शिवपुरी। शिवपुरी के माधव टाइगर रिजर्व की मादा बाघ एमटी-1 की लोकेशन पिछले डेढ़ साल से नहीं मिल रही है। बाघिन केवल कागजी आंकड़ों में मौजूद है और इन्हीं कागजों के आधार पर शिवपुरी विधायक देवेन्द्र जैन ने मादा बाघ की कुशलक्षेम और उसके जीवित होने के सबूत मांगे थे। प्रबंधन ने भी कागज पर लिखकर जवाब दे दिया कि उसकी तलाश जारी है।
आज भी कागजों में टाइगर रिजर्व के बाघों की संख्या 8 ही दर्ज की जाती है, लेकिन धरातल पर एक बाघ गायब है। कुल मिलाकर कागजी व्यवस्था पर चल रहा प्रबंधन आज तक कागज के टुकड़े पर भी एमटी-1 की लोकेशन दर्ज नहीं कर पाया है। न तो लापता बाघिन के जीवित होने की पुष्टि हुई है और न ही उसकी मौत के कोई आधिकारिक सबूत सामने आए हैं।
विधानसभा तक पहुंचा मामला, फिर भी जवाब अधूरा
एमटी-1 के गायब होने का मामला वर्ष 2025 में विधानसभा तक पहुंचा। शिवपुरी विधायक ने इस संबंध में सरकार से सवाल पूछा था। जवाब में वन विभाग ने केवल इतना कहा कि बाघिन का पता नहीं चल पाया है और उसकी तलाश जारी है। लेकिन तब से लेकर अब तक स्थिति जस की तस बनी हुई है।
सबसे बड़ा सवाल—जब हर बाघ पर निगरानी होती है, तो एमटी-1 कैसे गायब हो गई?
टाइगर रिजर्व में बाघों की निगरानी के लिए कैमरा ट्रैप, गश्ती दल और अन्य तकनीकी व्यवस्थाएं होने का दावा किया जाता है। ऐसे में एक व्यस्क बाघिन का महीनों नहीं, बल्कि डेढ़ साल तक बिना किसी सुराग के गायब रहना कई गंभीर सवाल खड़े करता है। यदि बाघिन जंगल में जीवित है तो उसकी तस्वीर, मूवमेंट या पगमार्क क्यों नहीं मिले? और यदि उसकी मौत हो चुकी है तो उसके अवशेष या अन्य प्रमाण आखिर कहां हैं?
शिकारी ने किया था शिकार का दावा, लेकिन जांच वहीं थम गई
इस रहस्य को और गहरा करने वाला एक और पहलू सामने आया था। लगभग एक वर्ष पहले नरवर क्षेत्र से पकड़े गए शिकारी सौजीराम मोगिया ने दावा किया था कि उसने गायब मादा बाघ का शिकार किया है। हालांकि वन विभाग ने इस दावे की आधिकारिक पुष्टि नहीं की। इतना ही नहीं, उपलब्ध जानकारी के अनुसार इस मामले को जांच और प्रकरण में भी निर्णायक रूप से नहीं जोड़ा गया। इससे यह सवाल और गहरा हो गया कि क्या शिकारी का दावा केवल बयान था या उसके पीछे कोई सच्चाई भी छिपी थी?
आंकड़ों में 8 बाघ, लेकिन एक की लोकेशन नहीं
माधव टाइगर रिजर्व प्रबंधन का कहना है कि वर्तमान में रिजर्व में कुल आठ बाघ हैं। लेकिन इन्हीं आठ में शामिल एमटी-1 की लोकेशन उनके पास नहीं है। यानी कागजों में संख्या पूरी है, लेकिन एक बाघिन का अस्तित्व अब भी रहस्य बना हुआ है।
एक बाघिन बाड़े में, दूसरी लापता
इधर, दूसरी मादा बाघ एमटी-6 को सुरवाया क्षेत्र में लगातार मानव और मवेशियों पर हमलों के बाद ट्रैंकुलाइज कर बलारपुर स्थित बाड़े में रखा गया है, जहां वह पिछले दो महीने से कैद है। ऐसे में टाइगर रिजर्व के प्रबंधन और बाघों की निगरानी व्यवस्था पर भी सवाल उठ रहे हैं।
बफर जोन का काम भी अधूरा
टाइगर रिजर्व घोषित होने के समय 375 वर्ग किलोमीटर के कोर एरिया के साथ 1275 वर्ग किलोमीटर बफर जोन विकसित करने की योजना बनाई गई थी। लेकिन डेढ़ साल बाद भी बफर जोन का काम पूरा नहीं हो पाया है। इससे संरक्षण और वन्यजीव प्रबंधन की गति पर भी प्रश्नचिह्न लग रहे हैं।
क्या कहते हैं अधिकारी
माधव टाइगर रिजर्व के उप संचालक हरिओम शर्मा का कहना है कि फिलहाल रिजर्व में कुल आठ बाघ हैं, लेकिन एक मादा बाघ की लोकेशन काफी समय से नहीं मिल रही है। उसकी तलाश लगातार जारी है। उन्होंने यह भी कहा कि बाघिन के शिकार के संबंध में अभी तक कोई ठोस प्रमाण नहीं मिले हैं। वहीं बफर जोन का प्रस्ताव वरिष्ठ कार्यालय को भेजा जा चुका है और आगे की कार्रवाई वहां से होनी है।
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