शिवपुरी के मेले ने क्रॉस की एक्सपायरी डेट, अब प्रशासन जोडेगा हिसाब किताब

vikas
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शिवपुरी।
शिवपुरी शहर के सिद्धेश्वर मंदिर प्रांगण मे हर वर्ष लगने वाला मेला इस बार अपने राजस्व की उलझनों और निर्धारित समय से लेट होने के कारण चर्चा में आ गया था। ठेकेदार तय शुदा भुगतान नहीं कर रहा था इसलिए प्रशासन ने इस मेले के गेट पर तालाबंदी तक कर दी थी। अब फिर इस मेले को लेकर एक नया विवाद शुरू हो चुका है नियमानुसार मेला चलाने की वैधता 25 जून की रात 12 बजे तक थी लेकिन आज 27 जून तक यह मेला सुचारू रूप से चालू है। मेले की अवधि की तारीख अब एक्सपायर हो चुकी है,अब सवाल यह उठता है कि अतिरिक्त दिनो तक चलने वाला इस मेले को किस हिसाब से वसूली होगी।

जानकारी के अनुसार सिद्धेश्वर मेले का ठेका नगर पालिका द्वारा निर्धारित अवधि के लिए दिया गया था। पूर्व में मेले के संचालन और ठेका प्रक्रिया को लेकर विवाद भी सामने आए थे। मामला मीडिया की सुर्खियों में आने के बाद तत्कालीन कलेक्टर ने हस्तक्षेप किया था। इसके बाद मेले के ठेके की राशि में उल्लेखनीय वृद्धि की गई थी।

कलेक्टर के हस्तक्षेप के बाद बढ़ी थी ठेका राशि
बताया जाता है कि पहले एक माह के लिए मेले का ठेका करीब 11 लाख 25 हजार रुपए में दिया गया था। बाद में प्रशासनिक हस्तक्षेप के बाद यह राशि बढ़ाकर करीब 17 लाख 50 हजार रुपए कर दी गई। ठेका राशि बढ़ने से ठेकेदार पर आर्थिक बोझ बढ़ा, लेकिन प्रशासन ने इसे राजस्व हित में आवश्यक कदम बताया था।

25 जून तक थी अनुमति, फिर भी जारी है मेला
प्रशासनिक अधिकारियों के अनुसार मेले की निर्धारित अवधि 25 जून तक थी। शिवपुरी एसडीएम आनंद राजावत ने भी पूर्व में स्पष्ट किया था कि मेले की अनुमति इसी तिथि तक वैध है। ऐसे में यदि इसके बाद भी मेला संचालित किया जाता है तो नियमानुसार उसकी अवधि बढ़ाने की अनुमति और अतिरिक्त शुल्क की प्रक्रिया अपनाई जानी चाहिए।

राजस्व को लेकर उठ रहे सवाल
स्थानीय लोगों का कहना है कि उनका उद्देश्य मेला बंद कराना नहीं है, क्योंकि इससे व्यापारियों और शहरवासियों को सुविधा मिलती है। लेकिन यदि मेला निर्धारित अवधि से अधिक समय तक संचालित हो रहा है तो उससे मिलने वाला अतिरिक्त राजस्व नियमानुसार नगर पालिका और सिद्धेश्वर मंदिर समिति को मिलना चाहिए। लोगों का सवाल है कि अवधि समाप्त होने के बाद यदि मेला चल रहा है तो क्या उसके लिए अतिरिक्त शुल्क जमा कराया गया है और क्या इसकी विधिवत अनुमति ली गई है।

प्रशासन की स्थिति स्पष्ट होना जरूरी
मेले की अवधि समाप्त होने के बाद भी संचालन जारी रहने से अब प्रशासन की भूमिका पर भी निगाहें टिक गई हैं। यदि अनुमति का विस्तार दिया गया है तो उसकी जानकारी सार्वजनिक की जानी चाहिए, और यदि नहीं दी गई है तो नियमों के अनुसार कार्रवाई की जानी चाहिए। फिलहाल इस पूरे मामले में नगर पालिका और संबंधित प्रशासनिक अधिकारियों की ओर से कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है।

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