शिवपुरी। शहर के बहुचर्चित उत्कर्ष शिवहरे आत्महत्या मामले में हर दिन एक नई और चौंकाने वाली परत सामने आ रही है। इस हाई-प्रोफाइल सुसाइड मिस्ट्री ने अब एक ऐसा खतरनाक कानूनी मोड़ ले लिया है, जिसने आरोपियों को पूरी तरह बैकफुट पर ला दिया है। जमानत की जल्दबाजी में आरोपी पत्नी और उसके परिवार ने कथित तौर पर एक ऐसा फर्जीवाड़ा रच डाला, जिसने सीधे तौर पर माननीय न्यायालय की आंखों में धूल झोंकने की कोशिश की। लेकिन, कोतवाली पुलिस की पैनी नजरों और तीसरी आंख (CCTV) ने इस पूरे खेल का भंडाफोड़ कर दिया है।
क्या था पूरा मामला ?
याद दिला दें कि शादी के महज एक साल बाद, बीती 19 अप्रैल 2026 को उत्कर्ष शिवहरे ने मौत को गले लगा लिया था। इस दर्दनाक कदम के बाद फिजिकल थाना पुलिस ने उत्कर्ष की पत्नी रिया शिवहरे, ससुर जितेंद्र शिवहरे और साले ध्रुव शिवहरे समेत अन्य ससुराल वालों पर आत्महत्या के लिए उकसाने (Abetment to Suicide) का संगीन मामला दर्ज किया था।
मास्टरस्ट्रोक पड़ा उलटा:रची गई भोपाल पुलिस की फर्जी कहानी
खुद को जेल की सलाखों से बचाने के लिए आरोपियों ने कोर्ट में एक बड़ा दांव खेला। जमानत याचिका के साथ उन्होंने एक ऐसा दस्तावेज पेश किया, जिसे वो अपना सबसे बड़ा सुरक्षा कवच मान रहे थे। आरोपियों का दावा था कि जिस दिन उत्कर्ष ने आत्महत्या की, ठीक उसी दिन सुबह 10:15 बजे पत्नी रिया शिवहरे अपने ससुराल पक्ष की प्रताड़ना की शिकायत दर्ज कराने भोपाल के गौतम नगर थाने में मौजूद थी। आरोपी यह साबित करना चाहते थे कि घटना के वक्त रिया मौके पर नहीं, बल्कि पुलिस के पास थी।
सीसीटीवी कैमरे ने उतार दिया झूठ का नकाब
न्यायालय में पेश किए गए इस अल्टीमेट दस्तावेज की जब पुलिस ने बारीकी से पड़ताल शुरू की, तो पूरी कहानी ताश के पत्तों की तरह ढह गई। कोतवाली पुलिस की एक टीम जब सच जानने भोपाल के गौतम नगर थाने पहुंची, तो वहां की हकीकत कुछ और ही निकली:
गायब थे साक्ष्य: जिस वक्त रिया ने थाने में होने का दावा किया था, उस समय के CCTV फुटेज खंगाले गए तो पूरी स्क्रीन साफ थी; रिया शिवहरे वहां कहीं नजर नहीं आई। अधिकारियों के बयान पलटे:पुलिस रिकॉर्ड और वहां तैनात अधिकारियों के बयानों में जमीन-आसमान का अंतर मिला। साफ हो गया कि जमानत पाने के लिए थाने की फर्जी मुहर या कूट रचित (Forged) कागजात तैयार कर अदालत को गुमराह करने की एक सोची-समझी साजिश रची गई थी।
अब 5 आरोपियों पर बढ़ा कानूनी शिकंजा
अदालत के साथ जालसाजी का यह खेल सामने आते ही कोतवाली पुलिस ने कड़ा रुख अख्तियार कर लिया है। अब पुलिस ने केवल आत्महत्या का मामला ही नहीं, बल्कि धोखाधड़ी का नया जाल भी आरोपियों के इर्द-गिर्द बुन दिया है। पुलिस ने रिया शिवहरे, जितेंद्र शिवहरे, ध्रुव शिवहरे, गीता शिवहरे और रियम शिवहरे के खिलाफ **भारतीय न्याय संहिता (BNS)** की विभिन्न गंभीर धाराओं के तहत जालसाजी का नया मुकदमा दर्ज कर लिया है।

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