शिवपुरी। शिवपुरी के होमगार्ड कार्यालय में मंगलवार को उस समय हड़कंप मच गया, जब एक महिला सैनिक ने दफ्तर के भीतर ही सुसाइड नोट लिख डाला। नोट में उसने विभागीय प्रताड़ना, मानसिक दबाव और अपमानजनक व्यवहार का जिक्र करते हुए आत्महत्या करने की इच्छा जाहिर की। घटना के बाद महिला सैनिक की हालत बिगड़ गई और परिजन तत्काल उन्हें अस्पताल लेकर पहुंचे। इस पूरे घटनाक्रम ने न सिर्फ होमगार्ड विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए हैं, बल्कि महिला कर्मचारियों की सुरक्षा और सम्मान को लेकर भी गंभीर बहस छेड़ दी है।
11 बजे पहुंची थी, फिर भी गैरहाजिर लगा दिया
होमगार्ड कार्यालय में पदस्थ महिला सैनिक अंजलि भदौरिया ने आरोप लगाया कि वह मंगलवार सुबह तय समय पर 11 बजे ड्यूटी पर पहुंच गई थीं। उस समय वह कार्यालय में रोजनामचा भर रही थीं, लेकिन 11 बजकर 16 मिनट पर उन्हें गैरहाजिर दर्ज कर दिया गया। अंजलि का कहना है कि यह पहली बार नहीं हुआ। इससे पहले भी कई बार जानबूझकर उनकी अनुपस्थिति दर्ज की गई, जिससे उन्हें मानसिक रूप से प्रताड़ित किया जा रहा है।
उन्होंने बताया कि उनकी नियुक्ति अनुकंपा आधार पर हुई थी और वह पिछले तीन वर्षों से होमगार्ड कार्यालय में सेवाएं दे रही हैं। लेकिन अब हालात ऐसे बन गए हैं कि नौकरी उनके लिए सम्मान नहीं बल्कि तनाव का कारण बन गई है।
ड्यूटी 4 बजे खत्म, लेकिन 7 बजे तक रुकने का दबाव
महिला सैनिक ने प्लाटून कमांडेंट राघवेंद्र हाकरे पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि उनसे रोजाना कार्यालय आने और जाने की व्यक्तिगत जानकारी देने के लिए दबाव बनाया जाता है। अंजलि के अनुसार उनकी ड्यूटी का समय सुबह 11 बजे से शाम 4 बजे तक निर्धारित है, लेकिन उनसे अक्सर शाम 7 बजे तक कार्यालय में रुकने को कहा जाता है। उन्होंने आरोप लगाया कि इस बात का विरोध करने पर उन्हें मानसिक रूप से परेशान किया जाता है और गैरहाजिरी जैसी कार्रवाई कर दबाव बनाया जाता है।
पानी और शौचालय तक की व्यवस्था नहीं
महिला सैनिक ने सिर्फ व्यवहारिक प्रताड़ना ही नहीं, बल्कि कार्यालय की बदहाल व्यवस्थाओं को भी उजागर किया। उन्होंने बताया कि होमगार्ड कार्यालय में पीने के पानी और शौचालय जैसी मूलभूत सुविधाएं तक उपलब्ध नहीं हैं। स्थिति यह है कि कर्मचारियों को घर से पानी लेकर आना पड़ता है। कई बार शिकायत करने के बावजूद व्यवस्थाओं में कोई सुधार नहीं हुआ। इस खुलासे के बाद सवाल उठ रहे हैं कि सुरक्षा और अनुशासन का दावा करने वाले विभाग के अपने कार्यालयों में ही यदि बुनियादी सुविधाएं नहीं हैं, तो कर्मचारियों की कार्यस्थितियां कैसी होंगी।
दूसरे कर्मचारी ने भी खोली विभाग की पोल
इसी कार्यालय में एसडीईआरएफ में कार्यरत भरत राठौर ने भी विभागीय लापरवाही पर नाराजगी जताई। उन्होंने कहा कि पिछले तीन वर्षों से उन्हें यात्रा भत्ता (टीए) तक नहीं मिला है। भरत का कहना है कि उन्होंने कई बार वरिष्ठ अधिकारियों से शिकायत की, लेकिन हर बार सिर्फ आश्वासन मिला। कर्मचारियों की समस्याएं सुनने वाला कोई नहीं है।
फोन नहीं उठाया, अधिकारी बोले- जांच होगी
पूरा मामला सामने आने के बाद प्लाटून कमांडेंट राघवेंद्र हाकरे से संपर्क करने का प्रयास किया गया, लेकिन उन्होंने फोन रिसीव नहीं किया। वहीं जिला कमांडेंट जितेंद्र त्रिपाठी ने कहा कि महिला सैनिक की शिकायत गंभीर है। मामले की जांच कर उनकी समस्याओं का समाधान कराया जाएगा।
हालांकि सवाल यह भी उठ रहा है कि यदि एक महिला सैनिक को अपनी बात सुनाने के लिए सुसाइड नोट लिखने जैसा कदम उठाना पड़े, तो विभागीय तंत्र आखिर किस स्तर पर काम कर रहा है। शहर में इस घटना को लेकर चर्चा तेज है। लोग सवाल कर रहे हैं कि जो विभाग आपदा और सुरक्षा में जनता की मदद करता है, वहां यदि अपने ही कर्मचारी मानसिक दबाव में जी रहे हैं, तो यह व्यवस्था के लिए गंभीर चेतावनी है।

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