शिवपुरी। करैरा तहसील के ग्राम जरगवां में सरकारी जमीनों के कथित फर्जीवाड़े ने सियासी और प्रशासनिक गलियारों में हलचल मचा दी है। विधानसभा में उठे एक सवाल ने राजस्व विभाग की फाइलों से ऐसा राज उजागर किया है, जिसमें करोड़ों की सरकारी जमीन फर्जी आदेशों के सहारे निजी नामों पर दर्ज कर दी गई। मामला इतना बड़ा है कि इसमें सत्ताधारी भाजपा विधायक के बेटे और उनके प्रतिनिधि के परिवार का नाम भी सामने आ रहा है।
डबरा से कांग्रेस विधायक सुरेश राजे द्वारा विधानसभा में लगाए गए प्रश्न के बाद जब राजस्व रिकॉर्ड की जांच हुई तो पता चला कि करैरा तहसील के ग्राम जरगवां के सर्वे नंबर 406 और 411 की करीब 47 बीघा सरकारी जमीन, जिसकी अनुमानित कीमत लगभग 45 करोड़ रुपए बताई जा रही है, फर्जी आदेशों के आधार पर बांट दी गई। सबसे चौंकाने वाला तथ्य यह सामने आया कि हाईवे किनारे स्थित करीब 5 बीघा जमीन भाजपा विधायक रमेश खटीक के पुत्र चेतन खटीक के नाम दर्ज है, जबकि 9 बीघा जमीन विधायक प्रतिनिधि राम सिया परिहार की पत्नी कमलेश परिहार के नाम राजस्व रिकॉर्ड में दर्ज पाई गई।
जांच में खुली फर्जी आदेशों की परतें
राजस्व विभाग की जांच में जिन तीन आदेशों के आधार पर पट्टे दर्ज किए गए थे, वे ही संदिग्ध और फर्जी निकले। प्रकरण क्रमांक 82 का संबंध ग्राम थनरा की एक महिला से मिला, जिसका जरगवां की जमीन से कोई संबंध नहीं था। प्रकरण क्रमांक 84 बरकुआं गांव के एक व्यक्ति के नाम दर्ज पाया गया।
प्रकरण क्रमांक 218 तो राजस्व रिकॉर्ड में अस्तित्व में ही नहीं मिला। बताया गया कि उस अवधि में 138 से आगे कोई प्रकरण दर्ज ही नहीं हुआ था। यानी जिन आदेशों के सहारे जमीनों का नामांतरण हुआ, वे रिकॉर्ड में कहीं मौजूद ही नहीं हैं।
खसरे में बढ़ा दी जमीन, 5.24 हेक्टेयर से पहुंच गई 7.9 हेक्टेयर
मामले का सबसे हैरान करने वाला पहलू यह है कि सर्वे नंबर 411 का मूल रकबा 5.24 हेक्टेयर था, लेकिन वर्तमान रिकॉर्ड में सात लोगों के नाम कुल 7.9 हेक्टेयर जमीन दर्ज है। यानी कागजों में ही करीब 2.66 हेक्टेयर अतिरिक्त जमीन पैदा कर दी गई। इस खुलासे ने राजस्व तंत्र की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
राजनीतिक घमासान तेज
कांग्रेस विधायक सुरेश राजे ने कहा कि पिछले साल उनका प्रश्न विधानसभा में चर्चा के लिए नहीं आ सका था, लेकिन लिखित जवाब में कई तथ्य सामने आए हैं। उन्होंने सवाल उठाया कि इतने बड़े मामले में अब तक कार्रवाई क्यों नहीं हुई और जुलाई सत्र में वह फिर यह मुद्दा विधानसभा में उठाएंगे।
वहीं करैरा विधायक रमेश खटीक ने कहा कि यदि कोई प्रश्न लगाया गया है तो उसका जवाब प्रशासन देगा। उन्होंने कहा कि बेटे को जमीन की जानकारी होगी, उसी से पूछा जाना चाहिए।
बेटे का दावा- जमीन खरीदी थी, फर्जी पट्टे की जानकारी नहीं
विधायक पुत्र चेतन खटीक ने कहा कि उन्होंने यह जमीन जगदीश नामक व्यक्ति से खरीदी थी और विधिवत रजिस्ट्री कराई थी। पेट्रोल पंप के लिए एनओसी भी मांगी गई थी और एनओसी न मिलने पर हाईकोर्ट में मामला दायर किया गया है। उन्होंने कहा कि जमीन के पट्टे फर्जी होने की जानकारी उन्हें नहीं है। यहां एक सवाल का जन्म होता है कि जमीन की एनओसी नहीं मिली तो कारण भी स्पष्ट हुआ होगा,अगर विधायक पुत्र के साथ फर्जीवाड़ा हुआ है,जगदीश नामक व्यक्ति ने जमीन को बेचा था तो विधायक पुत्र चेतन खटीक ने पुलिस में शिकायत दर्ज क्यों नहीं कराई और यह जगदीश नामक व्यक्ति कौन है इसकी क्या प्रोफाइल है,अगर विधायक पुत्र क्लीन है तो इस व्यक्ति की पुलिस में शिकायत करे और इसकी प्रोफाइल को पब्लिक के सामने जारी करे।
कलेक्टर स्तर पर फैसला होगा
करैरा एसडीएम अनुराग निंगवाल के अनुसार मामले की फाइल कलेक्टर के पास है और अंतिम निर्णय जिला स्तर पर लिया जाएगा।
अब सवाल यह है कि यदि आदेश फर्जी थे तो करोड़ों की सरकारी जमीन आखिर निजी नामों पर कैसे दर्ज हो गई? और यदि फर्जीवाड़ा हुआ है तो इसके जिम्मेदार कौन हैं? इन सवालों के जवाब आने वाले दिनों में प्रशासनिक और राजनीतिक दोनों मोर्चों पर बड़ा असर डाल सकते हैं।

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