शिवपुरी। मध्य प्रदेश के दमोह जिले में संजीवनी क्लीनिकों में फर्जी डॉक्टरों की नियुक्ति के सनसनीखेज खुलासे के बाद अब शिवपुरी जिले में भी वैसा ही बड़ा मुन्नाभाई घोटाला सामने आने की आशंका गहरा गई है। शिवपुरी मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (CMHO) ने डॉक्टरों की डिग्रियों की जांच के लिए कमेटी का गठन किया, वैसे ही स्वास्थ्य महकमे में हड़कंप मच गया। बदनामी और कानूनी कार्रवाई के डर से एक डॉक्टर आनन-फानन में इस्तीफा देकर अंडरग्राउंड हो गया है, जबकि एक अन्य डॉक्टर बहाने बनाकर लंबी छुट्टी पर चला गया है।
दमोह के खुलासे के बाद भोपाल से आए सख्त निर्देश
मध्यप्रदेश के दमोह में हुए बड़े खुलासे के बाद पूरे मध्य प्रदेश के स्वास्थ्य विभाग में खलबली मची हुई है। शासन के सख्त रुख को देखते हुए शिवपुरी CMHO डॉ. संजय ऋषिश्वर ने बिना वक्त गंवाए 19 मई को एक हाई-लेवल तीन सदस्यीय जांच कमेटी का गठन किया। इस टीम में डॉ. हेमंत मंडेलिया, डॉ. प्रदीप शर्मा, डॉ. अनीता पाल और डॉ. लाल जू शाक्य जैसे वरिष्ठ चिकित्सा अधिकारियों को शामिल किया गया है। कमेटी का काम जिले के सभी संजीवनी क्लीनिकों में तैनात डॉक्टरों के भर्ती दस्तावेजों और उनकी मेडिकल डिग्रियों का बारीकी से परीक्षण करना है।
जांच बैठते ही डॉक्टरों के छूटे पसीने, मोबाइल किए बंद
कमेटी बनने की भनक लगते ही संजीवनी क्लीनिकों में सेवाएं दे रहे डॉक्टरों के बीच हड़कंप मच गया। इसके बाद जो घटनाक्रम सामने आया, उसने दाल में कुछ काला होने के बजाय पूरी दाल ही काली होने का शक पैदा कर दिया है:
इस्तीफा देकर गायब हुआ यह डॉक्टर
मनियर संजीवनी केंद्र पर 10 फरवरी 2026 से पदस्थ डॉ. आकाश चांदेलकर ने जांच कमेटी बनने के ठीक अगले दिन यानी 20 मई को अपना इस्तीफा सौंप दिया। इस्तीफा देने के बाद से ही डॉक्टर साहब का मोबाइल फोन लगातार स्विच ऑफ आ रहा है और उनका कोई अता-पता नहीं है।
डायरिया का बहाना बनाकर अवकाश लेकर हुए गायब
हवाई पट्टी स्थित मुख्यमंत्री संजीवनी क्लीनिक पर 13 फरवरी को पदस्थ हुए डॉ. मोहर सिंह भी जांच के घेरे में हैं। उन्होंने प्रभारी डॉ. अनीता पाल को मौखिक रूप से बताया कि घर में किसी की गमी (मौत) हो गई है और वे जा रहे हैं। जबकि 22 मई को भेजे गए अपने 7 दिनों के लिखित अवकाश आवेदन में उन्होंने बेटी को दस्त (डायरिया) होने का कारण बताया है। बयानों में इस विरोधाभास के बाद से वे भी ड्यूटी पर नहीं लौटे हैं।
यूनिवर्सिटी और मेडिकल कॉलेजों से खंगाला जाएगा रिकॉर्ड
CMHO डॉ. संजय ऋषिश्वर ने साफ कर दिया है कि जांच केवल कागजों तक सीमित नहीं रहेगी। जांच टीम को यदि किसी भी डॉक्टर के दस्तावेज या डिग्री पर जरा सा भी संदेह होता है, तो सीधे संबंधित यूनिवर्सिटी और मेडिकल कॉलेज से उसका ब्योरा (वेरीफिकेशन) मांगा जाएगा।
जिले में पहले से ही सुस्त है संजीवनी व्यवस्था
हैरानी की बात यह है कि जिले में कुल 7 संजीवनी क्लीनिक स्वीकृत हैं। इनमें से केवल 5 पर ही डॉक्टरों की पदस्थापना हो सकी थी, जबकि बैराड़ और शहर का करौंदी संजीवनी क्लीनिक लंबे समय से डॉक्टर विहीन हैं। अब बचे हुए 5 डॉक्टरों में से भी दो के संदेहास्पद आचरण के बाद स्वास्थ्य व्यवस्थाएं पूरी तरह चरमरा गई हैं।
परिक्षण मे फर्जीवाड़ा निकला तो होगी एफआईआर
शासन से निर्देश मिलते ही हमने 19 मई को जांच समिति गठित कर दी थी। इसके तुरंत बाद ही एक डॉक्टर बीमारी का बहाना बनाकर छुट्टी पर चले गए हैं और एक ने 20 मई को इस्तीफा दे दिया, जिनका फोन भी बंद है। यह स्थिति संदेहास्पद है। यदि जांच के दौरान किसी भी डॉक्टर के दस्तावेज या मेडिकल डिग्री फर्जी या त्रुटिपूर्ण पाई जाती है, तो हम बिना किसी रियायत के सीधे पुलिस में एफआईआर (FIR) दर्ज कराएंगे।" डॉ. संजय ऋषिश्वर, CMHO, शिवपुरी

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