शिवपुरी। शासन के नियमों को किस प्रकार से हवा में उड़ाया जा रहा है इसका प्रत्यक्ष प्रमाण शासकीय उ.मा.वि. सिरसौद में देखने को मिला। यहां शा.नवीन प्रा. विद्यालय शिवनगर में पदस्थ संविदा शिक्षक वर्ग-3 भास्कर जगा निवासी मुरैना ने बीती 08 सित बर 2015 को स्वेच्छा से अपने पद से त्याग पत्र देकर शासकीय सेवा से मुक्ति पा ली थी और उन्हें विधिवत यहां से हटा भी दिया गया था।
इसके बाद अचानक महज तीन माह बाद ही 7 दिस बर 2015 को शा.उ.मा.वि. सिरसौद के प्राचार्य डी.आर.कर्ण ने इस संविदा कर्मी को पुन: पदस्थी दे दी गई। यह नियुक्ति प्राचार्य ने संविदाकर्मी द्वारा दिए गए आवेदन के आधार पर की जिसमें संविदाकर्मी भास्कर जगा ने बताया कि जो त्यागपत्र उन्हेांने दिया था उस समय उनका मानसिक संतुलन बिगड़ गया था इसलिए यह गलती हो गई।
लेकिन इस गलती को अब प्राचार्य श्री कर्ण ने शासकीय नियमों को दरकिनार कर माफ कर दिया और विधिवत आदेश जारी कर विद्यालय के समस्त प्रभार भी इस संविदाकर्मी को सौंप दिए। यहां ना तो वरिष्ठ अधिकारियों को इस मामले से अवगत कराया गया और ना ही विभागीय आदेश जारी हुए।
बताया जाता है कि यह गोरख खेल सिरसौद के प्राचार्य द्वारा खेला गया जिसमें उन्होंने संविदाकर्मी को अपने ही आदेश के तहत नियुक्त कर पूरी शासकीय कार्य प्रणाली को ही कठघरे में ाड़ा कर दिया।
फर्जी डिग्री से डरा संविदाकर्मी, इसलिए दिया त्यागपत्र!
अटकलों पर गौर करें तो पता चलता है कि संविदाकर्मी भास्कर जगा ने जो नियुक्ति पाई है उसमें डीएड की अंकसूची शामिल की गई। सूत्रों की खबर है कि यह डिग्री फर्जी तरीके से हासिल की गई और नियुक्ति के समय यह डीएड की अंकसूची जनपद पंचायत नियोक्ता में जमा है जिसकी जांच भी प्रचलित है।
चूंकि व्यापमं घोटाले को लेकर कई मासूम शिक्षक ना केवल बर्खास्त हुए बल्कि उन्हें सजा तक हो गई। ऐसे में यह कार्यवाही कहीं इस संविदाकर्मी पर ना हो जाए इसे लेकर संविदाकर्मी ने स्वयं ही इस्तीफा देकर बचने की कोशिश की है। यह मामला आज पूरे शिक्षा विभाग में चर्चा का विषय बना रहा।
इनका कहना है-
यदि कोई शिक्षक सेवा समाप्ति के लिए आवेदन देता है और पुन: नियुक्ति की जाती है तो यह निर्णय जिला शिक्षाधिकारी को लेना होता है।
श्रीमती नीतू माथुर
अपर कलेक्टर, प्रभारी सीईओ, जिला पंचायत शिवपुरी

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