शिवपुरीं। नरवर जनपद की ग्राम पंचायत सुनारी की महिला सरपंच रामश्री मांझी पर आरोप लगा है कि उन्होंने फर्जी जाति प्रमाण पत्र का सहारा लेकर चुनाव जीता। मामला सीधे तौर पर आदिवासी आरक्षित सीट पर ओबीसी वर्ग द्वारा कब्जा करने के सनसनीखेज दावे से जुड़ा है,इस मामले की शिकायत कलेक्टर शिवपुरी से की गई हैं।
पति के नाम का खेल और बदल गई जाति?
ग्राम सुनारी के निवासी श्रीनिवास रावत ने शुक्रवार को सीधे कलेक्टर के दरबार में पहुंचकर इस पूरे खेल का पर्दाफाश करने की मांग की। शिकायतकर्ता का दावा है कि सरपंच साहिबा की असली जाति केवट (अन्य पिछड़ा वर्ग - OBC) है। आरोप है कि उन्होंने बेहद शातिराना अंदाज में अपने पति के नाम का इस्तेमाल करते हुए खुद को मांझी (आदिवासी) दर्शाया और इसी कागजी हेरफेर के दम पर साल 2022 के पंचायत चुनाव में आदिवासी आरक्षित सीट से किस्मत आजमाई और सरपंच की कुर्सी हथिया ली।
पिता नहीं, पति के नाम पर बना सर्टिफिकेट
शिकायत की तह में जाएं तो यह जाति प्रमाण पत्र 15 जनवरी 2013 को ग्वालियर जिले की राजा की मंडी तहसील से जारी होना बताया गया है। नियमों की धज्जियां उड़ाने का आरोप लगाते हुए श्रीनिवास ने कहा कि नियमतः जाति प्रमाण पत्र पिता के नाम और वंशावली के आधार पर बनता है, लेकिन यहां तो पूरा का पूरा सर्टिफिकेट ही पति के नाम पर तैयार करवा लिया गया, जो नियमों के बिल्कुल विपरीत है।
अब गेंद प्रशासन के पाले में है। शिकायतकर्ता ने कलेक्टर से सरपंच के तमाम दस्तावेजों की बारीकी से जांच कर कानूनी कार्रवाई की मांग की है। हालांकि, इस पूरे मामले पर फिलहाल प्रशासनिक अधिकारियों ने चुप्पी साध रखी है और जांच के बाद ही सच सामने आने की बात कही जा रही है। देखना दिलचस्प होगा कि क्या सरपंच साहिबा की कुर्सी सलामत रहती है या फर्जीवाड़े के आरोपों में वह घिर जाती हैं।

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