शिवपुरी। जिले में मानसून की बारिश राहत के साथ अब खतरा भी लेकर आई है। लगातार हो रही बारिश के कारण सांप अपने बिलों से निकलकर खेतों, घरों और आबादी वाले इलाकों में पहुंच रहे हैं। इसका असर अब जिला अस्पताल में साफ दिखाई देने लगा है। पिछले कुछ दिनों में सर्पदंश (स्नैक बाइट) के 17 मरीज जिला अस्पताल इलाज के लिए पहुंचे, जबकि दो लोगों की मौत हो चुकी है। मृतकों में फिजिकल क्षेत्र में रहने वाली एक मासूम बच्ची भी शामिल है, जिसकी मौत ने पूरे जिले को झकझोर दिया।
स्वास्थ्य विभाग के अनुसार बारिश के मौसम में सर्पदंश की घटनाएं हर वर्ष बढ़ जाती हैं। बिलों में पानी भरने के कारण सांप सुरक्षित स्थानों की तलाश में घरों और खेतों की ओर निकल आते हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में खेतों में काम करने वाले लोग सबसे ज्यादा इसकी चपेट में आते हैं।
झाड़-फूंक के चक्कर में जा रही जान
विशेषज्ञों का कहना है कि सर्पदंश से होने वाली कई मौतों की सबसे बड़ी वजह इलाज में देरी है। ग्रामीण क्षेत्रों में आज भी कई लोग अस्पताल ले जाने के बजाय झाड़-फूंक और तंत्र-मंत्र का सहारा लेते हैं। इसी कारण कई मरीज समय पर उपचार नहीं मिलने से दम तोड़ देते हैं। कई मामलों में परिजन शव का पोस्टमार्टम कराने से बचने के लिए अस्पताल तक नहीं पहुंचते और गांव में ही अंतिम संस्कार कर देते हैं। ऐसे मामलों का रिकॉर्ड भी स्वास्थ्य विभाग तक नहीं पहुंच पाता। जानकारों के मुताबिक हर साल जिले में बारिश के दौरान 20 से 30 सर्पदंश की घटनाएं सामने आती हैं, लेकिन वास्तविक संख्या इससे कहीं अधिक होने की संभावना रहती है।
प्राथमिक उपचार के बाद जिला अस्पताल पहुंच रहे मरीज
अधिकांश सर्पदंश पीड़ितों को पहले नजदीकी स्वास्थ्य केंद्रों में प्राथमिक उपचार दिया जाता है, जिसके बाद उन्हें जिला अस्पताल या मेडिकल कॉलेज रेफर किया जाता है। समय पर इलाज मिलने पर अधिकांश मरीजों की जान बचाई जा सकती है, इसलिए चिकित्सक तत्काल अस्पताल पहुंचने की सलाह दे रहे हैं।
सर्प मित्रों के भरोसे बचाव व्यवस्था
बारिश के मौसम में रिहायशी इलाकों में सांप निकलने की घटनाएं बढ़ने पर लोगों की पहली उम्मीद सर्प मित्र बन रहे हैं। वन विभाग के पास हर स्थान पर तुरंत पहुंचने की व्यवस्था नहीं होने के कारण अधिकांश मामलों में स्थानीय सर्प मित्रों को बुलाया जाता है। ये प्रशिक्षित स्वयंसेवक सांपों का सुरक्षित रेस्क्यू कर उन्हें जंगल में छोड़ते हैं।
हालांकि इनके पास पर्याप्त सुरक्षा उपकरण, संसाधन और नियमित मानदेय नहीं है। इसके बावजूद वे दिन-रात लोगों की सुरक्षा में जुटे रहते हैं। ऐसे में सर्प मित्रों को संस्थागत सहयोग, आधुनिक उपकरण और नियमित प्रशिक्षण उपलब्ध कराने की जरूरत महसूस की जा रही है।
डॉक्टरों की सलाह, इन बातों का रखें विशेष ध्यान
खेतों में काम करते समय ऊंचे जूते और पूरे कपड़े पहनें।
रात में बाहर निकलते समय टॉर्च का उपयोग करें।
घर के आसपास झाड़ियां और जलभराव न होने दें।
सर्पदंश होने पर झाड़-फूंक में समय बर्बाद न करें, तुरंत नजदीकी अस्पताल पहुंचें।
मरीज को शांत रखें और प्रभावित अंग को कम से कम हिलाएं, ताकि जहर तेजी से शरीर में न फैले।
बारिश के मौसम में थोड़ी-सी सतर्कता और समय पर इलाज सर्पदंश जैसी जानलेवा घटनाओं से लोगों की जान बचा सकता है। फिलहाल बढ़ते मामलों ने स्वास्थ्य विभाग के साथ-साथ आम लोगों की चिंता भी बढ़ा दी है।

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