शिवपुरी। शिवपुरी शहर के जिला कलेक्ट्रेट कार्यालय पर बीते मंगलवार को हुई जनसुनवाई में एक युवा अपनी ग्राम पंचायत खजूरी के सरपंच व सचिव के भ्रष्टाचार को उजागर करने और शासन को हुए इस भ्रष्टाचार से नुकसान की शिकायत लेकर पहुंचा,युवक का कहना था कि मैं उसी गांव का निवासी हूं, मैंने स्वयं अपनी आंखों से सरपंच व सचिव को रोड़ों, तालाब आदि चीजों में भ्रष्टाचार करते हुए फर्जी बिल लगाकर पैसे निकाल लिये गये हैं, वहीं बताया जा रहा हैं कि प्राइवेट सेक्टर में कार्य करने वाले लोगों के खाने में तक पैसे भेजकर निकाल लिए जाते हैं। वहीं युवक ने आरटीआई लगाकर संपूर्ण जानकारी निकाल ली हैं।
जानकारी के अनुसार सुखदेव दुबे पुत्र दामोदर दुबे निवासी ग्राम व पंचायत खजूरी जिला शिवपुरी ने बताया कि ग्राम पंचायत खजूरी में पिछले तीन वर्षों में विकास कार्यों के नाम पर भारी अनियमितताएं की गई हैं। निर्माण कार्यों के लिए क्रय किए गए सीमेंट, सरिया और अन्य मटेरियल के दर्जनों बिलों में नियमों को ताक पर रखकर GST राशि जोड़ी ही नहीं गई है। इसके अलावा कई कार्य तो धरातल पर हुए ही नहीं, लेकिन उनकी राशि कागजों पर आहरित कर ली गई।
बूंदी से लेकर पानी परिवहन तक में फर्जीवाड़ा
सुखदेव ने बताया कि 15 अगस्त 2025 को स्वतंत्रता दिवस के मौके पर गिरिराज भोजनालय से मात्र 20 किलोग्राम बूंदी खरीदी गई थी, लेकिन बिल में इसे 130 किलोग्राम दर्शाकर सरकारी खजाने को चूना लगाया गया। वहीं पंचायत के पास खुद के 2 चालू टैंकर मौजूद हैं, इसके बावजूद निजी ट्रेडर्स के नाम पर पानी परिवहन के फर्जी बिल लगाकर भुगतान उठा लिया गया और सफाई के नाम पर खेल, बिना किसी सक्षम अनुमति के मुरम परिवहन और सफाई के नाम पर हजारों रुपयों का आहरण किया गया। कुछ बिलों में केवल खंडा लिख दिया गया, लेकिन कोई विवरण दर्ज नहीं है।
नौकरीपेशा लोगों के नाम पर मस्टर रोल
भ्रष्टाचार की हद तो तब हो गई जब गांव के दो युवक जुगल दुबे और अमर दुबे, जो पहले से ही कहीं नौकरी करते हैं, उनके नाम पर फर्जी मस्टर रोल जारी कर दिए गए। पंचायत ने उन्हें मजदूर दर्शाते हुए उनके नाम की राशि भी खुद डकार ली।
उच्च स्तरीय जांच और वसूली की मांग
सुखदेव दुबे ने बताया कि पंचायत के रसूखदार लोग अपने धनबल और प्रभाव के कारण हर बार जांच को प्रभावित कर देते हैं। इस बार उन्होंने सभी संदिग्ध बिलों और वाउचरों की छायाप्रतियां प्रमाण के तौर पर कलेक्टर के समक्ष प्रस्तुत की हैं।
ग्रामीणों ने मांग की है कि इस पूरे मामले की निष्पक्ष एवं उच्च स्तरीय जांच कराई जाए, घटिया निर्माण कार्यों का पुनर्मूल्यांकन हो और दोषी जनप्रतिनिधियों व अधिकारियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई कर उनसे राजस्व वसूली की जाए। कलेक्टर ने मामले की गंभीरता को देखते हुए जांच के आदेश दिए हैं।

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