शिवपुरी। शिवपुरी जिले में बादल झमाझम बरसने लगे है,सड़क,नाली और सडको पर मुस्कुराते गड्ढे पानी से तर हो रहे हैं,लेकिन शिवपुरी नगर पालिका की सीएमओ की कुर्सी पर सूखा चल रहा है,जिसका खामियाजा शिवपुरी नगर की जनता को भुगतना पड रहा हैं,पिछले 25 दिनो से स्थाई सीएमओ का पद खाली है काम चलाउ सीएमओ से नगर पालिका का काम चल रहा है,यह कहानी केवल शिवपुरी निकाय की नहीं बल्कि जिले की पोहरी, मगरोनी और पिछोर नगरीय निकाय भी नियमित सीएमओ के बिना संचालित हो रही हैं। हालात ऐसे हैं कि करोड़ों रुपए के विकास कार्य ठप हैं, मानसून की तैयारियां अधूरी हैं और जरूरी प्रशासनिक फैसले फाइलों में अटके हुए हैं।
सबसे बड़ा सवाल यह है कि आखिर शिवपुरी नगर पालिका में नियमित सीएमओ की नियुक्ति क्यों नहीं हो पा रही? प्रशासनिक गलियारों में चर्चा है कि वर्षों से विवादों में घिरी इस नगर पालिका में पदस्थापना से अधिकारी भी बचना चाहते हैं। हालांकि प्रशासन इसे केवल संयोग और पदस्थापना प्रक्रिया का हिस्सा बता रहा है।
प्रभारी सीएमओ के भरोसे चल रही व्यवस्था
नियमित सीएमओ नहीं होने के कारण जिला प्रशासन ने प्रभारी अधिकारियों को जिम्मेदारी तो सौंप दी है, लेकिन उनके पास पूर्ण वित्तीय और प्रशासनिक अधिकार नहीं हैं। ऐसे में वे केवल दैनिक कामकाज संभाल पा रहे हैं, जबकि टेंडर, वित्तीय स्वीकृतियां और विकास योजनाओं से जुड़े बड़े फैसले लंबित पड़े हैं।
42 सड़कें अटकीं, मानसून की तैयारियां भी अधूरी
नगर पालिका अध्यक्ष गायत्री शर्मा के अनुसार, सीएमओ के अभाव में शहर की 42 सड़कों के निर्माण कार्य शुरू नहीं हो सके हैं। टेंडर प्रक्रिया, वित्तीय स्वीकृतियां, पीआईसी और परिषद की बैठक प्रभावित हैं। मानसून की पहली बारिश हो चुकी है, लेकिन नालों की सफाई, जलभराव वाले क्षेत्रों में सुरक्षा इंतजाम और अन्य आवश्यक तैयारियां समय पर नहीं हो सकीं। इसका असर सीधे शहरवासियों पर पड़ रहा है।
जिले के अन्य नगरीय निकायों की स्थिति भी कम चिंताजनक नहीं है।
शिवपुरी नगर पालिका–पिछले 25 दिनों से सीएमओ का पद रिक्त, 42 सड़क निर्माण, टेंडर और वित्तीय स्वीकृतियां लंबित।
पोहरी नगर पंचायत–पिछले चार वर्षों में करीब 30 बार सीएमओ बदले गए। फिलहाल प्रभारी व्यवस्था के भरोसे काम चल रहा है। पहली ही बारिश में जलभराव की समस्या सामने आ चुकी है।
मगरोनी नगर पंचायत–नियमित सीएमओ के ट्रांसफर के बाद से प्रभारी व्यवस्था लागू है, जिससे विकास कार्य प्रभावित हैं।
पिछोर नगर पंचायत–यहां भी नियमित सीएमओ नहीं है। परिषद में कई बार विवाद हो चुके हैं और नगर पंचायत प्रभारी व्यवस्था से संचालित हो रही है।
विवादों के कारण अधिकारी भी बना रहे दूरी
सेवानिवृत्त सीएमओ रामनिवास शर्मा का कहना है कि नगर पालिका का पूरा प्रशासनिक और वित्तीय ढांचा सीएमओ पर निर्भर होता है। नियमित अधिकारी के अभाव में प्रभारी अधिकारी सीमित अधिकारों के साथ काम करते हैं, जिससे विकास कार्यों की गति रुक जाती है।
उन्होंने यह भी दावा किया कि शिवपुरी नगर पालिका लंबे समय से विवादों का केंद्र रही है, जिसके कारण कई अधिकारी यहां पदस्थापना लेने से सहज महसूस नहीं करते। यही वजह है कि नियमित नियुक्ति में लगातार देरी हो रही है।
कलेक्टर बोले-प्रस्ताव भेज दिया, जल्द होगी नियुक्ति
शिवपुरी कलेक्टर अर्पित वर्मा का कहना है कि शिवपुरी सहित जिले की तीन अन्य नगरीय निकायों में नियमित सीएमओ के पद रिक्त हैं। फिलहाल प्रभार सौंप कर काम चलाया जा रहा है। रिक्त पदों की जानकारी नगरीय प्रशासन विभाग को भेज दी गई है और जल्द नियमित पदस्थापना होने की उम्मीद है।
फिलहाल शहर की जनता को इंतजार है उस अधिकारी का, जो खाली पड़ी कुर्सी संभाले और रुके हुए विकास कार्यों को फिर से रफ्तार दे। लेकिन जब तक नियमित सीएमओ की नियुक्ति नहीं होती, तब तक शिवपुरी नगर पालिका की प्रशासनिक सुस्ती और विकास कार्यों पर लगा ब्रेक बरकरार रहने की आशंका है।

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