शिवपुरी। फिजिकल थाना क्षेत्र स्थित शासकीय तात्या टोपे राज्य शारीरिक शिक्षा प्रशिक्षण महाविद्यालय (फिजिकल कॉलेज) में कार्यरत चपरासी रजनीश खांडेकर की चार वर्षीय बेटी खुशी आदिवासी की सर्पदंश के बाद मौत हो गई। बच्ची का इलाज मेडिकल कॉलेज में चल रहा था, लेकिन मौत के बाद परिजन पोस्टमार्टम कराने की बजाय उसे झाड़-फूंक के लिए गांव ले गए। वहां भी कोई चमत्कार नहीं हुआ और अंततः मासूम का अंतिम संस्कार कर दिया गया।
जानकारी के अनुसार, पिछोर तहसील के पुनावली गांव निवासी रजनीश खांडेकर कॉलेज परिसर के मुख्य गेट पर बने गार्ड रूम में पत्नी और तीन छोटे बच्चों के साथ रहते हैं। सोमवार तड़के करीब चार बजे पूरा परिवार सो रहा था। इसी दौरान एक सांप कमरे में घुस आया और चार वर्षीय खुशी को डंस लिया। बच्ची के रोने पर परिजन जागे और कॉलेज स्टाफ की मदद से उसे तत्काल मेडिकल कॉलेज पहुंचाया गया। डॉक्टरों ने उपचार शुरू किया, लेकिन तमाम प्रयासों के बावजूद मंगलवार सुबह उसकी मौत हो गई।
इसके बाद घटनाक्रम ने एक बार फिर अंधविश्वास की गहरी जड़ों को उजागर कर दिया। परिजन बच्ची का पोस्टमार्टम कराए बिना शव को गांव ले गए, जहां झाड़-फूंक कराई गई। जब कोई फायदा नहीं हुआ तो अंतिम संस्कार कर दिया गया। इस निर्णय का एक और बड़ा नुकसान यह हुआ कि पोस्टमार्टम नहीं होने के कारण सर्पदंश से मृत्यु पर शासन द्वारा दी जाने वाली लगभग 4 लाख रुपये की आर्थिक सहायता भी अब परिवार को मिलना मुश्किल हो सकती है।

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