भाजपा के राम राज्य मे MP के टीवन डकैत रहे रामबाबू गडरिया की पूजा शुरू, पढिए मामला

vikas
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शिवपुरी।
भारतीय जनता पार्टी ने कभी हिंदुओं के आराध्य भगवान श्रीराम को अपना अघोषित ब्रांड एंबेसडर बनाते हुए देश की सत्ता के सिंहासन पर विराजमान हो गई। उसी भारतीय जनता पार्टी के विधायक ने मप्र मे टारगेट वन पर रहे डकैत रामबाबू गडरिया की पूजा शुरू करवा दी है। पुलिस  एनकाउंटर में 2 बार मारे गए इस डकैत के परिजनों ने कभी नही सोचा होगा कि एक दिन एक विधायक महोदय मंच पर फोटो रख माला भी चढा सकते है। 13 से भी अधिक हत्या करने वाले इस डकैत को सामंतवाद का पीड़ित बता दिया। 

पिछोर विधायक प्रीतम लोधी के इस कारनामे ने फिर एक नई बहस को जन्म दे दिया है
रविवार को पिछोर में अहिल्याबाई होल्कर जयंती कार्यक्रम में विधायक ने रामबाबू गडरिया की तस्वीर पर माल्यार्पण किया और मंच से उसके पक्ष में बयान दिए। लोधी ने कहा कि रामबाबू डकैत बनने लायक नहीं था और दोनों एक-दूसरे के सुख-दुख के साथी रहे हैं। दावा किया कि रामबाबू की बहन पर अत्याचार होने के बाद उन्होंने उसके समर्थन में आवाज उठाई थी। सामंती अत्याचारों ने उसे डकैत बनने पर मजबूर किया। 

कार्यक्रम में विधायक लोधी ने चंबल अंचल के कुख्यात डकैत रामबाबू गड़रिया को अपना भाई जैसा बताते हुए उसकी खुलकर प्रशंसा की। इतना ही नहीं, कार्यक्रम के दौरान उन्होंने रामबाबू के समर्थन में नारे भी लगाए और उसके चित्र पर माल्यार्पण किया। बस स्टैंड परिसर में आयोजित समारोह में विधायक लोधी ने कहा, रामबाबू गड़रिया उनके सुख-दुख का साथी था और उन्होंने हमेशा उसका साथ दिया। 

बता दें कि रामबाबू का नाम चंबल के कुख्यात दस्युओं में रहा है। उसके गैंग पर हत्या, नरसंहार, अपहरण जैसे कई गंभीर अपराध दर्ज रहे हैं। उस पर 15 लाख रुपए का इनाम घोषित था। रामबाबू ने भंवरपुरा गांव में 13 गुर्जरों को लाइन में खड़ा कर गोलियों से भून दिया था,10 साल तक शिवपुरी सहित ग्वालियर चंबल संभाग पर आतंक का दूसरा नाम रहे डकैत रामबाबू गडरिया मप्र पुलिस के टारगेट सूची में नंबर 1 की पोजीशन पर रहा था। 

प्रीतम लोधी इससे पहले भी अपने बयानों को लेकर सुर्खियों में रह चुके हैं। हाल ही में उन्होंने करैरा के SDOP डॉ. आयुष जाखड़ को लेकर विवादित टिप्पणी की थी। उन्होंने कहा था- करैरा तेरे डैडी का नहीं है, एसडीओपी। करैरा आएगा और चुनाव भी लड़ेगा। अगर तेरे डैडी में दम हो तो रोक लेना।

जब उमा भारती की सरकार आई
थी तो उनके कहने पर मैं डकैत रामबाबू को हाजिर करवाने के लिए मिलने गया था। जो कार्यक्रम पिछोर में हुआ था, वह पाल समाज का था। वह रामबाबू को अपना आदर्श मानते हैं। वहां फोटो रखी थी तो और लोगों की तरह मैंने भी माला पहना दी। बाकी फूलन देवी भी तो डकैत थी, जब लोग उनके चित्र पर माला पहनाते थे तो रामबाबू में क्या दिक्कत है। 
प्रीतम सिंह लोधी, पिछोर विधायक

समाज में गलत संदेश देने का उद्देश्य नहीं था। कुछ युवा रामबाबू गड़रिया की फोटो लेकर कार्यक्रम में आ गए थे। चूंकि अब रामबाबू स्वर्गवासी हो गए थे तो उनको अन्य महापुरुषों की तरह श्रद्धांजलि दे सकते हैं। ऐसी कोई बात नहीं थी।
जगतपाल सिंह, कार्यक्रम आयोजक
व पूर्व जिलाध्यक्ष पाल बघेल समाज

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