शिवपुरी, कोचिंग संस्थान संचालन पहुंचे कलेक्टर के पास, कहा कानून और गाइड लाइन स्पष्ट करे

vikas
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शिवपुरी।
उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ मे एक कोचिंग संस्थान मे आगजनी की घटना में 15 स्टूडेंट्स की मौत होने के बाद देश भर में कोचिंग संस्थानों की चैकिंग अभियान शुरू हो चुका है। शिवपुरी जिले में कलेक्टर अर्पित वर्मा के निर्देश पर प्रशासन ने जिले भर के कोचिंग संस्थानों का औक्षक निरीक्षण किया। इस निरीक्षण मे कई कोचिंग संस्थानो मे खामिया मिला और उनको सील कर दिया। प्रशासन की इस कार्रवाई के विरोध मे शिवपुरी प्राइवेट टीचर एसोसिएशन ने आज कलेक्टर शिवपुरी को एक ज्ञापन सौंपा है इस ज्ञापन में पूछा गया है कि कृपया गाइड लाइन क्लीयर करे।

कोचिंग संचालकों ने लखनऊ की घटना पर दुख व्यक्त किया और विद्यार्थियों की सुरक्षा के लिए शासन के प्रयासों का समर्थन किया। उन्होंने बताया कि सभी संचालकों ने अपनी क्षमता के अनुसार फायर सेफ्टी के इंतजाम करने का प्रयास किया है, लेकिन प्रशासन की ओर से स्पष्ट दिशा-निर्देश नहीं मिलने के कारण भ्रम और भय का माहौल बना हुआ है।

संचालकों का कहना है कि इसी अनिश्चितता के चलते सभी कोचिंग संस्थानों का संचालन अनिश्चितकाल के लिए स्थगित कर दिया गया है, जिससे हजारों विद्यार्थियों की पढ़ाई प्रभावित हो रही है। उन्होंने कलेक्टर से मांग की है कि फायर सेफ्टी के लिए आवश्यक मानकों और प्रक्रिया को स्पष्ट किया जाए, ताकि संस्थान नियमों का पालन कर द्वारा संचालित किए जा सकें।

शिवपुरी प्राइवेट टीचर एसोसिएशन के अध्यक्ष उमेश श्रीवास्तव ने बताया कि प्रशासन ने फायर सेफ्टी मानकों को पूरा करने के निर्देश तो दिए हैं, लेकिन यह स्पष्ट नहीं किया कि किन-किन व्यवस्थाओं को अनिवार्य रूप से करना होगा और किस प्रक्रिया के तहत एनओसी प्राप्त की जाएगी। उन्होंने जोर दिया कि जब तक स्पष्ट दिशा-निर्देश नहीं मिलते, तब तक कोचिंग संचालकों में असमंजस बना रहेगा।


मप्र में पेंडिंग पड़ा है यह कानून 
मध्य प्रदेश सरकार निजी कोचिंग संस्थानों की मनमानी पर लगाम लगाने के लिए जल्द कोचिंग संस्थान विनियमन अधिनियम' (कोचिंग इंस्टीट्यूट रेगुलेशन एक्ट) लागू करने का निर्णय लिया हैं। उच्च शिक्षा विभाग ने कानून का ड्राफ्ट तैयार कर लिया है,लेकिन यह कानून अभी लागू नहीं हुआ है। 

मीडिया में प्रकाशित खबरों के अनुसार 
रजिस्ट्रेशन जरूरी: प्रत्येक कोचिंग सेंटर का रजिस्ट्रेशन अनिवार्य होगा। पहले से संचालित संस्थाओं को भी तय समय सीमा में पंजीकरण कराना होगा।
शिक्षकों की योग्यता: पढ़ाने वाले ट्यूटर का न्यूनतम स्नातक (Graduate) होना जरूरी है। किसी नैतिक अपराध में दोषी व्यक्ति को शिक्षक नियुक्त नहीं किया जा सकेगा।
आयु सीमा: 16 वर्ष से कम आयु के छात्रों का नामांकन नहीं होगा। छात्र का कम से कम 10वीं कक्षा उत्तीर्ण होना आवश्यक है।
फीस और रिफंड: कोर्स के दौरान फीस नहीं बढ़ाई जा सकेगी। यदि कोई छात्र पढ़ाई छोड़ता है, तो शेष अवधि की फीस 'प्रो-राटा' आधार पर 10 दिनों के भीतर लौटानी होगी।
भ्रामक विज्ञापनों पर रोक: '100% चयन' या 'गारंटीड रैंक' जैसे दावे अपराध माने जाएंगे। सफल छात्रों की फोटो या नाम उनकी लिखित सहमति के बिना इस्तेमाल नहीं किए जा सकेंगे।
मानसिक स्वास्थ्य: संस्थानों को मनोवैज्ञानिक सहायता और काउंसलिंग की व्यवस्था करनी होगी। छात्रों को वैकल्पिक करियर के बारे में भी बताना होगा।
कोचिंग का समय: कक्षाएं बहुत सुबह या देर रात नहीं लगेंगी। एक दिन में अधिकतम 5 घंटे की कोचिंग की सलाह दी गई है।

वेबसाइट पर पारदर्शिता: संस्थानों को अपनी वेबसाइट पर शिक्षकों की योग्यता, कोर्स का विवरण, फीस स्ट्रक्चर, रिफंड पॉलिसी और हॉस्टल की जानकारी सार्वजनिक करनी होगी।

कुल मिलाकर अभी मध्यप्रदेश में कोचिंग इंस्टीट्यूट रेगुलेशन एक्ट लागू नहीं हुआ है,शिवपुरी के कोचिंग संस्थान संचालको ने अपने ज्ञापन में कलेक्टर शिवपुरी से सही सवाल पूछा है कि कृपया कर गाइड लाइन क्लीयर करे,कौन सा विभाग में इस कानून की खानापूर्ति तय करेगा और इसके क्या नियम है। फिलहाल प्रशासन की ओर से इस सवाल का कोई जवाब नही आया है। एडीएम शिवपुरी ने जब यह ज्ञापन लिया था तब कोचिंग संस्थान संचालको से कहा कि साहब से इस मामले मे बात करेगें। 

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