करैरा। करैरा एसडीएम अनुराग निंगवाल एक कथित डीपफेक वीडियो और 50 लाख रुपये की ब्लैकमेलिंग के मामले को लेकर चर्चा में हैं। सोशल मीडिया पर वायरल हुए एक वीडियो को फर्जी बताते हुए एसडीएम ने निवाड़ी एसपी को पत्र लिखकर जांच और कार्रवाई की मांग की है। उनका आरोप है कि भूमाफियाओं के खिलाफ की गई सख्त कार्रवाई का बदला लेने के लिए उन्हें बदनाम करने की साजिश रची जा रही है। मामले में झांसी के एक व्यक्ति पर ब्लैकमेलिंग, धमकी और वसूली का प्रयास करने के आरोप लगाए गए हैं।
डीपफेक वीडियो से मचा हड़कंप, एसडीएम ने खोला मोर्चा
शिवपुरी जिले के करैरा एसडीएम अनुराग निंगवाल ने सोशल मीडिया पर वायरल हुए एक कथित वीडियो को लेकर गंभीर आपत्ति जताई है। उन्होंने इस वीडियो को पूरी तरह फर्जी बताते हुए दावा किया है कि इसे डीपफेक अथवा आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) तकनीक की मदद से तैयार किया गया है। वीडियो के वायरल होने के बाद प्रशासनिक और राजनीतिक गलियारों में चर्चाओं का दौर शुरू हो गया है।
एसडीएम निंगवाल ने 22 मई 2026 को निवाड़ी जिले के पुलिस अधीक्षक को एक औपचारिक पत्र भेजकर पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है। उनका कहना है कि वायरल वीडियो उनकी व्यक्तिगत, सामाजिक और प्रशासनिक छवि को नुकसान पहुंचाने की एक सुनियोजित साजिश का हिस्सा है।
भूमाफियाओं पर कार्रवाई का बदला
अनुराग निंगवाल का कहना है कि शिवपुरी में पदस्थ होने से पहले वे निवाड़ी जिले में ओरछा एसडीएम के रूप में कार्यरत थे। उस दौरान उन्होंने भूमाफियाओं के खिलाफ कई बड़ी कार्रवाई करते हुए सरकारी जमीनों को अतिक्रमण से मुक्त कराया था। उनके अनुसार इन्हीं कार्रवाइयों से प्रभावित कुछ लोगों ने उन्हें निशाना बनाने की कोशिश शुरू कर दी।
एसडीएम का आरोप है कि झांसी के सिविल लाइन क्षेत्र निवासी योगेंद्र उर्फ योगी प्रेमानी, जिसे उन्होंने भूमाफिया प्रवृत्ति का व्यक्ति बताया है, इस पूरे प्रकरण में संदिग्ध भूमिका निभा रहा है। उनका दावा है कि उक्त व्यक्ति ने उन्हें संदेश भेजकर वीडियो वायरल करने की धमकी दी और इसके बदले 50 लाख रुपये की मांग की।
50 लाख नहीं दिए तो नौकरी लायक नहीं छोड़ेंगे
एसडीएम के मुताबिक ब्लैकमेल करने वाले व्यक्ति ने संदेश में साफ तौर पर कहा कि उसके पास ऐसे दो-तीन वीडियो हैं, जिन्हें वह सार्वजनिक कर सकता है। साथ ही रकम नहीं देने की स्थिति में मीडिया ट्रायल करवाने, बदनाम करने और यहां तक कि जान से मारने की धमकी भी दी गई।
इन आरोपों के बाद मामला केवल एक वायरल वीडियो तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि यह ब्लैकमेलिंग, रंगदारी और साइबर अपराध से जुड़ा गंभीर मामला बन गया है। प्रशासनिक अधिकारियों के बीच भी इस घटनाक्रम को लेकर चिंता जताई जा रही है।
करैरा में भी चल रही हैं सरकारी जमीनों की जांच
एसडीएम अनुराग निंगवाल ने अपने पत्र में यह भी उल्लेख किया है कि वर्तमान में करैरा क्षेत्र में भी सरकारी जमीनों से जुड़े कई मामलों की जांच चल रही है। ऐसे में उन्हें आशंका है कि भूमाफियाओं और असामाजिक तत्वों द्वारा दबाव बनाने तथा कार्रवाई को प्रभावित करने के लिए इस तरह की साजिश रची जा रही है।
उन्होंने पुलिस से मांग की है कि वायरल वीडियो की तकनीकी जांच कराई जाए, यह पता लगाया जाए कि वीडियो असली है या डीपफेक तकनीक से तैयार किया गया है, और इसके पीछे शामिल लोगों की पहचान कर उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाए।
जांच के बाद ही साफ होगी तस्वीर
फिलहाल यह मामला जांच के दायरे में है। वीडियो की सत्यता, ब्लैकमेलिंग के आरोप और कथित धमकियों की पुष्टि पुलिस जांच के बाद ही हो सकेगी। हालांकि, एक वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी द्वारा डीपफेक वीडियो और 50 लाख रुपये की वसूली की कोशिश का आरोप लगाए जाने से यह मामला बेहद संवेदनशील और चर्चित बन गया है।

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