शिवपुरी,भाजपा के राम राज्य मे 18 साल से ताले मे कैद थे प्रभु श्रीराम,बहार निकले

vikas
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शिवपुरी।
देश ओर प्रदेश मे भारतीय जनता पार्टी का शासन है,भाजपा ने एक समय मे प्रभु श्रीराम को अपना ब्रांड एंबेसडर बनाया और रामलाला के अयोध्या मंदिर बनाने के आंदोलन की दम पर देश के हिंदुओ मे बस गई और देश की सरकार के रूप मे विराजमान हो गई,अयोध्या मे राम मंदिर तो बन गया,लेकिन शिवपुरी जिले के करैरा विधानसभा के अमोला वाले रामलला के भव्य मंदिर बनाने के लिए फंड भी दिया लेकिन प्रभु श्रीराम की नए मंदिर मे प्राण प्रतिष्ठा नही करा सके,जब जनता का सब्र टूट गया तो पब्लिक ने स्वयं ही अमोला वाले रामलला की प्रतिष्ठा का प्रण लिया और उनको 18 साल बाद एक हाट बाजार की दुकान से मुक्ति दिलाई। 

अमोला गांव के भगवान राम को अपनी ही प्राण प्रतिष्ठा के लिए 18 वर्षों तक इंतजार करना पड़ा। अटल सागर बांध के डूब क्षेत्र में आने के बाद विस्थापित हुए रामलला वर्षों तक एक बंद दुकान में ताले के पीछे कैद रहे। प्रशासनिक उदासीनता और जनप्रतिनिधियों की अनदेखी के कारण भगवान का नया मंदिर नहीं बन सका, जबकि उनके विस्थापन के लिए निर्धारित राशि प्रशासन के पास जमा रही। आखिरकार जब किसी ने भगवान की सुध नहीं ली तो ग्रामीणों ने स्वयं चंदा जुटाया, मंदिर बनवाया और अब पूरे विधि-विधान से प्राण प्रतिष्ठा का महाआयोजन शुरू कर दिया है।

शनिवार को अमोला में वर्षों की प्रतीक्षा का अंत हुआ। 18 साल बाद रामलला को ताले में बंद कमरे से बाहर निकाला गया। पूरे गांव में उत्सव जैसा माहौल रहा। महिलाओं ने मंगलगीत गाए, युवाओं ने जय श्रीराम के उद्घोष लगाए और श्रद्धालुओं की आंखों में वर्षों का इंतजार पूरा होने की खुशी साफ दिखाई दी।

डूब में समा गया था सैकड़ों साल पुराना मंदिर
अमोला गांव अटल सागर बांध के डूब क्षेत्र में शामिल था। वर्ष 2003-04 में प्रशासन और पंचायत के बीच विस्थापन संबंधी अनुबंध हुआ और 2006-07 में गांव का पुनर्वास किया गया। बांध में जलभराव बढ़ने के साथ ही गांव का सैकड़ों वर्ष पुराना राम मंदिर भी डूब क्षेत्र में आ गया।

मंदिर के क्षतिग्रस्त होने की आशंका को देखते हुए प्रशासनिक अधिकारियों के निर्देश पर ग्रामीणों ने धार्मिक रीति-रिवाजों के साथ भगवान राम की प्रतिमा को वहां से हटाकर पंचायत द्वारा निर्मित हाट-बाजार की दुकानों में सुरक्षित रखवा दिया। उस समय ग्रामीणों को भरोसा दिलाया गया था कि नए अमोला में भव्य मंदिर बनाकर भगवान की पुनः प्राण प्रतिष्ठा कराई जाएगी।

राशि जमा रही, लेकिन नहीं बन पाया मंदिर
ग्रामीणों के अनुसार उस समय के तत्कालीन कलेक्टर मनीष श्रीवास्तव ने भगवान राम के विस्थापन के लिए निर्धारित राशि प्रशासन के पास सुरक्षित रखवाई थी। आश्वासन दिया गया था कि इसी राशि से नया मंदिर बनाया जाएगा, लेकिन समय बीतता गया और वादे फाइलों में दबकर रह गए।

वर्षों तक ग्रामीण प्रशासन और जनप्रतिनिधियों के दरवाजे खटखटाते रहे, लेकिन रामलला की प्राण प्रतिष्ठा का सपना पूरा नहीं हो सका। यहां तक कि वर्ष 2024 में अयोध्या में राम मंदिर की प्राण प्रतिष्ठा के दौरान भी अमोला वाले रामलाला का मामला शिवपुरी समाचार डॉट कॉम सहित शिवपुरी की मीडिया ने उठाया था।  उस समय भी प्रशासन ने आश्वासन दिया, लेकिन धरातल पर कोई काम नहीं हुआ।

ग्रामीणों ने संभाली जिम्मेदारी
जब उम्मीदें टूटने लगीं तो ग्रामीणों ने स्वयं आगे बढ़कर जिम्मेदारी उठाई। गांव-गांव चंदा एकत्रित किया गया और नव-निर्मित मंदिर का निर्माण कराया गया। अब उसी मंदिर में भगवान राम की प्राण प्रतिष्ठा का आयोजन शुरू हो गया है। शनिवार को खेड़ापति हनुमान मंदिर से भव्य कलश यात्रा निकाली गई। यात्रा में महिलाएं सिर पर कलश लेकर शामिल हुईं, जबकि युवाओं और बुजुर्गों ने जय श्रीराम के जयघोष के साथ पूरे वातावरण को भक्तिमय बना दिया। कलश यात्रा नव-निर्मित मंदिर पहुंची, जहां वैदिक मंत्रोच्चार के बीच धार्मिक अनुष्ठान प्रारंभ हुए।

जागीर के जमाने से पूजे जाते आ रहे श्री राम...
आजादी के पहले शिवपुरी में सिंध नदी किनारे अमोला नाम से चौहानों की जागीर हुआ करती थी। जागीरदारों ने अमोला क्षेत्र में कई मंदिरों का निर्माण करवाया। इनमें 100 साल से भी पुराना श्री राम दरबार का राज मंदिर, मुख्य मंदिर हुआ करता था। आजादी के साथ ही जागीरदारी प्रथा पर तो विराम लग गया, लेकिन इस प्राचीन मंदिर से लोगों की आस्था जस की तस जुड़ी रही।

सालों तक आस्था का केंद्र रहे भगवान राम से भक्तों को 16 साल पहले दूर होना पड़ा। कारण अटल सागर बांध का निर्माण। 2008 में अटल सागर बांध के कैचमेंट एरिया में आने से अमोला गांव को विस्थापित करने की कवायत हुई। गांव से कुछ दूर सिरसोद गांव के पास अमोला-1, अमोला-2, अमोला-3 नाम की तीन कॉलोनियों बनाई गईं।

गांव वालों को यहां पर बसा दिया गया। घरों के साथ ही पानी में डूबे मंदिरों के लिए भी प्लानिंग बनाई गई। डूब क्षेत्र में आए मंदिर का भी कॉलोनी में निर्माण कार्य शुरू हुआ, बाद में निर्माण कार्य अधूरा छोड़ दिया गया। मंदिर का निर्माण इतने सालों बाद भी पूरा नहीं हुआ। ऐसे में जलमग्न हो चुके राम दरबार की मूर्तियां नए मंदिर में आज तक विराजित नहीं हो पाईं,अब पब्लिक अपने रामलला को नए मंदिर मे ले जा रही हैं। 

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