शिवपुरी,पूर्व पार्षद राजू यादव को बडा झटका,अंत: चैक बाउंस के मामले मे जाना होगा जेल

vikas
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शिवपुरी। शिवपुरी के पूर्व कांग्रेस पार्षद राजेंद्र उर्फ राजू यादव को चेक बाउंस मामले में अदालत से बड़ा झटका लगा है। जिला न्यायालय ने उनकी अपील खारिज करते हुए निचली अदालत द्वारा सुनाई गई छह माह के सश्रम कारावास की सजा को बरकरार रखा है। इसके साथ ही अदालत ने 2 लाख 52 हजार रुपये प्रतिकर अदा करने के आदेश भी यथावत रखे हैं। यदि प्रतिकर की राशि जमा नहीं की जाती है, तो उन्हें एक माह का अतिरिक्त सश्रम कारावास भुगतना होगा। यह फैसला प्रथम अपर सत्र न्यायाधीश, शिवपुरी द्वारा दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद सुनाया गया।

क्या था पूरा मामला ? परिवाद के अनुसार, वार्ड क्रमांक-17 लुधावली निवासी पूर्व पार्षद राजेंद्र कुमार यादव उर्फ राजू यादव ने अपने परिचित गयाप्रसाद यादव से पारिवारिक एवं व्यावसायिक आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए 28 अक्टूबर 2022 को 2 लाख रुपये उधार लिए थे। ऋण की राशि लौटाने के लिए राजू यादव ने गयाप्रसाद यादव को एक चेक दिया। जब परिवादी ने भुगतान के लिए चेक बैंक में लगाया तो वह अपर्याप्त राशि (Insufficient Funds) की टिप्पणी के साथ अनादृत (बाउंस) होकर वापस लौट आया।

नोटिस के बाद भी नहीं किया भुगतान चेक बाउंस होने के बाद परिवादी ने अपने अधिवक्ता गजेंद्र सिंह यादव के माध्यम से विधिक नोटिस भेजकर निर्धारित समय में राशि का भुगतान करने की मांग की। आरोप है कि नोटिस प्राप्त होने के बावजूद राजू यादव ने न तो राशि लौटाई और न ही कोई संतोषजनक जवाब दिया। इसके बाद परिवादी ने परक्राम्य लिखत अधिनियम (Negotiable Instruments Act) की धारा 138 के तहत न्यायालय में परिवाद दायर किया।

तीन साल चली सुनवाई, दोषी करार करीब तीन वर्ष तक चली सुनवाई के दौरान न्यायालय ने दोनों पक्षों के साक्ष्य और दस्तावेजों का परीक्षण किया। इसके बाद न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी (JMFC) सुश्री प्रिया शर्मा ने राजेंद्र उर्फ राजू यादव को धारा 138 के तहत दोषी ठहराते हुए छह माह के सश्रम कारावास, 2.52 लाख रुपये प्रतिकर तथा प्रतिकर जमा नहीं करने की स्थिति में एक माह के अतिरिक्त सश्रम कारावास की सजा सुनाई।

अपील भी हुई खारिज निचली अदालत के फैसले को चुनौती देते हुए राजू यादव ने जिला एवं सत्र न्यायालय में अपील दायर की। मामला सुनवाई के लिए **प्रथम अपर सत्र न्यायाधीश, शिवपुरी की अदालत में पहुंचा। दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद अदालत ने पाया कि निचली अदालत का फैसला तथ्यों और साक्ष्यों के अनुरूप है। इसके बाद अपील को निरस्त करते हुए पूर्व पार्षद की सजा को यथावत बरकरार रखा गया।

परिवादी की ओर से इन अधिवक्ताओं ने की पैरवी मामले में परिवादी गयाप्रसाद यादव की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता गजेंद्र सिंह यादव ने पैरवी की। उनके साथ सहयोगी अधिवक्ता **अशपाक खान, अजय शाक्य और राजकुमार राठौर भी न्यायालय में उपस्थित रहे। इस फैसले को चेक बाउंस मामलों में न्यायालय के सख्त रुख के रूप में देखा जा रहा है। अदालत ने स्पष्ट किया कि वित्तीय लेन-देन में जारी किए गए चेक की कानूनी जिम्मेदारी से बचा नहीं जा सकता और भुगतान में लापरवाही या चूक होने पर कानून के तहत दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी।


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