शिवपुरी। शिवपुरी जिले के रन्नौद तहसील के हल्के से सस्पेंड पटवारी ने कोलारस एसडीएम कार्यालय में बीते रोज जहर गटक लिया। जहर खाने के बाद कार्यालय में हड़कंप मच गया। कार्यालय में मौजूद कर्मचारियों ने पटवारी प्रदीप गुप्ता को कोलारस के सरकारी अस्पताल में भर्ती कराया, जहां उसका इलाज जारी है। बताया जा रहा है कि पटवारी रन्नौद तहसील के इंचौनिया हल्के में पदस्थ था और यहां पर उसने आदिवासियों की जमीनों को खुर्द-बुर्द कर दिया था।
शिकायत के बाद पटवारी को सस्पेंड कर कोलारस एसडीएम कार्यालय में अटैच कर दिया था। पटवारी की जांच शिवपुरी एडीएम के यहां प्रचलित थी। सूत्रों का कहना है कि पटवारी की जांच सिद्ध हो चुकी थी और पटवारी की सेवा समाप्त करने की तैयारी भी चल रही थी। इसी क्रम में पटवारी को नोटिस भी जारी कर दिया गया था।
पटवारी प्रदीप गुप्ता ने अस्पताल में उपचार के दौरान मीडिया के कैमरों के सामने बताया कि उसका पिछले 8 माह से वेतन रुका हुआ था। उससे नामांतरण के प्रकरण में गलती हो गई थी, जिसे उसने स्वीकार भी कर लिया था। वह अपने परिवार के साथ एसडीएम कार्यालय पहुंचकर अपनी भूल के लिए क्षमायाचना भी कर चुका है। पटवारी का कहना है कि लंबे समय से वेतन नहीं मिलने के कारण उसका परिवार आर्थिक संकट से गुजर रहा है। घरेलू खर्च चलाना मुश्किल हो गया था, जिससे मानसिक तनाव बढ़ता गया और मजबूरी में उसने यह कदम उठा लिया।
वहीं, इस मामले में कोलारस एसडीएम अनूप श्रीवास्तव ने कहा कि संबंधित पटवारी द्वारा जमीनों के नामांतरण नियमों के विपरीत किए गए हैं। इस मामले की जांच चल रही है और विभागीय कार्रवाई होना तय है। उनके अनुसार पटवारी जांच और कार्रवाई से बचने के लिए इस तरह का कृत्य कर रहा है।
एसडीएम ने यह भी स्पष्ट किया कि पटवारी का वेतन एसडीएम कार्यालय से नहीं, बल्कि तहसील कार्यालय से जारी होता है। उन्होंने बताया कि संबंधित पटवारी कई महीनों से तहसील कार्यालय भी नहीं पहुंचा है। संभव है, इसी कारण उसकी सैलरी जारी नहीं हो सकी हो।
रन्नौद के शिवपुरी समाचार डॉट कॉम के संवाददाता की रिपोर्ट के अनुसार, पटवारी प्रदीप गुप्ता ने अपने हल्के इंचौनिया में राजनीतिक प्रभाव के चलते आदिवासियों की जमीन का अवैधानिक रूप से नामांतरण कर दिया था। मामले की शिकायत की गई और पटवारी को सस्पेंड कर दिया गया तथा कोलारस एसडीएम कार्यालय में अटैच कर दिया गया था। इस मामले की जांच जारी थी और जांच पटवारी के खिलाफ सिद्ध हो चुकी थी। शिवपुरी कलेक्टर अर्पित वर्मा ने पटवारी की सेवा समाप्त करने के अंतिम चरण में कारण बताओ नोटिस जारी किया था। पटवारी ने नोटिस का जवाब नहीं दिया और प्रशासन पर प्रेशर बनाने के लिए एसडीएम कार्यालय में जहर गटक लिया। पटवारी के हेल्थ बुलेटिन में अब वह खतरे से बाहर बताया गया है।
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