शिवपुरी मे अवैध कॉलोनियो पर कलेक्टर का शिकंजा, कॉलोनी सेल का किया गठन

vikas
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शिवपुरी।
जिले में तेजी से विकसित हो रही कॉलोनियों और भूखंडों की खरीद-फरोख्त पर अब प्रशासन की पैनी नजर रहेगी। अवैध कॉलोनियों के निर्माण, बिना अनुमति प्लॉटों की बिक्री और आम लोगों को होने वाली धोखाधड़ी पर रोक लगाने के लिए कलेक्टर एवं जिला मजिस्ट्रेट अर्पित वर्मा ने जिला स्तरीय कॉलोनी सेल का गठन किया है। यह सेल जिले के नगरीय क्षेत्रों में विकसित होने वाली नई कॉलोनियों की निगरानी करने के साथ-साथ कॉलोनाइजर लाइसेंस, विकास अनुमतियों और विभिन्न विभागों के बीच समन्वय स्थापित करने का काम करेगी।

प्रशासन के इस कदम को अवैध कॉलोनाइजरों के खिलाफ बड़ी कार्रवाई की तैयारी के रूप में देखा जा रहा है। लंबे समय से जिले में बिना वैधानिक अनुमति के कॉलोनियां विकसित होने और लोगों को प्लॉट बेचने की शिकायतें सामने आती रही हैं। ऐसे मामलों पर अंकुश लगाने के लिए अब एक सशक्त निगरानी तंत्र तैयार किया गया है।

अपर कलेक्टर को सौंपी गई जिम्मेदारी
जिला स्तरीय कॉलोनी सेल का प्रभारी अधिकारी अपर कलेक्टर को बनाया गया है। इसके अलावा अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व), संबंधित नगरीय निकायों के मुख्य नगरपालिका अधिकारी, लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग के कार्यपालन यंत्री, विद्युत वितरण कंपनी के महाप्रबंधक, उप पंजीयक और संबंधित तहसीलदार इस सेल के सदस्य होंगे। इस बहु-विभागीय टीम का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना होगा कि किसी भी कॉलोनी को विकसित करने से पहले सभी आवश्यक नियमों और प्रक्रियाओं का पालन किया गया है या नहीं।

हर नई कॉलोनी के प्रस्ताव की होगी जांच
अब जिले में आने वाले सभी नए कॉलोनाइजर लाइसेंस आवेदन और कॉलोनी विकास अनुमति प्रस्तावों का प्रारंभिक परीक्षण कॉलोनी सेल द्वारा किया जाएगा। परीक्षण के बाद विस्तृत अभिमत के साथ प्रकरण अंतिम निर्णय के लिए कलेक्टर के समक्ष प्रस्तुत किया जाएगा।

सेल यह जांच करेगी कि प्रस्तावित कॉलोनी मध्यप्रदेश नगरपालिका (कॉलोनी विकास) नियम 2021, मध्यप्रदेश कॉलोनाइजर रजिस्ट्रेशन एवं शर्तें नियम 1998 तथा अन्य प्रचलित नियमों के अनुरूप है या नहीं। इसके अलावा भूमि स्वामित्व, डायवर्सन, भू-अभिलेख, मास्टर प्लान, विकास योजना और अन्य तकनीकी दस्तावेजों का भी गहन परीक्षण किया जाएगा।

सड़क, बिजली, पानी और पार्क की भी होगी पड़ताल
किसी भी नई कॉलोनी को अनुमति देने से पहले यह देखा जाएगा कि वहां सड़क, पेयजल, बिजली, जल निकासी, उद्यान और सार्वजनिक उपयोग की भूमि जैसी बुनियादी सुविधाओं का पर्याप्त प्रावधान किया गया है या नहीं। संबंधित विभागों से तकनीकी अभिमत प्राप्त कर एक समेकित रिपोर्ट तैयार की जाएगी।

अवैध कॉलोनियों का होगा सर्वे
कॉलोनी सेल जिले में पहले से विकसित हो रही कॉलोनियों का सर्वेक्षण भी कराएगी। सर्वे के दौरान यह पता लगाया जाएगा कि संबंधित कॉलोनियों के पास वैध कॉलोनाइजर लाइसेंस, विकास अनुमति, स्वीकृत नक्शा और अधोसंरचना विकास योजना मौजूद है या नहीं।

जिन कॉलोनियों में नियमों का उल्लंघन पाया जाएगा, उनके खिलाफ वैधानिक कार्रवाई की अनुशंसा की जाएगी और आवश्यक होने पर प्रकरण भी दर्ज किए जाएंगे।

हर माह होगी समीक्षा बैठक
कलेक्टर द्वारा गठित यह सेल प्रत्येक माह समीक्षा बैठक आयोजित करेगी। बैठकों में प्राप्त शिकायतों, निरीक्षण रिपोर्टों, अवैध कॉलोनियों की स्थिति, लंबित मामलों, जारी नोटिसों और की गई कार्रवाई की समीक्षा की जाएगी। साथ ही जिले की वैध और अवैध कॉलोनियों की अद्यतन सूची भी तैयार की जाएगी, जिससे नागरिकों को सही जानकारी मिल सके और वे अवैध कॉलोनियों में निवेश करने से बच सकें।

आम लोगों को मिलेगा सीधा लाभ
प्रशासन का मानना है कि इस व्यवस्था से न केवल अवैध कॉलोनियों पर प्रभावी अंकुश लगेगा, बल्कि आम नागरिकों की जीवनभर की पूंजी को भी सुरक्षित किया जा सकेगा। अब बिना वैधानिक अनुमति के कॉलोनी विकसित करना और प्लॉट बेचना आसान नहीं होगा, क्योंकि हर स्तर पर प्रशासनिक निगरानी और जांच सुनिश्चित की गई है।

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