कोलारस। शिवपुरी जिले के कोलारस अनुविभाग के तेंदुआ थाना क्षेत्र अंतर्गत आने वाले किलाऊनी गांव में शनिवार को सांप के काटने से 40 वर्षीय युवक की मौत हो गई। बताया जा रहा है कि सर्पदंश के बाद परिजनों ने तत्काल अस्पताल ले जाने के बजाय झाड़फूंक का सहारा लिया। इसी दौरान बहुमूल्य समय निकल गया और जब युवक को मेडिकल कॉलेज लाया गया, तब तक काफी देर हो चुकी थी। डॉक्टरों ने जांच के बाद उसे मृत घोषित कर दिया।
जानकारी के अनुसार किलाऊनी गांव निवासी हरिचरण धाकड़ उम्र 40 साल शनिवार को अपने घर के बाहर नाली की सफाई कर रहे थे। बारिश के मौसम में नालियों और झाड़ियों में सांपों का निकलना आम बात है। इसी दौरान नाली के पास छिपे एक जहरीले सांप ने अचानक हरिचरण की उंगली पर डंक मार दिया।
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार सांप के काटते ही हरिचरण ने घबराकर हाथ झटका, जिससे सांप दूर जा गिरा और मौके से निकल गया। शुरुआत में परिजनों को लगा कि स्थिति सामान्य है, लेकिन कुछ ही समय बाद हरिचरण की तबीयत बिगड़ने लगी। उन्हें चक्कर आने लगे और शरीर में विष का असर दिखाई देने लगा।
अस्पताल की जगह झाड़फूंक का सहारा
परिजनों ने तुरंत चिकित्सकीय उपचार लेने के बजाय गांव में झाड़फूंक और पारंपरिक उपायों का सहारा लिया। काफी देर तक यह प्रयास चलता रहा, लेकिन हरिचरण की हालत में कोई सुधार नहीं हुआ। उल्टा उनकी स्थिति लगातार गंभीर होती चली गई। जब परिजनों को स्थिति की गंभीरता का एहसास हुआ, तब वे उन्हें लेकर शिवपुरी मेडिकल कॉलेज पहुंचे। लेकिन तब तक जहर शरीर में पूरी तरह फैल चुका था। मेडिकल कॉलेज में मौजूद डॉक्टरों ने जांच के बाद हरिचरण को मृत घोषित कर दिया।
परिवार में छाया मातम
घटना के बाद पूरे परिवार में मातम का माहौल है। हरिचरण की असमय मौत से परिजन सदमे में हैं। गांव में भी इस घटना को लेकर शोक का माहौल बना हुआ है। ग्रामीणों का कहना है कि यदि समय रहते उन्हें अस्पताल पहुंचाया जाता तो शायद उनकी जान बचाई जा सकती थी।
विशेषज्ञों की सलाह: सर्पदंश पर तुरंत अस्पताल जाएं
स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि सांप के काटने की स्थिति में झाड़फूंक या घरेलू उपचार पर भरोसा करना जानलेवा साबित हो सकता है। सर्पदंश के बाद मरीज को जल्द से जल्द नजदीकी अस्पताल पहुंचाकर एंटी-स्नेक वेनम उपचार दिलाना ही जीवन बचाने का सबसे प्रभावी तरीका है। हर वर्ष ग्रामीण क्षेत्रों में अंधविश्वास और इलाज में देरी के कारण कई लोगों की जान चली जाती है।
किलाऊनी गांव की यह घटना एक बार फिर यह संदेश देती है कि सर्पदंश जैसी आपात स्थिति में समय पर चिकित्सा ही सबसे बड़ा उपचार है, जबकि झाड़फूंक के भरोसे रहना जान के लिए खतरा बन सकता है।

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