Shivpuri News: आषाढ़ ने दिया धोखा, अब सावन-भादो के भरोसे, क्या सच होगी पुरखों की कहावत

Lalit Mudgal
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शिवपुरी।
सावन-भादो खूब चलत हैं, फागुन में थोड़ी... बुंदेलखंड और ग्वालियर-चंबल अंचल में पीढ़ियों से चली आ रही यह कहावत इन दिनों शिवपुरी वासियों की उम्मीद बन गई है। वजह यह है कि इस बार आषाढ़ उम्मीदों पर खरा नहीं उतरा। न खेतों की प्यास बुझी, न तालाब लबालब हुए और न ही जिले की जीवनरेखा माने जाने वाले बड़े बांध भर सके। अब किसानों से लेकर शहरवासियों तक की निगाहें सावन और भादो की बारिश पर टिकी हैं। इस साल 2026 में सावन (श्रावण) का पवित्र महीना 30 जुलाई 2026 (गुरुवार) से शुरू हो रहा है,और आज आषाढ का अंतिम दिन है,उम्मीद है अब शिवपुरी के प्यासे डेम और तालाबो की प्यास बुझाने के लिए सावन मे झर (लगातार बारिश) लगने चाहिए। 

क्योंकि यदि इन दो महीनों में बादल मेहरबान नहीं हुए, तो सिर्फ खरीफ ही नहीं, बल्कि रबी की सिंचाई, पेयजल व्यवस्था और बिजली उत्पादन तक पर संकट गहरा सकता है। आंकड़े भी चिंता बढ़ा रहे हैं, जिले में अब तक केवल 228.24 मिमी वर्षा दर्ज हुई है, जबकि पिछले वर्ष इसी अवधि तक 795.31 मिमी बारिश हो चुकी थी। ऐसे में हर किसी के मन में एक ही सवाल है-क्या इस बार पुरखों की कहावत सच साबित होगी?

लाइफ लाइन बने बांध भी आधे-अधूरे
शिवपुरी शहर सहित सैकड़ों गांवों की पेयजल और सिंचाई व्यवस्था की रीढ़ माने जाने वाले अटल सागर (मड़ीखेड़ा) बांध में अभी तक केवल 58 प्रतिशत जलभराव हुआ है। वहीं मोहनी सागर बांध महज 32 प्रतिशत ही भर पाया है। दोनों बांधों का पानी केवल शिवपुरी ही नहीं, बल्कि ग्वालियर जिले के कई क्षेत्रों तक पहुंचता है। यही कारण है कि प्रशासन फिलहाल पानी का उपयोग बेहद सावधानी से कर रहा है।

रबी की फसल को लेकर भी बढ़ी चिंता
बारिश कम होने का असर केवल खरीफ की खेती तक सीमित नहीं है। यदि सावन और भादो में अच्छी बारिश नहीं हुई तो रबी की फसल के लिए सिंचाई का संकट भी खड़ा हो सकता है। इसी आशंका को देखते हुए प्रशासन ने अभी तक बांधों की नहरें नहीं खोली हैं, ताकि पानी का भंडारण सुरक्षित रखा जा सके। कृषि विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले दो महीने जिले की खेती के लिए बेहद अहम साबित होंगे।

बिजली उत्पादन पर भी पड़ा असर
अटल सागर बांध का महत्व केवल सिंचाई और पेयजल तक सीमित नहीं है। बांध में पर्याप्त पानी होने पर यहां जलविद्युत उत्पादन भी होता है। पिछले वर्ष बांध के लबालब भरने के बाद गेट खोले गए थे और लगभग 1500 घंटे तक बिजली उत्पादन हुआ था। लेकिन इस बार जलस्तर कम होने से बिजली उत्पादन की संभावनाएं भी फिलहाल धूमिल नजर आ रही हैं।

तालाब और अमृत सरोवर भी प्यासे
कम बारिश का असर जिले के छोटे जलाशयों पर भी साफ दिखाई दे रहा है। जिले में बनाए गए 100 से अधिक अमृत सरोवर, गांवों के तालाब, तलैया और नावली, बुधना, पारोंच तथा अकाझिरी जैसे छोटे बांध भी अभी तक पूरी तरह नहीं भर पाए हैं। इन जलाशयों पर ग्रामीण क्षेत्रों की सिंचाई और पशुओं के लिए पानी की व्यवस्था निर्भर करती है। यदि आने वाले दिनों में अच्छी बारिश नहीं हुई तो ग्रामीण इलाकों में जल संकट गहरा सकता है।

जिलेभर में यह रही बारिश
भू-अभिलेख विभाग के अनुसार अब तक शिवपुरी में 285.50 मिमी, बैराड़ में 91 मिमी, पोहरी में 226 मिमी, नरवर में 286 मिमी, करैरा में 224.40 मिमी, पिछोर में 231 मिमी, कोलारस में 267 मिमी, बदरवास में 251.80 मिमी और खनियाधाना में 191.50 मिमी वर्षा दर्ज की गई है। जिले की औसत वार्षिक वर्षा 816.30 मिमी मानी जाती है।

अब सावन-भादो पर टिकी उम्मीद
आषाढ़ ने इस बार उम्मीदों पर पानी फेर दिया, लेकिन अभी मानसून के दो सबसे अहम महीने—सावन और भादो—बाकी हैं। ग्रामीणों का मानना है कि "सावन-भादो खूब चलत हैं..." वाली पुरखों की कहावत यदि इस बार भी सच साबित हुई, तो बांध भर जाएंगे, खेत लहलहा उठेंगे और जिले पर मंडरा रहा जल संकट काफी हद तक टल जाएगा। लेकिन यदि इन दो महीनों में भी बादल मेहरबान नहीं हुए, तो आने वाले समय में किसानों के साथ-साथ शहर की पेयजल व्यवस्था, सिंचाई और बिजली उत्पादन पर भी गंभीर संकट खड़ा हो सकता है।

क्या कहते हैं अधिकारी
अटल सागर बांध के कार्यपालन यंत्री नवीन शाक्य ने बताया कि कम वर्षा के कारण अभी तक अटल सागर बांध 58 प्रतिशत और मोहनी सागर बांध 32 प्रतिशत ही भर पाए हैं। आने वाले दिनों में अच्छी बारिश होने पर ही जलाशयों में संतोषजनक जलभराव की उम्मीद की जा सकती है।

जिले में अभी तक 228.24 मिलीमीटर वर्षा हुई
जिले में 1 जून 2026 से अभी तक 228.24 मिमी औसत वर्षा दर्ज हुई है। जिले मे गत वर्ष इस समय 795.31 मिमी औसत वर्षा हुई थी। भू-अभिलेख शिवपुरी के अधीक्षक ने बताया कि जिले की औसत वर्षा 816.3 मिमी है। गत वर्ष जिले में कुल 1585.86 मिमी वर्षा रिकार्ड की गई थी। अभी तक शिवपुरी में 285.50 मिमी, वैराड में 91 मिमी, पोहरी में 226 मिमी, नरखर में 286 मिमी, करैरा में 224.40 मिमी, पिछोर में 231 मिमी, कोलारस में 267 मिमी, बदरवास में 251.80 मिमी और खनियाधाना में 191.50 मिमी वर्षा दर्ज हुई है।

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