खनियाधाना। शिवपुरी जिले के पिछोर अनुविभाग के खनियाधाना थाना सीमा में बीते रोज बुधवार की दोपहर हुए सिलेंडर ब्लास्ट में मौत का आंकड़ा लगातार बढ़ रहा है। अब इस हादसे मे मरने वालो की संख्या 3 हो चुकी है,शुरुआती चरण में इस हादसे का जिम्मेदार रसोई के सिलेंडर को मान रहे थे,लेकिन बताया जा रहा है कि घर मे डीजल भी रखा हुआ था इस कारण इस हादसे ने इतना भयानक रूप ले लिया था।
जिंदगी की जंग हारे अपने, गांव में पसरा सन्नाटा
आज गुरुवार का दिन गुड़र गांव के लिए दोहरी त्रासदी लेकर आया। शाम करीब 4:30 बजे, गंभीर रूप से झुलसे मकान मालिक प्राण सिंह प्रजापति ने ग्वालियर के जयारोग्य अस्पताल (JAH) में इलाज के दौरान आखिरी सांस ली। प्राण सिंह अपने परिवार को बचाने के लिए मौत से लड़ रहे थे, लेकिन आखिरकार वह जिंदगी की जंग हार गए।
इससे पहले, गुरुवार की सुबह ही अस्पताल से एक और बुरी खबर आई थी, जब 11 वर्षीय मासूम कल्ला आदिवासी (पुत्र शिशुपाल आदिवासी) ने इलाज के दौरान दम तोड़ दिया था। इस हादसे की पहली शिकार प्राण सिंह की 4 वर्षीय मासूम बेटी जानवी प्रजापति बनी थी, जिसकी बुधवार को घटना के तुरंत बाद मलबे में दबने से मौके पर ही मौत हो गई थी। एक ही झटके में पिता, मासूम बेटी और पड़ोस के बच्चे की मौत ने पूरे इलाके को गहरे सदमे में डाल दिया है।
सुबह का नाश्ता बनाते समय हुआ था विस्फोट
घटनाक्रम के अनुसार, बुधवार की सुबह प्राण सिंह के घर में रोजाना की तरह चहल-पहल थी। रसोई में सुबह का नाश्ता तैयार किया जा रहा था कि अचानक एक ऐसा जोरदार धमाका हुआ जिसने पूरे गांव को दहला दिया। धमाका इतना शक्तिशाली था कि पलक झपकते ही पक्के मकान की छत और दीवारें ताश के पत्तों की तरह भरभराकर ढह गईं। देखते ही देखते मलबे के ढेर से आग की लपटें और धुएं का गुबार उठने लगा।
चश्मदीदों के अनुसार धमाका इतना तेज था कि लगा जैसे कोई बम फटा हो। धरती कांप उठी और चारों तरफ सिर्फ चीख-पुकार सुनाई दे रही थी। लोग अपनों को मलबे से निकालने के लिए पागलों की तरह दौड़ पड़े।" हादसे के बाद पुलिस, स्थानीय प्रशासन और फायर ब्रिगेड की टीमों ने मोर्चा संभाला और ग्रामीणों की मदद से रेस्क्यू ऑपरेशन शुरू किया। मलबे से झुलसे हुए लोगों को बाहर निकाला गया। इस हादसे में प्राण सिंह की पत्नी रोशनी प्रजापति और बेटा शिवा प्रजापति भी गंभीर रूप से झुलस गए हैं, जिनका इलाज फिलहाल ग्वालियर में जारी है।
धमाके की वजह क्या? जांच में जुटा प्रशासन
इस भीषण तबाही का असली कारण क्या था, इसे लेकर अभी भी सस्पेंस बरकरार है। शुरुआती जांच में दो मुख्य आशंकाएं जताई जा रही हैं,प्रारंभिक इनपुट्स के मुताबिक, घर में व्यावसायिक या निजी इस्तेमाल के लिए पेट्रोल-डीजल रखा हुआ था, जिसने रसोई की आग पकड़ ली और यह भयावह रूप ले लिया। सिलेंडर ब्लास्ट, पुलिस इस एंगल की भी जांच कर रही है कि कहीं नाश्ता बनाते समय गैस सिलेंडर में लीकेज की वजह से यह धमाका तो नहीं हुआ।
घटना की गंभीरता को देखते हुए कलेक्टर अर्पित वर्मा, एसपी यांगचेन डोलकर भूटिया और क्षेत्रीय विधायक प्रीतम लोधी तुरंत दल-बल के साथ गुड़र गांव पहुंचे। अधिकारियों ने घटना स्थल का मुआयना किया और पीड़ित परिवार को ढांढस बंधाया। प्रशासन ने साफ किया है कि घायलों के इलाज का पूरा खर्च उठाया जा रहा है और वरिष्ठ डॉक्टरों की टीम उनकी निगरानी कर रही है।
इस समय पूरे गुड़र गांव के घरों में चूल्हे नहीं जले हैं। हर आंख नम है और हर जुबां पर सिर्फ इस बात का खौफ है कि नियति ने एक हंसते-खेलते परिवार को इस तरह क्यों उजाड़ दिया। फिलहाल, पुलिस की फोरेंसिक टीम मलबे से साक्ष्य जुटा रही है ताकि ब्लास्ट की असली वजह सामने आ सके।

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