शिवपुरी। सिंध नदी पर बन रहा करोड़ों रुपये का पुल अब सिर्फ देरी का नहीं, बल्कि निर्माण गुणवत्ता पर उठते गंभीर सवालों का भी प्रतीक बन गया है। एक ओर पुल तय समय सीमा बीत जाने के बाद भी अधूरा पड़ा है, जिससे करीब 50 गांवों के हजारों लोग महीनों से आवागमन की परेशानी झेल रहे हैं और किसानों की फसलें वाहनों की आवाजाही से बर्बाद हो रही हैं। दूसरी ओर सोशल मीडिया पर वायरल हुए एक वीडियो ने पुल निर्माण में कथित लापरवाही की परतें खोल दी हैं।
वीडियो में बिना वाइब्रेटर मशीन के पुल की स्लैब पर कंक्रीट डालते मजदूर, फावड़े से कंक्रीट दबाते हुए और कैमरा देखकर भागता सुपरवाइजर दिखाई दे रहा है। ग्रामीणों का आरोप है कि करोड़ों रुपये की परियोजना में गुणवत्ता से समझौता कर लोगों की जान से खिलवाड़ किया जा रहा है।
वीडियो ने खोली निर्माण की पोल
कोलारस-रन्नौद मार्ग पर भडौता के पास सिंध नदी पर बन रहे पुल का एक वीडियो इंटरनेट मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। वीडियो में स्पष्ट दिखाई देता है कि पुल की स्लैब पर कंक्रीट डाली जा रही है, लेकिन आरसीसी निर्माण का सबसे महत्वपूर्ण उपकरण वाइब्रेटर मशीन मौके पर नहीं चल रही। मजदूर फावड़े और तसलों की मदद से कंक्रीट को समतल करते नजर आ रहे हैं।
ग्रामीणों का दावा है कि जब उन्होंने मौके पर मौजूद सुपरवाइजर से इस संबंध में सवाल किए तो वह कैमरा देखते ही वहां से निकल गया। लोगों का आरोप है कि निर्माण स्थल पर ठेकेदार कंपनी का कोई जिम्मेदार इंजीनियर भी मौजूद नहीं था।
क्या कहते हैं निर्माण के नियम?
विशेषज्ञों के अनुसार किसी भी आरसीसी पुल या भवन में कंक्रीट डालते समय वाइब्रेटर का उपयोग अनिवार्य होता है। इससे कंक्रीट के भीतर फंसी हवा बाहर निकलती है और ढांचा मजबूत बनता है। यदि वाइब्रेटर का उपयोग नहीं किया जाए तो कंक्रीट में खाली स्थान (हनीकॉम्बिंग) रह जाते हैं, जिससे सरियों में जंग लगने, पुल की लोड क्षमता घटने और भविष्य में गंभीर हादसे की आशंका बढ़ जाती है।
निर्माण मानकों के अनुसार प्रत्येक कंक्रीट कार्य के दौरान स्लम्प टेस्ट, क्यूब टेस्ट और विभागीय इंजीनियर की उपस्थिति का रिकॉर्ड भी रखा जाना अनिवार्य है। यदि ऐसा नहीं होता है तो ठेकेदार पर जुर्माना लगाने और आवश्यकता पड़ने पर कंक्रीट तोड़कर दोबारा निर्माण कराने का भी प्रावधान है।
समय सीमा खत्म, पुल अब भी अधूरा
ग्रामीणों के अनुसार सिंध नदी पर पुल का निर्माण वर्ष 2021 में शुरू हुआ था और इसे 1 नवंबर 2025 तक पूरा होना था। लेकिन जुलाई 2026 तक भी पुल तैयार नहीं हो पाया। पुल अधूरा होने के कारण करीब 50 गांवों के लोगों को रोजाना लंबा और कठिन रास्ता तय करना पड़ रहा है। फरवरी 2025 से कोलारस-रन्नौद मार्ग बंद होने के कारण लोगों को हरिपुर-टामकी होकर लगभग 20 किलोमीटर लंबे डायवर्जन से गुजरना पड़ रहा है। भारी वाहनों की आवाजाही प्रभावित होने से व्यापार और कृषि परिवहन भी प्रभावित हुआ है।
खेत बने वैकल्पिक रास्ते, किसानों की फसलें बर्बाद
ग्रामीण किसान भूरा दांगी ने बताया कि पुल अधूरा होने के कारण ट्रैक्टर, कार और अन्य वाहन खेतों से होकर निकल रहे हैं। इससे खड़ी फसलें लगातार खराब हो रही हैं और किसानों को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है।
स्थानीय निवासी कल्याण सिंह दांगी और उमेश शर्मा का आरोप है कि निर्माण सामग्री की गुणवत्ता भी संतोषजनक नहीं है। उन्होंने बताया कि इस संबंध में कई बार वरिष्ठ अधिकारियों को शिकायत दी गई, लेकिन अब तक प्रभावी कार्रवाई नहीं हुई।
ग्रामीणों का आरोप-कमीशनखोरी की भेंट चढ़ गया पुल
ग्रामीणों का कहना है कि पुल निर्माण में लगातार देरी और गुणवत्ता को लेकर सामने आ रही अनियमितताएं गंभीर चिंता का विषय हैं। उनका आरोप है कि पूरा प्रोजेक्ट कमीशनखोरी और लापरवाही की भेंट चढ़ चुका है। यदि समय रहते जांच नहीं हुई तो भविष्य में यह पुल लोगों की सुरक्षा के लिए खतरा बन सकता है। ग्रामीणों ने निर्माण कार्य की उच्च स्तरीय तकनीकी जांच, गुणवत्ता परीक्षण और दोषी अधिकारियों व ठेकेदार के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है।
जिम्मेदार अधिकारियों का पक्ष
प्रधानमंत्री ग्राम सड़क परियोजना (PIU) के महाप्रबंधक नाहर सिंह ने कहा कि पुल का फिनिशिंग और साइट डेवलपमेंट का कार्य जारी है। किसानों के खेतों से वाहनों के गुजरने की जानकारी उन्हें नहीं है। उन्होंने आश्वासन दिया कि ग्रामीणों द्वारा लगाए गए भ्रष्टाचार और घटिया निर्माण के आरोपों की मौके पर जांच कराई जाएगी। यदि गुणवत्ता में कोई कमी या नियमों का उल्लंघन पाया जाता है तो संबंधित ठेकेदार के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।
वहीं वायरल वीडियो के संबंध में उन्होंने कहा कि *बिना वाइब्रेटर के कंक्रीट का काम होना संभव नहीं है। यदि ऐसा वीडियो है तो उपलब्ध कराइए, उसकी जांच कराई जाएगी। निर्माण कार्य पूरी तरह निर्धारित मानकों के अनुसार कराया जाएगा।

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