पिछोर/शिवपुरी। आर्थिक तंगी अक्सर लोगों के सपनों को अधूरा छोड़ देती है, लेकिन शिवपुरी जिले के पिछोर की बेटी तनुष्का गुप्ता ने यह साबित कर दिया कि अगर हौसले बुलंद हों तो हालात भी रास्ता नहीं रोक सकते। मध्य प्रदेश पुलिस की स्टेनो एएसआई भर्ती परीक्षा में पूरे प्रदेश में दूसरा स्थान हासिल कर तनुष्का ने न सिर्फ अपने परिवार, बल्कि पूरे पिछोर और शिवपुरी जिले का नाम रोशन किया है। तनुष्का की सफलता सिर्फ एक परीक्षा में मिली रैंक नहीं, बल्कि संघर्ष, मेहनत और आत्मविश्वास की ऐसी कहानी है, जो हर युवा के लिए प्रेरणा बन गई है।
जब सहारा इंडिया बंद हुई, परिवार पर टूट पड़ा संकट
तनुष्का के पिता मुकेश कुमार गुप्ता कभी सहारा इंडिया में कार्यरत थे। उस समय परिवार का जीवन सामान्य और खुशहाल था। लेकिन सहारा इंडिया के बंद होने के बाद परिवार की आर्थिक स्थिति पूरी तरह डगमगा गई। लाखों रुपये का आर्थिक नुकसान हुआ। निवेशकों का पैसा लौटाने के लिए उन्हें अपनी दुकान तक बेचनी पड़ी। परिवार के सामने रोजी-रोटी का संकट खड़ा हो गया। एक समय ऐसा भी आया जब भविष्य पूरी तरह अनिश्चित दिखाई देने लगा।
हार नहीं मानी, चाय का ठेला लगाकर बेटियों के सपने पूरे किए
मुश्किल परिस्थितियों के बावजूद मुकेश गुप्ता ने हार नहीं मानी। लॉकडाउन के बाद उन्होंने पिछोर के छत्रसाल स्टेडियम के सामने एक छोटा-सा चाय का ठेला शुरू किया। इसी ठेले से होने वाली सीमित आमदनी से उन्होंने अपनी तीनों बेटियों की पढ़ाई जारी रखी। आर्थिक परेशानियों को कभी बेटियों की शिक्षा के आड़े नहीं आने दिया।
पिता का संघर्ष बना बेटी की सबसे बड़ी ताकत
तनुष्का ने अपने पिता के संघर्ष को बेहद करीब से देखा। उन्होंने तय कर लिया कि वे अपनी मेहनत से परिवार की मुश्किलों को कम करेंगी। सीमित संसाधनों के बावजूद उन्होंने पढ़ाई नहीं छोड़ी और प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी में पूरी लगन से जुट गईं दिन-रात की मेहनत रंग लाई और मध्य प्रदेश पुलिस की स्टेनो एएसआई परीक्षा में उन्होंने पूरे प्रदेश में दूसरा स्थान हासिल कर सफलता का नया इतिहास रच दिया।
पहले भी दिखा चुकी थीं अपनी प्रतिभा
तनुष्का की यह पहली बड़ी उपलब्धि नहीं है। इससे पहले वे इंटेलिजेंस ब्यूरो (आईबी) की लिखित परीक्षा भी उत्तीर्ण कर चुकी थीं। हालांकि कुछ कारणों से वे इंटरव्यू में शामिल नहीं हो सकीं और चयन से वंचित रह गईं। लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी। अपनी तैयारी जारी रखी और इस बार शानदार प्रदर्शन करते हुए प्रदेश में दूसरी रैंक हासिल कर यह साबित कर दिया कि असफलता सिर्फ सफलता की तैयारी होती है।
सरकारी स्कूल से पढ़ाई, फिर प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी
तनुष्का ने अपनी प्रारंभिक शिक्षा शासकीय कन्या विद्यालय, पिछोर से प्राप्त की। इसके बाद स्नातक (बीए) की पढ़ाई के साथ-साथ उन्होंने प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी भी जारी रखी। परिवार में बड़ी बहन मानसी गुप्ता का विवाह हो चुका है, जबकि छोटी बहन रिया गुप्ता बीकॉम की पढ़ाई के साथ सीए बनने की तैयारी कर रही हैं।
सफलता का श्रेय माता-पिता को दिया
तनुष्का अपनी इस उपलब्धि का पूरा श्रेय अपने माता-पिता को देती हैं। उनका कहना है कि उनके माता-पिता ने कठिन से कठिन समय में भी कभी बेटियों की पढ़ाई नहीं रुकने दी और हमेशा आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने कहा कि परिस्थितियां कितनी भी कठिन क्यों न हों, यदि लक्ष्य स्पष्ट हो, मेहनत ईमानदारी से की जाए और परिवार का साथ मिले तो सफलता निश्चित मिलती है।
अब वर्दी पहनकर देश और समाज की सेवा का सपना
प्रदेश में दूसरी रैंक हासिल करने के बाद तनुष्का अब पुलिस की वर्दी पहनकर समाज और देश की सेवा करना चाहती हैं। उनकी सफलता ने यह संदेश दिया है कि **सपनों को पूरा करने के लिए धन-दौलत नहीं, बल्कि मेहनत, आत्मविश्वास और मजबूत इरादों की जरूरत होती है। चाय के ठेले से शुरू हुई संघर्ष की कहानी अब सफलता की मिसाल बन गई है, जिसे लंबे समय तक याद रखा जाएगा।

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