शिवपुरी। कठमई में सड़क निर्माण का भूमि पूजन करने गईं यशोधरा राजे सिंधिया का वह पुराना भावुक अंदाज इस बार फिर नजर आया जिसमें वह पूर्ण अपनत्व भाव और पारिवारिक अंदाज में बातचीत कर अपनी अलग छाप छोड़ती रहीं है।
आज के दौरे में उन्होंने आदिवासी महिलाओं और बच्चों से बातचीत कर उन्हें मोहित और मंत्र मुग्ध कर दिया। आदिवासी महिलाओं और बच्चियों ने उनके स्वागत और स मान में पलक पावड़े बिछा दिये। वहीं दूसरी ओर उनके समक्ष फरमाईशों की फेहरिस्त लगा दी।
यशोधरा राजे का जवाब रहा कि एक-एक कर आपकी सब समस्यायें पूर्ण होंगी। राशन भी मिलेगा और कुटीरें भी बनेंगी। आज के एपीसोड में उनके नेतृत्व का गुण एकाएक उभर कर सामने आया और स्पष्ट हुआ कि उनकी नेतृत्व क्षमता का कोई मुकाबला नहीं है।
हुआ यह कि सड़क निर्माण के भूमि पूजन के बाद जब वहां के दो ग्रामीणों ने स्वागत किया तो यशोधरा राजे ने शिकायत करते हुए कहा कि पहले आई थी तो पानी लेकर आई थी आज सड़क लेकर आई हूं, लेकिन क्या सिर्फ दो ही ग्रामीण आये हैं।
इस पर उनका ध्यान खींचते हुए महिलाओं और बच्चों के समूह की ओर आकर्षित किया गया तो यशोधरा राजे के कदम खुद व खुद उस ओर बढ़ गए जहां बड़ी सं या में गरीब निरक्षर आदिवासी महिलायें और बच्चियां बैठी हुई थी। यशोधरा राजे ने उनसे पूछा कि पहले में क्या लेकर आई थी तो जवाब आया कि पानी लेकर आई थी।
इस पर यशोधरा राजे ने कहा कि इस बार सड़क लेकर आई हूं। तपाक से वृद्ध महिला ने कहा कि उन्हें राशन नहीं मिलता तो यशोधरा राजे ने कहा कि अब मिलेगा। इसके साथ ही उन्होंने अपने पीए को निर्देश दिया कि वह देखे कि इस महिला को राशन क्यों नहीं मिल रहा। फिर एक महिला ने कहा कि कुटीर चाहिये।
तो इस पर हंसते हुए यशोधरा राजे ने कहा कि एक साथ सब समस्यायें हल कराओगी कि क्या। फिर स्वयं ही कहा कि कुटीरें भी मिलेंगी। फिर यशोधरा राजे ने एक बालिका से पूछा कि वह पढ़ाई करती है कि नहीं इस पर उक्त बालिका चुप्पी साध गई। उसके पास की अन्य बालिकायें भी कुछ नहीं बोली।
इस पर यशोधरा राजे ने महिलाओं से पूछा कि क्या उनकी बच्चियां नहीं पढ़ती है। तो जवाब आया कि आठवीं के बाद उन्हें घर बैठा दिया गया है। इस पर यशोधरा राजे ने अफसोस जाहिर किया और कलेक्टर से कहा कि वह देखें कि किस तरह से बच्चियों को स्कूल ले जाया जा सकता है।

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