CMऔर महाराज की सभा के बाद खेत बना पोलो ग्राउंड, विरोध के बाद JBC उतारनी पडी

vikas
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शिवपुरी।
शहर का पोलो ग्राउंड, जहां रोजाना सैकड़ों खिलाड़ी दौड़ लगाते हैं, फुटबॉल और किक्रेट सहित अन्य खेलों का अभ्यास करते हैं, पिछले कुछ दिनों से खेल मैदान कम और लाल मिट्टी के खेत जैसा अधिक दिखाई देने लगा था। मैदान की बदहाल तस्वीरें और वीडियो लगातार सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद आखिरकार जिला प्रशासन हरकत में आया और कलेक्टर अर्पित वर्मा के निर्देश पर जेसीबी और अन्य मशीनों को मैदान में उतारकर उसे फिर से समतल करने का काम शुरू कराया गया।

दरअसल, 5 जुलाई को पोलो ग्राउंड में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव और केंद्रीय मंत्री एवं क्षेत्रीय सांसद ज्योतिरादित्य सिंधिया की मौजूदगी में शिवपुरी जिले के पाली गांव में बनने वाले अदाणी ग्रुप के मिसाइल कॉम्प्लेक्स के शिलान्यास का भव्य कार्यक्रम आयोजित किया गया था। इस आयोजन की तैयारियां एक जुलाई से ही शुरू हो गई थीं। विशाल टेंट, पंडाल, मंच और वीआईपी व्यवस्थाओं के लिए पूरे मैदान का उपयोग किया गया। कार्यक्रम महज चार घंटे चला, लेकिन आयोजन में लगा भारी-भरकम सामान हटाने का काम 9 जुलाई तक चलता रहा।

इस दौरान भारी वाहनों, मशीनों और टेंट संरचनाओं के कारण मैदान  पूरी तरह नष्ट हो गई। लगातार हो रही बारिश ने स्थिति और बिगाड़ दी। मैदान में जगह-जगह लाल मिट्टी उभर आई और कई हिस्सों में कीचड़ व गड्ढे बन गए। दूर से देखने पर पूरा पोलो ग्राउंड किसी खेती योग्य खेत जैसा नजर आने लगा,वही बताया जा रहा है​ कि इस ग्राउंउ पर किसी इंजीनियर के कहने पर एक नाली खोद दी जिससे इस ग्राउंड का स्वरूप पूरा ही बिगड गया। 

खेल प्रेमियों में नाराजगी
मैदान की इस हालत से शहर के खिलाड़ी, मॉर्निंग वॉकर और खेल प्रेमी काफी नाराज हैं। उनका कहना है कि वर्षों से यह मैदान शिवपुरी की खेल गतिविधियों का प्रमुख केंद्र रहा है, लेकिन पहली बार इसकी ऐसी दुर्दशा देखने को मिली है।

फुटबॉल खिलाड़ी मुकेश वशिष्ठ ने कहा कि वह पिछले लगभग 50 वर्षों से इस मैदान पर आ रहे हैं, लेकिन उन्होंने कभी इसकी ऐसी स्थिति नहीं देखी। उनका कहना है कि पहले भी यहां बड़े राजनीतिक कार्यक्रम, मेले और अन्य आयोजन होते रहे हैं, लेकिन मैदान को इतना नुकसान कभी नहीं पहुंचा। इस बार किसी अधिकारी द्वारा मैदान में नाली जैसी खुदाई कराए जाने और भारी मशीनों के उपयोग से इसकी प्राकृतिक संरचना बिगड़ गई।

उन्होंने कहा कि पोलो ग्राउंड की सबसे बड़ी विशेषता उसका उत्कृष्ट जल निकासी तंत्र रहा है। तेज बारिश के बाद भी यहां कभी कीचड़ नहीं होता था, लेकिन इस बार पूरा मैदान लाल मिट्टी और दलदल में बदल गया है। उन्होंने प्रशासन से मांग की कि भविष्य में इस ऐतिहासिक खेल मैदान पर ऐसे बड़े आयोजन नहीं कराए जाएं, ताकि खिलाड़ियों को नुकसान न उठाना पड़े।

सोशल मीडिया पर वायरल हुई तस्वीरें
पोलो ग्राउंड की बदहाल तस्वीरें और वीडियो लगातार सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे थे। लोगों ने सवाल उठाए कि करोड़ों रुपये के विकास और खेल सुविधाओं की बात करने वाला प्रशासन शहर के सबसे महत्वपूर्ण खेल मैदान को बचाने में क्यों असफल रहा।

लगातार उठ रहे सवालों और बढ़ते जनदबाव के बाद जिला प्रशासन सक्रिय हुआ। कलेक्टर के निर्देश पर जेसीबी और अन्य मशीनों से मैदान को समतल करने, मिट्टी व्यवस्थित करने और उसे दोबारा खेल योग्य बनाने का कार्य शुरू कर दिया गया है। अब खिलाड़ियों और खेल प्रेमियों की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि प्रशासन मैदान को पहले जैसी स्थिति में कितनी जल्दी वापस ला पाता है और भविष्य में ऐसे आयोजनों के लिए कोई वैकल्पिक व्यवस्था करता है या नहीं।

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