धर्म और संस्कृति की रक्षा करना हमारा कर्तव्य: बाल संत शारश्वत जी महाराज

shailendra gupta
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सुप्रसिद्ध कथाकार बालसंत शारश्वत भार्गव
शिवपुरी-ग्राम ककरवायां में चल रही श्रीमद् भागवत कथा में दिन प्रतिदिन बढ़ रही भीड़ से पूरा ककरवाया गांव भक्तिमय हो गया है। इस अवसर पर कथा वाचक सुप्रसिद्ध कथाकार बालसंत शारश्वत भार्गव ने बताया कि बिना धर्म कर्म के मनुष्य बबूल के समान है। आप का मनुष्य भौतिक चमक दमक में फसता जा रहा है।
अपनी सनातन संस्कृति को भूलता जा रहा है। आज संस्कृति विकृति में बदलती जा रही है। समय रहते अगर हम सचेत नहीं हुए तो बहुत गड़बड़ हो जाएगी। इसलिए बालसंत ने युवाओं से आह्वान किया कि हमें अपने धर्म और अपनी संस्कृति की रक्षा करना बहुत जरूरी है। आप कथा के तृतीय दिवस कथा में धू्रव प्रसंग, प्रहलाद प्रसंग वेद ही रोचक ढग़ से सुनाया बीच-बीच में बालसंत ने मीठे-मीठे भजन सुनाये जिसमें श्रृद्धालु नाचते रहे। कथा चौथे दिन कृष्ण जन्म अवतार की कथा प्रसंग सुनाया गया। पांचवें दिन गिर्राज धरण महाराज  लीला का विस्तार पूर्वक वर्णन किया जाएगा इस कथा ग्रामीण क्षेत्र सैकड़ा श्रृद्धालु भक्त कथा सुनने के लिए उमड़ रहे हैं।
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