शिवपुरी। आज सुबह कोतवाली थाना क्षेत्र के छोटी नौहरी गांव में दो पक्षों के बीच उधारी के पैसे मांगने पर बबाल खड़ा हो गया। इस घटना में जमकर गोलियां चलीं जिससे एक महिला और उसका पति गंभीर रूप से घायल हो गए जिन्हें इलाज के लिए ग्वालियर रैफर किया गया है।
जबकि पांच लोगों का जिला अस्पताल में इलाज चल रहा है। फिलहाल पुलिस ने इस मामले की जांच में जुटी हुई। समाचार लिखे जाने तक पुलिस ने कोई भी कार्रवाई नहीं की।
घटना में घायल हुए धीरज ओझा ने जानकारी देते हुए बताया कि छोटी नौहरी में उसकी परचूनी की दुकान स्थित है जहां गणेश कुशवाह ने उसकी दुकान से कुछ सामान उधार लिया था जिसके पैसे उसने वापस नहीं लौटाए।
आज सुबह जब गणेश से उधारी के 550 रूपये मांगे तो उसने गालियां देनी शुरू कर दीं। बाद में गणेश के साथ घनश्याम कुशवाह, त तसिंह कुशवाह, छिग्गा कुशवाह, रघुवीर, नेतू सहित 20 लोग हथियारों से लैस होकर दुकान पर आ गए और मारपीट शुरू कर दी।
गणेश और छिग्गा के पास कट्टे थे जब उन्हें रोकने का प्रयास करने के लिए मैंने अपनी लायसेंसी बंदूक उठाई तो गणेश ने बंदूक छुड़ाकर दो फायर कर दिए। एक गोली मेरे चचेरे भाई गजेन्द्र के हाथ में लगी जबकि दूसरी गोली मेरी भाभी गीता के पेट में लग गई और सभी ने मिलकर मेरे पिता सीता, भाई महेश और मोहित की निर्ममता पूर्वक मारपीट की और वहां से भाग गए।
जबकि कुशवाह पक्ष की ओर से घायल घनश्याम कुशवाह का कहना है कि मोहित ओझा से गणेश को 600 रूपये लेने थे जिनमें से 100 रूपये मोहित को देने थे जब धीरज ने 100 रूपये काटकर 500 रूपये देने के लिए कहा तो वह झगड़े लगा।
बाद में उसके परिवार के लोग वहां एकत्रित हो गए और धीरज घर से बंदूक उठाकर लाया और उसने फायर कर दिए जिनमें से कुछ छर्रे गीता और गजेन्द्र को लग गए जिससे वह घायल हो गए।
इस घटना में वह स्वयं घायल हो गया है और वह सभी लोग अपने बचाव के लिए झूठी कहानी गढ़ रहे हैं। दोनों पक्षों द्वारा बताई गई घटना से पुलिस दुविधा की स्थिति में है और किस के ऊपर मामला दर्ज किया जाए इसके लिए कोतवाली पुलिस वरिष्ठ अधिकारियों से निर्देशन ले रही है जिस कारण दोपहर तक कोई मामला दर्ज नहीं हुआ था।
चुनावी रंजिश की भी सुगबुगाहट
इस घटना के पीछे पैसों के लेनदेन के साथ चुनावी रंजिश का भी कारण है। बताया जाता है कि वार्ड क्रमांक 1 में पार्षद पद के चुनाव में सीट महिला के लिए आरक्षित थी जहां से घायल सीताराम की पत्नी गीता ओझा और गणेश की माँ रामवती कुशवाह आमने-सामने चुनाव के मैदान थीं जिसे लेकर भी दोनों परिवारों के बीच रंजिश बनी हुई थी। हालांकि दोनों ही निर्दलीय प्रत्याशी चुनाव में पराजित हुए थे और उस समय से ही दोनों परिवारों के बीच मतभेद चले आ रहे थे।


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