शिवपुरी। जन-जन की आस्था के केन्द्र बिनैगा आश्रम पर कल 6 जनवरी को प्रतिवर्ष की भांति इस वर्ष भी परमहंस संत नन्हे महाराज जी की स्मृति में वार्षिक भण्डारा और सत्संग का भव्य कार्यक्रम आयोजित हुआ। सुबह 10 बजे से विशाल भण्डारा शुरू हो गया।
जिसमें शिवपुरी शहर सहित आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों के 50 हजार से अधिक भक्तों ने देर शाम तक प्रसाद ग्रहण किया। वहीं दोपहर 3 बजे से बिनैगा आश्रम पर सत्संग की गंगा बही जिसमें मु य रूप से बिनैगा आश्रम के प्रमुख संत बज्रानंद जी ने अपने प्रवचनों में बताया कि वाणी से ही सज्जन और दुर्जन की पहचान होती है।
उन्होंने अहंकार को सबसे बड़ा आंतरिक शत्रु बताते हुए कहा कि बाहरी शत्रु जितना नुकसान नहीं पहुंचा सकते उससे कई गुना अधिक नुकसान आंतरिक शत्रु पहुंचाते हैं। जिनमें अहंकार प्रमुख है। विनम्रता सज्जनों की पहचान है। जबकि अहंकार दुर्जनों की निशानी है और ईश्वर के दरबार में प्रवेश के लिए अहंकार मुक्त होना अत्यंत आवश्यक है।
बिनैगा आश्रम की स्थापना परमहंस संत अडग़ड़ानंद जी महाराज के सुशिष्य नन्हे महाराज ने लगभग 25 वर्ष पूर्व शिवपुरी को कर्मस्थली बनाकर की थी। उनके देवलोक होने के बाद आश्रम की बाग डोर संत बज्रानंद जी के कुशल हाथों में आई और उनके नेतृत्व में बिनैगा आश्रम सत्संग का एक प्रमुख केन्द्र बना और इसका समयानुसार विस्तार भी हुआ।
प्रतिवर्ष जनवरी माह में नन्हे महाराज जी की स्मृति में आश्रम पर भण्डारे का आयोजन होता है। इस भण्डारे में संत अडग़ड़ानंद जी सहित देश के विभिन्न भागों से पधारे संतगण अपनी आध्यात्मिक रश्मियों से भक्तगणों को आलोकित करते हैं।
लेकिन इस वर्ष संत अडग़डानंद जी महाराज का आश्रम में आगमन नहीं हुआ और सत्संग की बागडोर संत बज्रानंद जी ने संभाली। वार्षिक भण्डारे में देश के विभिन्न प्रांतों के लोग भी शामिल हुए और उन्होंने अपनी गरिमा पूर्ण उपस्थिति दर्ज कराई।

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