शिवपुरी। शिवपुरी जिले के बैराड़ थाने के टीआई सुरेश शर्मा के WhatsApp कॉल के स्क्रीनशॉट लेकर SP ऑफिस एक युवक पहुंचा था,युवक की शिकायत है कि बैराड पुलिस अब फर्जी रिकॉर्ड वायरल कर रही है,टीआई न्यायालय से दोषमुक्त हुए मामलों में अभी भी दोषी बता रही है। मामला स्मैक के मामले में एक युवक की गिरफ्तारी से जुड़ा हुआ है। टीआई सुरेश शर्मा ने प्रेस नोट जारी किया था कि स्मैक तस्कर को मंदिर के पास से पकड़ा है और आरोपी युवक के पजिरनो ने वीडियो सबूत के तौर पर जारी करते हुए कहा कि सोते हुए घर से पकडा है और फर्जी मामला दर्ज करते हुए स्वयं ने स्मैक रख जेल भेज दिया।
जब इस मामले की शिकायत पुलिस के द्वारा बनाए गए आरोपी की पत्नी ने एसपी शिवपुरी से कर दी तो अब बैराड पुलिस का दबाव का बदला शुरू कर दिया है। गिरफ्तार युवक के भाई के पुराने रिकॉर्ड को जिंदा कर वायरल किया जा रहा है। वही इस शिकायत में कहा गया है कि पुलिस जो रिकॉर्ड बता रही है उनमे से कई मामलों मे वह न्यायालय से दोष मुक्त हो चुके है। शिकायत कर्ता ने एक 100 पेज की न्यायालय का रिकॉर्ड एसपी शिवपुरी को अपने शिकायती आवेदन के साथ सौंपा हैं।
कोर्ट ने कहा बाइज्जत बरी, पुलिस बोली तुम तो मुजरिम हो
बैराड के रहने वाले पीड़ित गिर्राज ओझा का दर्द है कि अदालत उन्हें और उनके छोटे भाई ब्रजेश उर्फ छोटू ओझा को कई मामलों (प्रकरण क्रमांक 423/2023, 229/2024, 389/2024, 79/2020 और 23/2021) में पहले ही दोषमुक्त (बरी) कर चुकी है। लेकिन बैराड़ पुलिस की डायरी में ये मामले आज भी लंबित यानी चालू दिखाए जा रहे हैं। गिरिराज ने सवाल उठाया कि जब अदालत हमें बाइज्जत बरी कर चुकी है, तो पुलिस आज भी अपने रिकॉर्ड में हमें अपराधी की तरह क्यों पेश कर रही है?
स्मैक मामले की शिकायत का बदला
इस पूरी कहानी के पीछे खाकी की बौखलाहट' बताई जा रही है। दरअसल, ब्रजेश ओझा की पत्नी रजनी ओझा ने पूर्व में पुलिस पर घर से उठाकर झूठा केस दर्ज करने, नकदी हड़पने और प्रताड़ित करने की शिकायत एसपी से की थी। आरोप है कि इसी शिकायत का बदला लेने के लिए बैरागढ़ पुलिस अब दोनों भाइयों को समाज में बदनाम करने पर उतारू है। उनका पुराना, बंद हो चुका और गलत रिकॉर्ड जानबूझकर सार्वजनिक किया जा रहा है।
सबूत में सौंपे थाना प्रभारी के 'WhatsApp कॉल
मामला सिर्फ जुबानी नहीं है। पीड़ित गिर्राज ओझा ने बैराड़ थाना प्रभारी सुरेश शर्मा द्वारा उनके मोबाइल और व्हाट्सएप पर किए गए कॉल्स की हिस्ट्री और स्क्रीनशॉट भी एसपी को सौंपे हैं। पीड़ित परिवार को डर है कि पुलिस उन पर शिकायत वापस लेने का भारी दबाव बना रही है और उन्हें किसी बड़े झूठे केस में फंसा सकती है।
पीड़ित परिवार ने एसपी से मांग की है कि
इस मामले की जांच बैराड़ पुलिस से छीनकर किसी वरिष्ठ और स्वतंत्र अधिकारी को सौंपी जाए। कोर्ट से बरी हो चुके मामलों को जानबूझकर रिकॉर्ड में अपडेट न करने वाले पुलिसकर्मियों पर कड़ी कार्रवाई हो। जांच पूरी होने तक परिवार को टीआई की प्रताड़ना से सुरक्षा दी जाए।

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