुरूप नहीं माना जा सकता।

प्रशासनिक समन्वय की कमी भी आई सामने
यह मामला अब प्रशासनिक और कानूनी बहस का विषय बन गया है। एक तरफ शासन अवैध कॉलोनियों पर कार्रवाई की बात करता है, वहीं दूसरी तरफ पंजीयन पर रोक को गैरकानूनी बताया गया है। इससे विभिन्न विभागों के बीच समन्वय की कमी भी उजागर हुई है। जानकारों का मानना है कि अवैध कॉलोनियों के खिलाफ कार्रवाई और नागरिकों के संपत्ति संबंधी अधिकारों के बीच संतुलन बनाना प्रशासन के लिए बड़ी चुनौती होगी।

दुष्यंत दीक्षित, जिला पंजीयक शिवपुरी ने बताया कि भोपाल से दस्तावेज पंजीयन के संबंध में आदेश प्राप्त हुआ है। वरिष्ठ अधिकारियों के निर्देशन में शासन के निर्देशों का पालन कराया जाएगा।

वहीं अर्पित वर्मा कलेक्टर शिवपुरी ने कहा कि न्यायिक आदेश के तहत ही अवैध कॉलोनियों में रजिस्ट्री पर रोक लगाई जाती है। बिना कारण सीधे पंजीयन रोकना उचित नहीं है। इससे राजस्व को नुकसान होता है। शासन द्वारा जारी सर्कुलर के आधार पर आवश्यक कार्रवाई की जाएगी। 

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