नौतपा मे तपेगा शिवपुरी, मौसम विभाग का येलो अलर्ट जारी, यह है आध्यात्मिक और वैज्ञानिक कारण

vikas
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शिवपुरी। शिवपुरी जिले में गर्मी अब अपने रौद्र रूप में पहुंचती नजर आ रही है। आज सोमवार से नौतपा की शुरुआत होते ही मौसम विभाग ने एक दिन पूर्व ही जिले में भीषण गर्मी और लू का यलो अलर्ट जारी कर दिया है। आने वाले पांच दिनों में तापमान 43 डिग्री सेल्सियस से ऊपर पहुंचने की संभावना जताई गई है। रविवार को ही शहर का अधिकतम तापमान 42 डिग्री और न्यूनतम तापमान 30 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया, जिससे दिन और रात दोनों ही लोगों के लिए मुश्किल भरे रहे।

सुबह 11 बजे से ही सूरज की तपिश इतनी तेज हो गई कि दोपहर होते-होते शहर की सड़कें सूनी नजर आने लगीं। माधव चौक, कोर्ट रोड, अस्पताल चौराहा और बाजार क्षेत्र में आम दिनों की तुलना में आवाजाही बेहद कम दिखाई दी। गर्म हवाओं और लू के थपेड़ों ने लोगों को घरों में कैद रहने पर मजबूर कर दिया। शाम ढलने के बाद भी राहत नहीं मिली और रात 8 बजे तक गर्म हवा चलती रही। देर रात 11 बजे तक पंखे और कूलर भी लोगों को राहत देने में नाकाम नजर आए।

मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार नौतपा के 
दौरान सूर्य की किरणें अधिक तीव्रता के साथ धरती पर पड़ती हैं, जिससे गर्मी अपने चरम पर पहुंच जाती है। मौसम वैज्ञानिक प्रवेंद्र कुमार ने बताया कि इस अवधि में सूर्य कर्क रेखा की ओर बढ़ता है और उसकी किरणें लगभग सीधी पड़ने लगती हैं। इसी कारण तापमान तेजी से बढ़ता है और लू का असर अधिक महसूस होता है। हालांकि 29 और 30 मई को आंशिक बादल छाने की संभावना जताई गई है, जिससे तापमान में कुछ कमी आ सकती है।

क्या है नौतपा का वैज्ञानिक कारण ?
वैज्ञानिक दृष्टि से नौतपा वह समय होता है जब सूर्य पृथ्वी के उत्तरी गोलार्ध की ओर बढ़ते हुए कर्क रेखा के समीप पहुंचता है। इस दौरान सूर्य की किरणें भारत के मध्य भागों पर लगभग सीधी पड़ती हैं। सीधी किरणों के कारण धरती अधिक गर्म होती है और तापमान तेजी से बढ़ता है। हवा में नमी कम होने से लू चलती है और वातावरण शुष्क हो जाता है। यही कारण है कि मई के अंतिम दिनों में गर्मी सबसे ज्यादा महसूस होती है।

नौतपा का आध्यात्मिक महत्व भी खास
भारतीय सनातन परंपरा में नौतपा को सिर्फ मौसम परिवर्तन नहीं, बल्कि प्रकृति के शुद्धिकरण का काल माना जाता है। मान्यता है कि इन नौ दिनों की प्रचंड गर्मी धरती, वातावरण और जीव-जंतुओं में मौजूद अशुद्धियों को समाप्त करती है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार नौतपा जितना तीखा होता है, उतनी ही अच्छी बारिश और कृषि उत्पादन की संभावना मानी जाती है। ग्रामीण क्षेत्रों में आज भी कहा जाता है कि “नौतपा तपेगा तो सावन बरसेगा।”

ज्योतिषीय दृष्टि से भी सूर्य को ऊर्जा, आत्मबल और जीवन का कारक माना गया है। इस दौरान सूर्य की उपासना, जल अर्पण और दान-पुण्य का विशेष महत्व बताया जाता है। कई लोग इस अवधि में सूर्य देव को अर्घ्य देकर स्वास्थ्य और ऊर्जा की कामना करते हैं।

मौसम विभाग ने नागरिकों को दोपहर के समय अनावश्यक रूप से बाहर न निकलने, अधिक पानी पीने, हल्के सूती कपड़े पहनने और लू से बचाव के उपाय अपनाने की सलाह दी है। प्रशासन भी लगातार मौसम पर नजर बनाए हुए है और स्वास्थ्य विभाग को सतर्क रहने के निर्देश दिए गए हैं।

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