शिवपुरी। शिवपुरी शहर की विकास की गति पर लगा ग्रहण हटने का नाम नही नही ले रहा है,शिवुपरी की कुंडली मे विकास की चाल धीमी है,या यू कह लो वेंटिलेटर पर लटकी हैं,शहर के पिछले प्रोजेक्टो की गति पर नजर डाले तो कछुआ की चाल की स्पीड अधिक है,कुडंली मे बैठे नीच ग्रह फाइलो पर बेठ जाते है और उसकी गति को कम कर देते है,अब पता नही शिवपुरी की प्रस्तावित 81 बीघा की कॉलोनी पर कौनसा ग्रह बैठ गया जिससे फाइल आगे की नही बढ रही है। इस कारण यह प्रोजेक्ट अभी कागजो के फेर मे ही लटका पडा है।
मेडिकल कॉलेज के पीछे नौहरीखुर्द क्षेत्र में मध्यप्रदेश हाउसिंग बोर्ड द्वारा प्रस्तावित 81 बीघा की सबसे बड़ी आवासीय कॉलोनी प्रशासनिक देरी के कारण आगे नहीं बढ़ पा रही है। लगभग 16.201 हेक्टेयर भूमि पर विकसित होने वाले इस प्रोजेक्ट की 28.99 करोड़ रुपए की डीपीआर तैयार हो चुकी है और टाउन एंड कंट्री प्लानिंग (टीएंडसीपी) से करीब एक वर्ष पहले नक्शा भी स्वीकृत कराया जा चुका है। इसके बावजूद नगर पालिका से विकास अनुमति नहीं मिलने के कारण पूरा प्रोजेक्ट पिछले सात महीनों से ठप पड़ा हुआ है।
जानकारी के अनुसार हाउसिंग बोर्ड ने 6 जनवरी 2026 को नगर पालिका में विकास अनुमति के लिए आवेदन किया था। नगर पालिका ने आवेदन के साथ 6.01 लाख रुपए परमिशन फीस जमा कराई। इसके बाद 12 जुलाई को 57.98 लाख रुपए सुपरविजन चार्ज भी जमा करा दिया गया। यानी अनुमति के लिए आवश्यक लगभग 64 लाख रुपए की राशि जमा होने के बाद भी विकास अनुमति जारी नहीं की गई।
अनुमति नहीं, इसलिए आगे का पूरा काम ठप
विकास अनुमति नहीं मिलने से भवन निर्माण की अनुमति भी जारी नहीं हो पा रही है। इसकी वजह से न तो निर्माण कार्य शुरू हो रहा है और न ही परियोजना को रेरा में पंजीकृत कराया जा सका है। जब तक रेरा पंजीयन नहीं होगा, तब तक आवासों की बुकिंग भी शुरू नहीं हो सकेगी। इसका सीधा असर उन लोगों पर पड़ रहा है जो लंबे समय से हाउसिंग बोर्ड की इस कॉलोनी का इंतजार कर रहे हैं।
पहले सुरक्षा, फिर निर्माण
प्रोजेक्ट शुरू होने में देरी को देखते हुए हाउसिंग बोर्ड ने फिलहाल जमीन की सुरक्षा का काम शुरू कर दिया है। 81 बीघा भूमि की बाउंड्रीवाल निर्माण का टेंडर भोपाल की एक कंपनी को दिया जा चुका है। बताया गया है कि खाली पड़ी जमीन पर अवैध मुरम और पत्थर उत्खनन के कारण कई स्थानों पर गड्ढे हो गए हैं। ऐसे में सबसे पहले बाउंड्रीवाल बनाकर जमीन को सुरक्षित किया जाएगा।
पीएम आवास परियोजना भी अधूरी
गौरतलब है कि इसी क्षेत्र के पास नगर पालिका का 1030 पीएम आवासों का प्रोजेक्ट भी लंबे समय से अधूरा पड़ा हुआ है। ऐसे में अब हाउसिंग बोर्ड की नई आवासीय योजना भी अनुमति के अभाव में अटक जाने से नगर पालिका की कार्यप्रणाली पर सवाल उठने लगे हैं।
हाउसिंग बोर्ड ने जताई नाराजगी
मध्यप्रदेश हाउसिंग बोर्ड के कार्यपालन यंत्री अशोक कुमार पंत का कहना है कि सात महीने पहले आवेदन किया जा चुका है। आवश्यक सुपरविजन चार्ज भी जमा करा दिया गया है, लेकिन नगर पालिका की ओर से विकास अनुमति जारी करने में लगातार देरी की जा रही है। अनुमति मिलते ही रेरा में पंजीयन कराकर बुकिंग शुरू कर दी जाएगी।
सीएमओ बोले—जल्द करेंगे कार्रवाई
वहीं नगर पालिका के सीएमओ यशवंत राठौर ने कहा कि मामले की जानकारी लेकर फाइल का परीक्षण कराया जाएगा। यदि सुपरविजन चार्ज जमा हो चुका है तो विकास अनुमति जल्द जारी करने की कार्रवाई की जाएगी।
अब आगे क्या होगा ?
नगर पालिका से विकास अनुमति मिलने के बाद भवन निर्माण की अनुमति जारी होगी। इसके बाद हाउसिंग बोर्ड सड़क, बिजली, पानी और अन्य आधारभूत सुविधाओं के निर्माण के लिए टेंडर प्रक्रिया शुरू करेगा। रेरा में पंजीयन होने के बाद आवासों की बुकिंग प्रारंभ की जाएगी। फिलहाल पूरी योजना सरकारी फाइलों में अटकी हुई है और शहर के हजारों परिवारों का अपने घर का सपना इंतजार में है।
इस फाइल की रूकावट पर यह सवाल उठ रहे हैं
7 महीने तक फाइल क्यों रुकी रही?
किस अधिकारी की टेबल पर फाइल लंबित है?
क्या कोई आपत्ति लगाई गई थी? यदि हां, तो कब दूर हुई?
नियमों के अनुसार विकास अनुमति जारी करने की समय सीमा कितनी है?
क्या देरी के लिए किसी अधिकारी की जवाबदेही तय होगी?
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