शिवपुरी,किसान फसल की बोबनी करके निपटे, पानी की जगह बरसे पत्थर,पढिए खबर

vikas
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करैरा। शिवपुरी जिले में मानूसन रूठा हुआ है,नखरे करके बादल बरस रहे है,इस नखरीली बारिश ने थोडे से खेत गिले कर दिए तो खेतो मे बुआई कर दी,लेकिन प्रशासन की कृपा से खेतो मे पहाड से उडकर आए पत्थरो की बारिश हो गई। पत्थर की बारिश यह एक प्राकृतिक आपदा नही थी ​बल्कि प्रशासन की चुप्पी और क्रेशर स्टोन के मालिक की काली कमाई का कमाल था,यह मामला करैरा अनुविभाग के ग्राम पारागढ गांव का है,जहां संचालित एक क्रेशर के लिए की गई ब्लास्टिंग के कारण पहाड से पत्थर उडकर खेतो में पहुंच गए। 
                         

किसान कई दिनों से बारिश का इंतजार कर रहे थे। जैसे-तैसे मौसम ने साथ दिया तो उन्होंने मेहनत कर अपने खेतों में बुआई पूरी की। उम्मीद थी कि अब आसमान से पानी बरसेगा और खेतों में हरियाली लहलहाएगी। लेकिन अगले ही दिन खेतों पर पानी नहीं, बल्कि पहाड़ से उड़कर आए बड़े-बड़े पत्थरों की बारिश होने लगी। यह किसी प्राकृतिक आपदा का नहीं, बल्कि करैरा अनुविभाग के ग्राम पारागढ़ में संचालित एक स्टोन क्रशर की तेज ब्लास्टिंग का नतीजा बताया जा रहा है।

ग्रामीणों का आरोप है कि क्रशर पर दिन-रात नियमों की अनदेखी कर हैवी ब्लास्टिंग की जा रही है, जिससे सैकड़ों बीघा उपजाऊ जमीन बर्बादी की कगार पर पहुंच गई है। खेतों में फसल के बजाय पत्थर बिखरे पड़े हैं, कुएं दरक रहे हैं और गांव के लोग धूल और धमाकों के बीच जीने को मजबूर हैं।

बुआई के अगले दिन खेतों में गिरे पत्थर
किसानों ने बताया कि इस वर्ष पहले ही बारिश की कमी से खेती संकट में थी। काफी इंतजार के बाद शुक्रवार को उन्होंने खेतों में बुआई का काम पूरा किया था। लेकिन शनिवार को अचानक स्टोन क्रशर की ब्लास्टिंग के दौरान पहाड़ से निकले भारी पत्थर कई सौ मीटर दूर उड़कर सीधे खेतों में आ गिरे। इन पत्थरों ने खेतों में बोए गए बीजों और फसल को नुकसान पहुंचाया। कई जगह खेत पत्थरों से भर गए हैं, जिससे ट्रैक्टर चलाना और आगे की कृषि गतिविधियां भी मुश्किल हो गई हैं।

धूल की चादर से दम तोड़ रही फसल
ग्रामीणों का कहना है कि सिर्फ पत्थर ही नहीं, बल्कि हर विस्फोट के साथ उड़ने वाली बारीक धूल भी उनकी खेती को बर्बाद कर रही है। धूल की मोटी परत फसलों की पत्तियों पर जम जाती है, जिससे पौधों की बढ़वार रुक रही है। किसानों को आशंका है कि यदि यही स्थिति रही तो इस बार उत्पादन आधा भी नहीं हो पाएगा। कई खेतों में उपजाऊ मिट्टी की ऊपरी परत तक उड़ चुकी है।

हर धमाका हमारी मेहनत पर भारी पड़ रहा है
पीड़ित किसान कामता प्रसाद लोधी, राय सिंह लोधी, प्रकाश लोधी, रामनिवास लोधी, कीरत सिंह लोधी और बलदेव सिंह लोधी का कहना है कि उनके परिवार की आजीविका पूरी तरह खेती पर निर्भर है। उनका कहना है कि हर ब्लास्टिंग के साथ खेतों में पत्थर गिरते हैं, जो फसल और जमीन दोनों को नुकसान पहुंचा रहे हैं। वर्षों की मेहनत और उम्मीदें एक-एक धमाके के साथ टूट रही हैं।

धमाकों से दरक रहे कुएं, गांव में दहशत का माहौल
ग्रामीण अमर सिंह लोधी बताते हैं कि समस्या सिर्फ खेतों तक सीमित नहीं है। ब्लास्टिंग से होने वाले तेज कंपन के कारण खेतों में बने कच्चे कुएं दरकने लगे हैं और कई जगह धंसने की स्थिति में पहुंच गए हैं। इससे सिंचाई के साधन भी खतरे में हैं। लगातार होने वाले धमाकों से गांव के बच्चे, महिलाएं और बुजुर्ग भय के साये में जी रहे हैं। पूरे गांव में धूल का गुबार छाया रहता है, जिससे लोगों को सांस लेने में दिक्कत, आंखों में जलन और अन्य स्वास्थ्य समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है।

शिकायतें हुईं, लेकिन कार्रवाई नहीं
ग्रामीणों का कहना है कि उन्होंने इस मामले की शिकायत करैरा एसडीएम, कलेक्टर और स्थानीय विधायक से कई बार लिखित और मौखिक रूप से की है, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। ग्रामीणों का आरोप है कि क्रशर संचालक राजनीतिक प्रभाव रखते हैं, इसलिए शिकायतों के बावजूद प्रशासन प्रभावी कदम नहीं उठा रहा।

ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की है कि—
आबादी और कृषि भूमि के बीच की जा रही खतरनाक ब्लास्टिंग पर तत्काल रोक लगाई जाए।
स्टोन क्रशर को नियमानुसार आबादी और खेती से दूर स्थानांतरित किया जाए।
जिन किसानों की फसल, खेत और कुएं क्षतिग्रस्त हुए हैं, उनका राजस्व विभाग से सर्वे कराकर उचित मुआवजा दिया जाए। ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द कार्रवाई नहीं हुई तो वे आंदोलन का रास्ता अपनाने को मजबूर होंगे।

खनिज अधिकारी बोले जांच कराएंगे
मामले पर खनिज अधिकारी रामसिंह उईके ने कहा कि यह मामला अभी उनके संज्ञान में नहीं आया है। उन्होंने कहा,मैं पूरे मामले की जानकारी मंगवाता हूं। यदि जांच में कोई भी गतिविधि नियमों के विरुद्ध पाई जाती है तो नियमानुसार उचित वैधानिक कार्रवाई की जाएगी।

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