शिवपुरी। काम व रुपयों की तंगी से जूझ रहे कुछ सहरिया आदिवासी अपने ही बच्चों से बंधुआ मजदूरी करा रहे हैं। शिवपुरी ब्लॉक के सीर और बांसखेड़ी ग्राम के करीब 10 बच्चे,10-13 साल के ऐसे हैं, जो गांव के रसूखदारों के यहां बधुंआगिरि कर रहे है।
इसके एवज में इन बच्चों के माता-पिता हर महीने व प्रति तीन महीने में छह हजार रुपए ले आते हैं। गंभीर बात यह है कि आदिवासियों के लिए काम कर रही समाजसेवी संस्था सहरिया जन गठबंधन कलेक्टर-एसडीएम से भी शिकायत कर कर चुके हैं अफसरों ने कोई कार्रवाई नहीं की।
जिले में 21 बाल श्रम विद्यालय चल रहे हैं। लेकिन सबके सब कागजों में संचालित हो रहे हैं। एक भी स्कूल कहीं भी खुल नहीं रहा है। और जो स्कूल खुल भी रहा तो उसमें बच्चे होते ही नहीं हैं।
यहां 1500 बच्चों को शिक्षा मुहैया कराने की बात की जा रही है। जबकि शहर में 5 से 14 वर्ष तक के सैकडों बच्चे दिनभर मजदूरी ही करते देखे जा सकते हैं।
12 मई को की थी शिकायत
सहरिया जन गठबंधन ने इस मामले में पहले एसडीएम को शिकायत की थी। शिकायत में बच्चों के नाम और उनके पिता के नाम के साथ-साथ जिस क्षेत्र में बच्चों को बंधक बना कर काम कराया जा रहा है उसका भी जिक्र किया गया है।
एसडीएम ने नहीं सुनी तो 10 जुलाई को कलेक्टर को शिकायत सहरिया जनगठबंधन ने 10 जुलाई को कलेक्टर को आवेदन देकर मासूमों को बचाने की गुहार लगाई थी। लेकिन तब से लेकर अब तक इस मामले में कलेक्टर स्तर से भी कोई कार्रवाई नहीं हुई है।
दबंगों के यहां काम कर रहे बच्चे
बच्चों के माता पिता ने इन बच्चों को यहां 6 हजार में गिरवी रख दिया है।भूसा फैक्ट्री के अलावा गांव के दबंगों के यहां भी बच्चे बंधुआ मजदूरी कर रहे हैं।
प्रदीप तोमर,सहरिया जन गठबंधन कोऑर्डिनेटर शिवपुरी

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