शिवपुरी। जिले में लगातार हो रही बारिश अब सिर्फ राहत ही नहीं, बल्कि खतरे की घंटी भी बनती जा रही है। नदी-नालों का जलस्तर बढ़ने के साथ मगरमच्छ जैसे जंगली जीव आबादी और खेतों की ओर रुख करने लगे हैं। ऐसा ही एक मामला अकोदा गांव में सामने आया, जहां धान की रोपाई कर रहे मजदूरों के बीच अचानक करीब 5 से 6 फीट लंबा मगरमच्छ दिखाई देने से अफरा-तफरी मच गई। जान बचाने के लिए मजदूर तुरंत खेत छोड़कर बाहर भागे, जबकि सूचना मिलते ही आसपास के ग्रामीणों की भारी भीड़ मौके पर जमा हो गई।
रोपाई के दौरान पानी में दिखी हलचल, फिर सामने आया मगरमच्छ
जानकारी के अनुसार घटना शुक्रवार दोपहर करीब 2 बजे की है। गांव के पास नदी किनारे स्थित खेत में मजदूर धान की रोपाई कर रहे थे। खेत में पानी भरा हुआ था। इसी दौरान पानी के बीच अचानक तेज हलचल हुई। पहले मजदूरों को लगा कि कोई बड़ा जलीय जीव होगा, लेकिन जब उन्होंने पास जाकर देखा तो खेत के बीचों-बीच एक विशाल मगरमच्छ आराम से बैठा हुआ था। मगरमच्छ को देखते ही मजदूरों के होश उड़ गए। किसी ने भी जोखिम नहीं उठाया और सभी तुरंत खेत से बाहर निकल आए।
सूचना मिलते ही मौके पर उमड़ी भीड़
मजदूरों ने गांव में मगरमच्छ होने की खबर दी तो कुछ ही देर में बड़ी संख्या में ग्रामीण मौके पर पहुंच गए। हर कोई खेत में पहुंचे मगरमच्छ को देखने के लिए उत्सुक था। हालांकि लोगों ने सुरक्षित दूरी बनाए रखी और किसी ने भी उसके करीब जाने की कोशिश नहीं की। ग्रामीणों का मानना है कि पिछले कई दिनों से हो रही लगातार बारिश के कारण नदी का जलस्तर तेजी से बढ़ गया है। संभवतः तेज बहाव के साथ मगरमच्छ खेत तक पहुंच गया।
देर रात तक खेत में डटा रहा मगरमच्छ
शाम ढलने के बाद मगरमच्छ कुछ देर तक सक्रिय जरूर हुआ, लेकिन खेत छोड़कर बाहर नहीं निकला। इसके चलते आसपास के गांवों से भी लोग उसे देखने पहुंचते रहे। देर रात तक खेत के आसपास लोगों की आवाजाही बनी रही। मगरमच्छ के कारण पूरे इलाके में दहशत का माहौल रहा।
बारिश में बढ़ जाता है खतरा
वन्यजीव विशेषज्ञों के अनुसार बारिश के मौसम में नदी, तालाब और नालों का जलस्तर बढ़ने से मगरमच्छ, सांप और अन्य जंगली जीव बहाव के साथ खेतों और आबादी वाले इलाकों तक पहुंच जाते हैं। ऐसे समय किसानों, मजदूरों और नदी किनारे रहने वाले लोगों को विशेष सावधानी बरतने की जरूरत होती है।
प्रशासन और ग्रामीणों से अपील
बारिश के मौसम को देखते हुए लोगों से अपील की गई है कि यदि कहीं मगरमच्छ या कोई अन्य जंगली जीव दिखाई दे तो उसके पास जाने या उसे छेड़ने का प्रयास न करें। तुरंत वन विभाग या स्थानीय प्रशासन को सूचना दें, ताकि सुरक्षित तरीके से रेस्क्यू कर उसे प्राकृतिक आवास में छोड़ा जा सके।
ग्रामीणों का कहना है कि अकोदा जैसी घटनाएं अब पहले की तुलना में अधिक सामने आने लगी हैं। ऐसे में नदी किनारे बसे गांवों में वन विभाग को निगरानी बढ़ाने और लोगों को जागरूक करने की आवश्यकता है, ताकि किसी अप्रिय घटना से बचा जा सके।

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