शिवपुरी कांटों के बीच फसा मिला 24 घंटे का कान्हा, किसी कुंवारी मां ने बेरी के पेड़ नीचे छोड़ा

vikas
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पोहरी।
इसे कुदरत का करिश्मा कहें या उस मासूम की किस्मत, जिसे जन्म देने वाली मां ने मरने के लिए कांटों के बीच फेंक दिया, उसे बचाने के लिए नियति ने सुबह 5 बजे ही गांव की एक महिला को वहां भेज दिया। पोहरी के ग्राम अगर्रा में मंगलवार की सुबह एक ऐसी घटना सामने आई, जिसने एक तरफ जहां इंसानियत को शर्मसार किया, तो वहीं दूसरी तरफ ग्रामीणों की सजगता ने एक मासूम को नई जिंदगी दे दी।

सुबह 5 बजे गूंजी कांटों से किलकारी
रोजाना की तरह मंगलवार सुबह करीब 5 बजे ग्राम अगर्रा की रहने वाली 45 वर्षीय रामबाई (पति राजाराम धाकड़) शौच के लिए निकली थीं। जब वह लौट रही थीं, तो सूनेपन के बीच उन्हें किसी बच्चे के बिलख-बिलखकर रोने की आवाज सुनाई दी। इतनी सुबह जंगल के रास्ते से बच्चे के रोने की आवाज सुनकर रामबाई एक पल के लिए घबरा गईं। उन्होंने हिम्मत जुटाई और दौड़कर अपने पति राजाराम को बुला लाईं।

जब दोनों आवाज का पीछा करते हुए बेरी के पेड़ के पास पहुंचे, तो वहां का नजारा देखकर उनकी आंखें नम हो गईं। पत्थरों (बोल्डर) की बाउंड्री के पास, तीखे कांटों के बीच एक नवजात शिशु बिना कपड़ों के तड़प रहा था। राजाराम ने बिना देर किए कांटों को हटाकर उस नन्हे से बच्चे को अपनी गोद में उठा लिया।

कोटवार दंपति ने ओढ़ाई ममता की चादर
राजाराम ने तुरंत गांव के कोटवार सूरज परिहार को इस बात की सूचना दी। सूचना मिलते ही कोटवार सूरज और उनकी पत्नी दुलारी बाई भागते हुए मौके पर पहुंचे। सुबह की कड़ाके की ओस और ठंड से कांप रहे बच्चे को देखकर दुलारी का मातृत्व जाग उठा। उसने तुरंत अपने कपड़ों से उस नवजात को लपेटा और उसे गर्माहट दी। वहीं मौके पर मौजूद परासरी गांव के कोटवार सुखबीर सेन ने तुरंत सूझबूझ दिखाते हुए डायल 112 पुलिस को फोन घुमाया।

24 घंटे का है मासूम, जिला अस्पताल के SNCU में जंग जारी
डायल 112 की टीम ने मौके पर पहुंचकर नवजात को तुरंत सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पोहरी पहुंचाया। जहां डॉक्टरों ने प्राथमिक उपचार देकर उसकी गंभीर हालत को देखते हुए जिला अस्पताल रेफर कर दिया।

डॉक्टर की रिपोर्ट
 जिला अस्पताल के एसएनसीयू (SNCU) प्रभारी और मशहूर बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. बृजेश मंगल ने बताया कि नवजात शिशु (लड़का) का वजन 2,200 ग्राम है। उसका जन्म महज 24 घंटे के भीतर ही हुआ है। अच्छी बात यह है कि कांटों के बीच रहने के बावजूद उसके शरीर पर कोई गहरा घाव या चोट नहीं है, लेकिन इंफेक्शन और ठंड के कारण उसकी हालत बेहद गंभीर और नाजुक बनी हुई है। डॉक्टर की टीम उसे बचाने में पूरी जान लगा रही है।

कलयुगी माता-पिता की तलाश में पुलिस
मासूम को इस तरह तड़पने के लिए छोड़ जाने वाले बेरहम दिल इंसानों के खिलाफ पुलिस ने मामला दर्ज कर लिया है। नवजात की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए चाइल्ड हेल्पलाइन को भी सूचित कर दिया गया है। पुलिस अब आसपास के गांवों, दाइयों और हाल ही में हुई डिलीवरी के रिकॉर्ड खंगाल रही है ताकि इस पाप को अंजाम देने वाले चेहरों को बेनकाब किया जा सके। जब तक हम इस नन्हे कान्हा के स्वस्थ होने की कामना करते हैं। 

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