शिवपुरी। शिवपुरी कलेक्ट्रेट की बिल्डिंग मे हुई रिश्वत की बातचीत अब FIR मे कनवर्ड हो चुकी है। मामला किसी कमर्चचारी या बाबू का नही है बल्कि एक बाबू सिंह ने पोहरी के SDM और पटवारी के खिलाफ 10 हजार की रिश्वत मांगने पर मामला दर्ज करवा दिया है। जमीन के रिकॉर्ड में नाम दुरुस्त कराने के एवज में 10 हजार रुपए की रिश्वत मांगने के आरोप में पोहरी एसडीएम जेपी गुप्ता और बछोरा हल्का पटवारी अशोक वर्मा के खिलाफ आर्थिक अपराध प्रकोष्ठ (EOW) ग्वालियर ने भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धारा-7 के तहत प्रकरण दर्ज किया है।
सबसे दिलचस्प और चौंकाने वाला पहलू यह है कि रिश्वत की कथित बातचीत शिवपुरी कलेक्ट्रेट की लाल बिल्डिंग में हुई और उसी बातचीत की वॉयस रिकॉर्डिंग अब दोनों अधिकारियों के खिलाफ सबसे बड़ा सबूत बन गई है।
5 दिन पहले ही बने थे पोहरी एसडीएम
जानकारी के अनुसार, जेपी गुप्ता कुछ दिन पहले ही शिवपुरी कलेक्ट्रेट से स्थानांतरित होकर पोहरी एसडीएम के रूप में पदस्थ हुए थे। पदभार संभालने के महज 15 दिन के भीतर ही उनके खिलाफ भ्रष्टाचार का मामला दर्ज होने से प्रशासनिक हलकों में हड़कंप मच गया है।
नाम की गलती बनी रिश्वत मांगने का कारण
कत्था मिल के पास रहने वाले गोविंद शिवहरे ने बैराड़ निवासी बाबू सिंह राजपूत से ग्राम रघुनाथपुरा स्थित कृषि भूमि का एक लाख रुपए अग्रिम देकर अनुबंध किया था। जब रजिस्ट्री कराने की बारी आई तो राजस्व रिकॉर्ड में बाबू सिंह पुत्र रायसिंह के स्थान पर बाबू पुत्र रामसिंह दर्ज मिला।
इस त्रुटि को सुधारने के लिए आवेदन एसडीएम कार्यालय में दिया गया। आरोप है कि इस नाम दुरुस्ती के बदले एसडीएम जेपी गुप्ता ने पटवारी अशोक वर्मा के माध्यम से 10 हजार रुपए रिश्वत की मांग की। लेकिन संबंधित पक्ष रिश्वत देने को तैयार नहीं हुआ।
EOW की रणनीति और वॉयस रिकॉर्डिंग बनी सबूत
रिश्वत की मांग से परेशान होकर गोविंद शिवहरे ने EOW ग्वालियर से शिकायत की। शिकायत के बाद 25 जून को EOW ने अपने एक आरक्षक को वॉयस रिकॉर्ड देकर पोहरी भेजा। बातचीत रिकॉर्ड की गई और 28 जून को रिकॉर्डिंग EOW कार्यालय ग्वालियर पहुंचाई गई। रिकॉर्डिंग की जांच के बाद EOW ने रिश्वत मांगने के पर्याप्त साक्ष्य मानते हुए **एसडीएम जेपी गुप्ता और पटवारी अशोक वर्मा के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धारा-7 के तहत प्रकरण दर्ज कर लिया।
लाल बिल्डिंग में हुई थी रिश्वत की बातचीत
इस पूरे मामले का सबसे अहम पहलू यह है कि रिकॉर्ड हुई बातचीत पोहरी में नहीं, बल्कि शिवपुरी कलेक्ट्रेट की ऐतिहासिक लाल बिल्डिंग में हुई थी। बताया जा रहा है कि किसी बैठक के सिलसिले में दोनों अधिकारी कलेक्ट्रेट आए थे और वहीं फरियादी से नाम दुरुस्ती के बदले 10 हजार रुपए की मांग को लेकर बातचीत हुई। यही बातचीत अब EOW के केस की सबसे मजबूत कड़ी बन गई है।
भ्रष्टाचार के मामलों से फिर चर्चा में शिवपुरी
शिवपुरी जिला लंबे समय से रिश्वतखोरी के मामलों को लेकर चर्चा में रहा है। आए दिन लोकायुक्त और EOW की कार्रवाई में कोई न कोई शासकीय कर्मचारी या अधिकारी पकड़ में आता रहा है। खास बात यह भी है कि कलेक्ट्रेट की लाल बिल्डिंग पहले भी कई बार रिश्वतखोरी के मामलों की कार्रवाई का गवाह बन चुकी है। अधिकारियों के बदलने के बावजूद भ्रष्टाचार पर लगाम नहीं लग पा रही है, जिससे प्रशासनिक व्यवस्था पर लगातार सवाल उठ रहे हैं।

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