महल कॉलोनी से मिली सबसे पहली खबर
शनिवार की शाम महल कॉलोनी में घर के बहार खेल रही एक ढाई साल की मासूम को इस काले डॉग ने अपना शिकार बनाया,आवारा काले कुत्ते ने मासूम का चेहरा अपने जबडे मे भर लिया था,बड़ी मुश्किल से इस मासूम को बचा पाया। इसके बाद शहर के कई इलाकों से काले कुत्ते के काटने की खबरें आने लगी,देर शाम तक अस्पताल में कुत्तो के शिकार लोगों की एक लंबी लाइन लगने लगी।
बच्चों, महिलाओं और बुजुर्गों सहित 60 से अधिक लोग उसके हमले का शिकार बने। हालात ऐसे हो गए कि लोगों ने घरों से निकलना तक कम कर दिया। घटनाओं के बाद देर शाम नगर पालिका की टीम ने दावा किया कि उसने हमलावर कुत्ते को पकड़ लिया है। इस सूचना के बाद लोगों ने राहत की सांस ली, लेकिन यह राहत कुछ ही घंटों की साबित हुई।
सुबह फिर लौटा खौफ
रविवार सुबह शहर फिर दहशत में डूब गया। स्टेडियम रोड, जवाहर कॉलोनी, गुना बाईपास और करौंदी क्षेत्र में उसी रंग और हुलिए के कुत्ते ने पांच लोगों पर हमला कर उन्हें घायल कर दिया। इससे नगर पालिका के दावे पर सवाल खड़े हो गए हैं। लोगों का कहना है कि यदि असली हमलावर पकड़ा जा चुका था तो फिर उसी तरह का हमला दोबारा कैसे हुआ? अब यह चर्चा आम हो गई है कि कहीं नगर पालिका ने किसी दूसरे कुत्ते को तो नहीं पकड़ लिया।
ये लोग रविवार को बने शिकार
रविवार सुबह कुत्ते के हमलों में कई लोग घायल हुए। स्टेडियम रोड स्थित मैरिज गार्डन के पास 18 वर्षीय संजू आदिवासी की छाती पर कुत्ते ने छलांग लगाकर काट लिया। मालती जैन को जवाहर कॉलोनी में घर के बाहर हमला कर घायल किया गया। जितेंद्र वंशकार और प्रदीप धीमर गुना बायपास क्षेत्र में कुत्ते का शिकार बने, जबकि मुत्रा जाटव को करौंदी क्षेत्र में काटकर घायल कर दिया गया। सभी को उपचार के लिए अस्पताल पहुंचाया गया।
असली हमलावर की तलाश में उलझी नपा
सूत्रों के अनुसार नगर पालिका के पास हमलावर कुत्ते की स्पष्ट पहचान नहीं है। इसी कारण अब टीम शहर में दिखाई देने वाले हर काले रंग के कुत्ते को पकड़ने में जुटी है। रविवार को भी तीन काले कुत्तों को पकड़कर शहर से बाहर अमोला घाटी क्षेत्र में छोड़े जाने की जानकारी सामने आई है। इस कार्रवाई ने एक नया सवाल खड़ा कर दिया है कि क्या बिना पुष्टि के सिर्फ रंग के आधार पर कुत्तों को पकड़ा जा रहा है?
नसबंदी के दावों पर भी घमासान
आवारा कुत्तों की बढ़ती संख्या के बीच नगर पालिका और पशुपालन विभाग के बयान भी आमने-सामने आ गए हैं। नगर पालिका का दावा है कि उसने पिछले एक महीने में 4 से 5 कुत्तों की नसबंदी कराई है। वहीं पशुपालन एवं डेयरी विकास विभाग के उपसंचालक एल.आर. शर्मा ने इस दावे को सिरे से खारिज करते हुए कहा कि उनके विभाग में नगर पालिका द्वारा एक भी कुत्ते की नसबंदी नहीं कराई गई है। उधर शहर में एबीसी (एनिमल बर्थ कंट्रोल) सेंटर की स्थापना की प्रक्रिया अभी टेंडर स्तर पर अटकी हुई है। ऐसे में आवारा कुत्तों की समस्या लगातार विकराल होती जा रही है।
जनता पूछ रही एक ही सवाल
दो दिनों में 65 से ज्यादा लोग घायल हो चुके हैं, बच्चे घरों से निकलने में डर रहे हैं और कॉलोनियों में लोग समूह बनाकर आवाजाही कर रहे हैं। ऐसे में शहर की जनता प्रशासन से सिर्फ एक सवाल पूछ रही है , क्या काला आतंक सचमुच पकड़ लिया गया है, या वह अभी भी शिवपुरी की सड़कों पर खुला घूम रहा है ?

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