आंगनबाड़ी केन्द्रों पर बिगड़े पौष्टिक आहार की हालत

shailendra gupta
शिवपुरी। महिला बाल विकास विभाग में संचालित मध्यान भोजन योजना किसी से कम नहीं है इन विभागों में आये दिन भ्रष्टाचार के नए-नए मामले उभरते नजर आ रहे है।

इन दिनों शहरी  एवं ग्रामीण आंगनबाड़ी केन्द्रों पर कुपोषण को दूर करने की दृष्टि से 0 से 5 वर्ष तक के बच्चों को स्वसहायता समूहों के माध्यम से पौष्टिक आहर देने की व्यवस्था की गई है, लेकिन आंगनबाड़ी केन्द्रों पर तो बच्चों को ठीक से न तो पौष्टिक आहार ही मिल रहा है और न ही बच्चों को प्राथमिक शिक्षा दी जा रही है। 

जानकारी के अनुसार इन दिनों महिला बाल विकास विभाग द्वारा संचालित आंगनबाड़ी केन्द्रों पर यदि ठीक से नजर दौड़ाई जाए तो महिला दिवस एवं बाल दिवस पर सरकार द्वारा तमाम राशि बच्चों व महिलाओं को प्रोत्साहित करने के लिए भेजी जाती है परंतु विभाग के अधिकारियों द्वारा उक्त योजनाओं के पैसों का अता पता ही नहीं चलता है और कागजों में खाना पूर्ति कर राशि का बंदर बांट कर लिया जाता है। 

यदि वहीं दूसरी ओर देखा जाए तो स्वसहायता समूह संचालक द्वारा मीनू अनुसार एवं क्वालटी युक्त पोषण आहार का वितरण नहीं किया जा रहा है। सूत्र तो यह भी बताते हैं कई ग्रामीण केन्द्रों पर पोषण आहार वितरण होता ही नहीं है तथा केन्द्र संचालक आंगनबाड़ी कार्यकर्ता भले ही पोषण आहार वितरण की एवं बच्चों की उपस्थिति की रिपोर्ट में कम दे परन्तु विभाग की सुपरवाईजर एवं अन्य कर्मचारी रिपोर्र्ट दूसरी तैयार कर स्वसहायता समूह संचालक से संाठ-गांठ कर 80-95 प्रतिशत उपस्थिति का भुगतान करा देते हैं जो सीआईडी जांच का प्रमुख विषय है।

जांच हो स्व सहायता समूहों की

यदि स्वसहायता समूहों में पर गहराई से चर्चा की जाए तो समूह संचालक वास्तविक रूप से समूह संचालन नहीं कर रहे हैं कई समूहों में तो ये भी पता चला है कि जो स्वसहायता समूह में सदस्य है उन्हें काई जानकारी ही नहीं है कि हमारा कौन  से समूह में नाम है ये सत्य है कि स्वसहायता समूह किसी के नाम संचालन और कोई कर रहा है। देखा जाए तो इन सभी स्व सहायता समूहों की जांच की जाना चाहिए।

हितग्राही हो रहे वंचित

प्रदेश में कुपोषण मिटाने की दृष्टि से सरकार ने इस योजना शुभारंभ किया था कि गांव-गांव में किसी भी प्रकार कोई बच्चा कुपोषित न रहे इसको लेकर आंगनबाड़ी केन्द्रों तथा विद्यालय में पोषण आहार का लाभ हितग्राहियों को मिले लेकिन स्थानीय अधिकारी इस ओर कतई ध्यान नहीं दे रहे हैं और न तो केन्द्रों पर बच्चों को समय पर पोषण आहार प्राप्त हो रहा है।

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