पवन पाठक पिछोर। शिवपुरी जिले के पिछोर-खनियाधाना शिक्षा विभाग में एक बार फिर प्रशासनिक निर्णय विवादों के घेरे में आ गया है। संदीपनी उत्कृष्ट विद्यालय, खनियाधाना के प्राचार्य अभी मेडिकल अवकाश पर हैं और उन्हें विधिवत कार्यमुक्त भी नहीं किया गया है, लेकिन इससे पहले ही विकासखंड शिक्षा अधिकारी (BEO) ने 25 किलोमीटर दूर स्थित दूसरे विद्यालय के शिक्षक को प्रभारी प्राचार्य नियुक्त कर दिया। हैरानी की बात यह है कि उसी विद्यालय में कई योग्य और विभागीय परीक्षा उत्तीर्ण वरिष्ठ शिक्षक मौजूद हैं। इस फैसले ने न केवल शिक्षा विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए हैं, बल्कि नियमों की अनदेखी और भ्रष्टाचार के आरोपों को भी हवा दे दी है।
शिक्षा विभाग फिर विवादों में
खनियाधाना विकासखंड शिक्षा अधिकारी कार्यालय पिछले कई महीनों से विभिन्न विवादों और अनियमितताओं को लेकर चर्चा में रहा है। आरोप लगते रहे हैं कि यहां प्रशासनिक निर्णयों में पारदर्शिता का अभाव है और लगातार शिकायतें सामने आती रही हैं। अब हाल ही में पदभार संभालने वाले विकासखंड शिक्षा अधिकारी विनोद पाठक के एक आदेश ने नया विवाद खड़ा कर दिया है। आरोप है कि उन्होंने अपने अधिकार क्षेत्र से बाहर जाकर ऐसा आदेश जारी किया, जिसे लेकर शिक्षकों और स्थानीय लोगों में नाराजगी है।
प्राचार्य कार्यमुक्त नहीं, फिर कैसे सौंप दिया प्रभार
जानकारी के अनुसार संदीपनी विद्यालय के प्राचार्य टेकचंद जैन का हाल ही में स्थानांतरण हुआ है। वर्तमान में वे मेडिकल अवकाश पर हैं और उन्होंने अभी तक विद्यालय का विधिवत प्रभार किसी को नहीं सौंपा है। वे कार्यमुक्त भी नहीं हुए हैं। इसके बावजूद विकासखंड शिक्षा अधिकारी ने मायापुर विद्यालय में पदस्थ उच्च माध्यमिक शिक्षक बुंदेल सिंह अहिरवार को संदीपनी विद्यालय का प्रभारी प्राचार्य नियुक्त कर दिया। मायापुर विद्यालय खनियाधाना से लगभग 25 किलोमीटर दूर स्थित है।
विद्यालय में ही मौजूद हैं योग्य शिक्षक
सबसे बड़ा सवाल इस बात को लेकर उठ रहा है कि संदीपनी विद्यालय में ही विभागीय चयन परीक्षा उत्तीर्ण कई वरिष्ठ उच्च माध्यमिक शिक्षक कार्यरत हैं। शिक्षकों का कहना है कि जब विद्यालय में ही अनुभवी और पात्र शिक्षक उपलब्ध हैं तो बाहर के विद्यालय से शिक्षक को अतिरिक्त प्रभार देने की क्या आवश्यकता थी? उनका आरोप है कि इस निर्णय से स्थानीय शिक्षकों की वरिष्ठता और योग्यता की अनदेखी की गई है।
प्राचार्य ने जताई गोपनीय दस्तावेजों की चिंता
प्राचार्य टेकचंद जैन ने फोन पर बताया कि उनके कार्यालय कक्ष में विद्यालय से जुड़े महत्वपूर्ण और गोपनीय शासकीय दस्तावेज, अभिलेख तथा अन्य रिकॉर्ड सुरक्षित रखे हुए हैं। उन्होंने स्पष्ट कहा कि जब तक वे स्वयं स्वास्थ्य लाभ लेकर वापस नहीं लौटते, तब तक उनके कार्यालय कक्ष का ताला नहीं खोला जाना चाहिए। वे नियमानुसार स्वयं प्रभार सौंपेंगे। उन्होंने सवाल उठाया कि यदि उनकी अनुपस्थिति में कार्यालय खोला जाता है और कोई दस्तावेज गायब होता है, क्षतिग्रस्त होता है या किसी प्रकार की गड़बड़ी होती है तो उसकी जिम्मेदारी किसकी होगी?
दो विद्यालयों का जिम्मा, पढ़ाई पर पड़ सकता है असर
स्थानीय नागरिकों और अभिभावकों का कहना है कि संदीपनी विद्यालय का पिछले तीन वर्षों से बोर्ड परीक्षा परिणाम 90 प्रतिशत से अधिक रहा है। ऐसे में विद्यालय के नियमित शिक्षकों को जिम्मेदारी देने के बजाय दूसरे विद्यालय के शिक्षक को अतिरिक्त प्रभार देना समझ से परे है। लोगों का कहना है कि एक ही शिक्षक को दो विद्यालयों की जिम्मेदारी निभानी पड़ेगी, जिससे प्रशासनिक व्यवस्था और शैक्षणिक गतिविधियां दोनों प्रभावित हो सकती हैं।
BEO के अधिकारों पर भी उठे सवाल
जानकारों का कहना है कि संदीपनी उत्कृष्ट विद्यालय जैसे संस्थान में प्रभारी प्राचार्य नियुक्त करने का अधिकार विकासखंड शिक्षा अधिकारी के अधिकार क्षेत्र में नहीं आता। ऐसे में सवाल यह भी उठ रहा है कि आखिर किस नियम के तहत यह आदेश जारी किया गया। इसी कारण अब पूरे मामले में विकासखंड शिक्षा अधिकारी विनोद पाठक की भूमिका भी सवालों के घेरे में आ गई है।
जांच की उठी मांग
इस पूरे मामले को लेकर अभिभावकों, जनप्रतिनिधियों और स्थानीय नागरिकों ने जिला शिक्षा अधिकारी तथा लोक शिक्षण संचालनालय से हस्तक्षेप की मांग की है। उनका कहना है कि पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच कर यह स्पष्ट किया जाए कि जब संदीपनी विद्यालय में योग्य एवं वरिष्ठ शिक्षक पहले से मौजूद थे, तब 25 किलोमीटर दूर के शिक्षक को प्रभारी प्राचार्य बनाने की आवश्यकता क्यों पड़ी और क्या यह निर्णय विभागीय नियमों के अनुरूप लिया गया।

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