शिवपुरी। एक तरफ शिवपुरी कलेक्टर अर्पित वर्मा के कड़े निर्देश हैं कि अवैध उत्खनन और परिवहन पर तुरंत हथौड़ा चलाया जाए। लेकिन दूसरी तरफ, सतनवाड़ा थाने की नाक के नीचे कानून की धज्जियां उड़ाने का एक ऐसा अनोखा और दुस्साहसिक मामला सामने आया है, जिसे सुनकर आप भी हैरान रह जाएंगे। यहाँ अवैध मिट्टी और कोपरा का काला कारोबार कोई चोरी-छिपे नहीं, बल्कि आधी रात को टैक्टरों पर फुल वॉल्यूम में डीजे जैसे गाने बजाकर सीना ठोककर किया जा रहा है!
जब इस गुंडागर्दी और शोर के खिलाफ एक जागरूक नागरिक और पत्रकार ने आवाज उठाई, तो माफिया ने उसे ही जान से मारने की धमकी दे डाली। इस पूरी वारदात का वीडियो अब सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है, जिसने पुलिस प्रशासन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
रात 12 बजे का हाईवोल्टेज ड्रामा
घटना 27 मई की रात करीब 11:30 से 12 बजे के बीच की है। सतनवाड़ा कला निवासी और शिवपुरी समाचार डॉट कॉम के रिपोर्टर राजेंद्र बाथम के घर के पास से मिट्टी और कोपरा से लदे ट्रैक्टर लगातार गुजर रहे थे। भीषण गर्मी और अघोषित बिजली कटौती से जनता पहले ही त्रस्त थी, ऊपर से सन्नाटे को चीरती ट्रैक्टरों के साउंड सिस्टम की कानफोड़ू आवाज ने लोगों की नींद हराम कर दी।
जब पत्रकार राजेंद्र बाथम ने ट्रैक्टर चालकों को टोकते हुए सिर्फ इतना कहा कि रात में इतनी तेज आवाज में डीजे मत बजाओ तो माफिया का पारा चढ़ गया। ट्रैक्टर चालक बदतमीजी पर उतर आए और उनके घर तक पहुंच कर धमकियां देने लगे। पत्रकार ने हिम्मत दिखाते हुए इस पूरे घटनाक्रम का वीडियो अपने मोबाइल में रिकॉर्ड कर लिया।
सब जगह पैसे बांटकर काम चल रहा है
वीडियो में माफिया की हेकड़ी साफ देखी जा सकती है। इसी दौरान मौके पर राकेश नाम का एक शख्स पहुंचा और फिल्मी विलेन के अंदाज में पत्रकार को धमकाते हुए बोला मशीन मेरी चल रही है! तू ज्यादा बड़ा नेता और पत्रकार बन रहा है क्या? सब जगह पैसे बांटकर यह काम चल रहा है! जब पत्रकार ने कहा कि कम से कम रात में तो आवाज कम रखो, तो आरोपी और भड़क गया और बोला उनको (चालकों को) बजाने दो, उनका टाइम पास हो रहा है!
थाने से चंद कदम दूर... फिर भी पहुंचने में लगा एक घंटा
हैरानी की बात यह है कि सतनवाड़ा थाना घटनास्थल से महज कुछ मीटर की दूरी पर है। पत्रकार ने तुरंत थाना प्रभारी सुनील सिंह राजपूत को फोन किया, वीडियो भेजा, लेकिन मुस्तैद पुलिस को मौके पर पहुंचने में आधा घंटा से अधिक का समय लग गया। हद तो तब हो गई जब पुलिस के सामने भी आरोपी राकेश के तेवर ढीले नहीं हुए। वह पुलिसकर्मियों के सामने भी सीना ठोककर यही कहता रहा कि पैसे बांटकर काम चला रहा हूं। बाद में पुलिस जवान नीरंजन गुर्जर ने जैसे-तैसे समझा-बुझाकर उसे वहां से हटाया।
बड़ा सवाल,सोती हुई जनता जाग गई, तो जागती पुलिस क्यों सोती रही?
जब ट्रैक्टरों के डीजे की आवाज रात के सन्नाटे में सोती हुई जनता को जगा सकती है, तो थाने में 24 घंटे ड्यूटी पर तैनात पुलिसकर्मियों के कान तक यह आवाज क्यों नहीं पहुंची ? क्या सतनवाड़ा में चल रहे इस अवैध उत्खनन को पुलिस का मूक संरक्षण प्राप्त है?
फिलहाल पत्रकार ने पुलिस को लिखित शिकायत देकर कार्रवाई की मांग की है। अब देखना यह है कि पैसे बांटकर काम चलाने का दावा करने वाले इस बेखौफ माफिया पर प्रशासन का बुलडोजर चलता है या फिर खाकी अपनी साख बचाने के लिए मामले को रफा-दफा कर देती है। यह पूरी जांच का विषय है।

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