शिवपुरी, जमीन पर कब्जा करने का प्रयास, विरोध किया तो विधायक के नाम की धमकी

vikas
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करैरा।
शिवपुरी जिले के करैरा विधानसभा के आमोलपठा मे निवास करने वाले एक आदिवासी परिवार ने शिवपुरी एसपी यांगचेन डोलकर भूटिया को एक शिकायती आवेदन दिया है। इस आवेदन के अनुसार पीड़ित की जमीन पर कब्जा करने का प्रयास किया जा रहा हैं,जब उसने विरोध किया तो क्षेत्रीय विधायक रमेश खटीक के नाम की धमकी दी गई। जब पीडित विधायक के पास पहुंचा तो वहां से भी संतुष्टि पूर्वक जवाब नहीं  मिला। इस कारण पीड़ित को पुलिस अधीक्षक की शरण लेनी पडी। करैरा विधायक रमेश खटीक  के विधायक प्रतिनिधि और कई लोगों पर सरकारी जमीन या जबरिया जमीन कब्जाने के  आरोप पिछले कई दिनो से लग रहे हैं। 

हमारी जमीन पर रख दी स्टॉल, हटाने को कहा तो बढ़ने लगीं धमकियां
आमोलपठा निवासी गोपाल आदिवासी और चैनु आदिवासी का आरोप है कि गांव के ही गब्बर कुशवाह ने उनकी जमीन पर बिना अनुमति स्टॉल रखकर कब्जा कर लिया। परिवार का कहना है कि जब उन्होंने स्टॉल हटाकर जमीन खाली करने को कहा तो उन्हें करैरा विधायक के नाम का हवाला देकर धमकाया गया। पीड़ितों का दावा है कि पिछले दो-तीन महीनों के दौरान तीन बार पुलिस उनके घर पहुंची, जिससे वे और उनका परिवार भय के माहौल में जीने को मजबूर हैं। उनका कहना है कि पुलिस की लगातार मौजूदगी से उन्हें ऐसा महसूस कराया गया कि यदि उन्होंने आवाज उठाई तो उनके खिलाफ कार्रवाई हो सकती है।

विधायक से शिकायत करने पहुंचे, वहां भी मिला निराशाजनक जवाब: पीड़ित
पीड़ित परिवार का कहना है कि वे अपनी शिकायत लेकर करैरा विधायक रमेश खटीक के पास भी पहुंचे थे, लेकिन वहां भी उनकी समस्या का समाधान नहीं हुआ। उनका आरोप है कि उन्हें वहां भी दबाव और धमकियों का सामना करना पड़ा। परिवार का कहना है कि उनके पास जमीन की रजिस्ट्री सहित सभी आवश्यक दस्तावेज मौजूद हैं और प्रशासन निष्पक्ष जांच कराकर उन्हें उनकी जमीन वापस दिलाए।

SP से लगाई न्याय की गुहार
मामले में पीड़ित परिवार ने शिवपुरी पुलिस अधीक्षक यांगचेन डोलकर को लिखित शिकायत देकर पूरे घटनाक्रम की निष्पक्ष जांच कराने, कथित कब्जा हटवाने और सुरक्षा प्रदान करने की मांग की है। अब यह देखना होगा कि पुलिस जांच में क्या तथ्य सामने आते हैं और प्रशासन इस मामले में क्या कार्रवाई करता है।

विधायक बोले- जमीन सरकारी है, डराने का सवाल ही नहीं
मामले में करैरा विधायक रमेश खटीक ने आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि संबंधित जमीन निजी नहीं बल्कि सरकारी और विक्रय से प्रतिबंधित (बर्जित) भूमि है। उन्होंने कहा कि यदि इस जमीन की रजिस्ट्री हुई है तो उसकी वैधता की जांच कराकर पट्टा निरस्त कराने की कार्रवाई कराई जाएगी। विधायक ने यह भी स्पष्ट किया कि उन्होंने किसी को धमकाया नहीं है। उनके अनुसार, शिकायतकर्ता उनके पास आए थे, उन्हें समझाइश देकर वापस भेज दिया गया था। उन्होंने कहा कि डराने या धमकाने जैसी कोई घटना नहीं हुई है।

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